बलौदाबाजार में झोलाछाप के क्लिनिक में नवविवाहिता की मौत, बिना पोस्टमार्टम हुआ अंतिम संस्कार

बलौदाबाजार झोलाछाप क्लिनिक: सर्दी-खांसी के इलाज के लिए गई थी 25 वर्षीय गर्भवती महिला, इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत…परिजन नहीं कराए पीएम, पुलिस में भी नहीं दर्ज हुई रिपोर्ट… कई सवाल अब भी अनुत्तरित

बलौदाबाजार: बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम छेरकाडीह जारा में एक दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सर्दी-खांसी के मामूली इलाज के लिए गई 25 वर्षीय गर्भवती नवविवाहिता की एक कथित झोलाछाप डॉक्टर के क्लिनिक में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि शव का पोस्टमार्टम कराए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस पूरे मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, अवैध क्लिनिकों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामूली शिकायत, लेकिन अंजाम भयावह

मृतका इंदु साहू (25) पत्नी अजय साहू को सर्दी-खांसी की शिकायत थी। गुरुवार को वह गांव में ही उपचार कराने कथित डॉक्टर जयंत साहू के पास पैदल पहुंची। परिजनों के अनुसार, जब वह पहली बार वहां गई तो डॉक्टर घर पर नहीं था, इसलिए वह वापस लौट आई। कुछ समय बाद जब जानकारी मिली कि वह आ गया है, तो इंदु दोबारा क्लिनिक पहुंची। डॉक्टर का कहना है कि इंदु को सामान्य सर्दी-खांसी थी और वह करीब 15-20 मिनट तक क्लिनिक में रही। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो महिला को इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। उसे उल्टियां होने लगीं और वह अचेत हो गई।

सुई लगने के बाद गिरी” – प्रत्यक्षदर्शियों का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही मिनट बाद इंदु ने घबराहट की शिकायत की और उल्टी करने लगी। देखते ही देखते वह जमीन पर गिर गई। क्लिनिक में मौजूद लोग घबरा गए। कथित डॉक्टर जयंत साहू का दावा है कि उसने बेहोश महिला को पानी पिलाया, जिससे वह कुछ क्षण के लिए होश में आई, लेकिन फिर दोबारा अचेत हो गई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उसे कौन-सी दवा दी गई थी, क्या मात्रा थी और क्या गर्भावस्था की जानकारी डॉक्टर को थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जयंत साहू ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसके पास वैध मेडिकल डिग्री नहीं है। इसके बावजूद वह गांव में क्लिनिक संचालित कर रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी मौत

जब इंदु काफी देर तक घर नहीं लौटी तो उसकी सास कांति साहू उसे ढूंढते हुए क्लिनिक पहुंचीं। वहां उन्होंने बहू को अपने पति की गोद में अचेत अवस्था में देखा। आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी ले जाया गया. अस्पताल पहुंचने पर ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि महिला की मौत अस्पताल लाने से पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे शव लाया गया था। बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि महिला को अस्पताल लाने वालों में कथित डॉक्टर जयंत साहू भी शामिल था।

चार घंटे तक मंथन, फिर बिना पीएम ले गए शव

अस्पताल में करीब चार घंटे तक परिजन आपस में चर्चा करते रहे। इस दौरान पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पर बात हुई। लेकिन अंततः शाम करीब 6 बजे परिजनों ने लिखित आवेदन देकर पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार कर दिया गया। यहीं से यह मामला और गंभीर हो जाता है। इंजेक्शन के बाद अचानक बिगड़ी हालत, गर्भवती महिला की मौत, और फिर बिना पीएम अंतिम संस्कार… ऐसे में मौत के असली कारण पर हमेशा के लिए पर्दा पड़ गया।

पुलिस में रिपोर्ट भी नहीं

इस पूरे घटनाक्रम में अब तक थाना स्तर पर कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। न ही किसी प्रकार की आधिकारिक शिकायत सामने आई है। सवाल यह है कि क्या परिजन किसी दबाव में थे? क्या उन्हें मामले की गंभीरता का अंदाजा नहीं था? या फिर गांव में समझौते की कोशिश हुई? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

अवैध क्लिनिकों पर फिर उठे सवाल

ग्रामीण इलाकों में बिना डिग्री के इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है। मामूली बीमारियों से लेकर गंभीर मामलों तक में ऐसे लोग इलाज करते नजर आते हैं। कई बार मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सख्ती शायद ही कभी दिखती है। यह घटना भी बताती है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जागरूकता की कमी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है। गर्भवती महिला को दवा देने से पहले उसकी स्थिति की जांच, एलर्जी या रिएक्शन की संभावना जैसे बुनियादी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी था।

प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में

अब तक न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान आया है और न ही अवैध क्लिनिक पर कार्रवाई की जानकारी। जबकि स्वयं संबंधित व्यक्ति यह मान चुका है कि उसके पास वैध डिग्री नहीं है। अगर बिना डिग्री कोई व्यक्ति इलाज कर रहा था तो क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं थी? क्या ऐसे क्लिनिकों की कोई निगरानी नहीं होती?

एक परिवार की दुनिया उजड़ी

इंदु साहू की शादी को ज्यादा समय नहीं हुआ था। वह गर्भवती थी और परिवार में नए मेहमान के आने की उम्मीद थी। लेकिन एक साधारण सर्दी-खांसी के इलाज ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। गांव में शोक का माहौल है। परिजन अब भी सदमे में हैं। लेकिन इस चुप्पी के बीच कई सवाल दब गए हैं, जिनका जवाब शायद कभी नहीं मिल पाएगा।

क्या होगा आगे?

बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार हो जाने से कानूनी प्रक्रिया जटिल हो गई है। अगर भविष्य में कोई शिकायत दर्ज होती है, तो साक्ष्यों की कमी बड़ी बाधा बन सकती है। कानून के जानकारों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में स्वतः संज्ञान लेकर जांच की जा सकती है, खासकर जब मामला संदिग्ध हो और मौत क्लिनिक में हुई हो।

जरूरी है कड़ी कार्रवाई

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी की तस्वीर भी है। जब तक अवैध क्लिनिकों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ, भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, ऐसे हादसे दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा। अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर हैं। क्या इस मामले में जांच होगी? क्या झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे? फिलहाल, एक नवविवाहिता की असमय मौत ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं। सर्दी-खांसी के इलाज के लिए गई एक गर्भवती महिला की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जवाब की उम्मीद अभी बाकी है।

 

रिपोर्ट: चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com

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