बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में मादा स्लॉथ बियर अपने दो शावकों को पीठ पर बैठाकर घूमती दिखी। पर्यटकों के लिए बना खास आकर्षण।
Baranwapara Mother Sloth Bear: छत्तीसगढ़ की हरियाली के बीच बसा बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य इन दिनों एक खास वजह से सुर्खियों में है। यहां जंगल सफारी पर निकले पर्यटकों को ऐसा दृश्य देखने मिल रहा है, जो आमतौर पर वन्यजीव डॉक्यूमेंट्री में दिखता है। एक मादा स्लॉथ बियर, अपनी पीठ पर दो नन्हे शावकों को बैठाए, बेफिक्र अंदाज़ में जंगल के रास्तों पर घूमती नजर आ रही है।
यह दृश्य सिर्फ रोमांच नहीं, बल्कि प्रकृति के सबसे कोमल भाव — मातृत्व — का जीवंत उदाहरण है। सफारी वाहन जैसे ही जंगल के भीतर बढ़ते हैं, गाइडों की नजरें अब अक्सर उसी दिशा में टिक जाती हैं, जहां “मदर बियर” अपने बच्चों के साथ दिखाई देती है।
Baranwapara Mother Sloth Bear: पीठ पर सवारी करते नन्हे शावक
स्लॉथ बियर यानी रीछ की यह प्रजाति अपने बच्चों को पीठ पर बैठाकर चलने के लिए जानी जाती है। लेकिन खुले जंगल में इसे इस तरह बार-बार देख पाना दुर्लभ अनुभव होता है। जब मादा भालू जंगल की झाड़ियों के बीच से निकलती है, तो उसके दोनों शावक उसकी पीठ से चिपके रहते हैं। कभी वे इधर-उधर झांकते हैं, तो कभी सिर नीचे कर मां की फर में छिप जाते हैं। पर्यटक इस दृश्य को देख दंग रह जाते हैं। कैमरों की क्लिक की आवाजें तेज हो जाती हैं, लेकिन जंगल का अनुशासन बनाए रखने के लिए वाहन दूरी बनाकर खड़े रहते हैं। यह नजारा कुछ क्षणों का होता है, पर देखने वालों के लिए जीवनभर की याद बन जाता है।
देखिए Exclusive VIDEO: बारनवापारा सफारी का सबसे क्यूट सरप्राइज! भालू के बच्चों की अपनी ‘मम्मा टैक्सी’ पर सवारी। 🌿🐻
कैमरे में कैद हुए दुर्लभ पल
वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह समय किसी सौगात से कम नहीं। हाल ही में फोटोग्राफर डॉ. महेंद्र अनंत ने इन खूबसूरत पलों को अपने कैमरे में कैद किया। तस्वीरों में मादा भालू के चेहरे पर सतर्कता और शावकों की मासूम जिज्ञासा साफ नजर आती है। इससे पहले डॉ. आलोक सिंह भी इस “मदर बियर” की शानदार तस्वीरें ले चुके हैं। उनकी तस्वीरों में जंगल की पृष्ठभूमि और पीठ पर बैठे शावकों का संतुलन ऐसा दिखता है, मानो प्रकृति खुद कोई कहानी सुना रही हो। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे छत्तीसगढ़ के वन्यजीव संरक्षण की सफलता का प्रतीक मान रहे हैं।
गाइडों में उत्साह, पर्यटकों में रोमांच
स्थानीय गाइड चैनसिंह ध्रुव बताते हैं कि पिछले कुछ समय से यह मादा भालू अपने शावकों के साथ सफारी मार्ग के आसपास नजर आ रही है। वे कहते हैं कि हर बार जब पर्यटक इसे देखते हैं, तो उनके चेहरे पर आश्चर्य और खुशी साफ दिखती है।
स्थानीय गाइड चैनसिंह ध्रुव के अनुसार, शावकों का मां की पीठ पर सवार होना स्वाभाविक व्यवहार है, क्योंकि इससे उन्हें सुरक्षा मिलती है। जंगल में शिकारियों या अन्य खतरों से बचाने के लिए मां उन्हें इस तरह साथ रखती है।
पर्यटक अक्सर गाइड से पूछते हैं कि क्या वे करीब जा सकते हैं। लेकिन सुरक्षा नियमों के तहत दूरी बनाए रखना अनिवार्य है। यही अनुशासन इस अनुभव को सुरक्षित और सुखद बनाता है।
बेहतर पारिस्थितिकी का संकेत
वन विभाग के जानकार मानते हैं कि मादा भालू का अपने शावकों के साथ बार-बार दिखना इस बात का संकेत है कि अभयारण्य का पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है। जब वन्यजीव सुरक्षित महसूस करते हैं, तभी वे खुले में इस तरह विचरण करते हैं। स्लॉथ बियर आमतौर पर शर्मीले स्वभाव की होती है और इंसानी गतिविधियों से दूर रहना पसंद करती है। ऐसे में उनका इस तरह दिखना यह दर्शाता है कि जंगल का वातावरण संतुलित है और संरक्षण के प्रयास प्रभावी हैं।
रोमांच और जिम्मेदारी साथ-साथ
जंगल सफारी का रोमांच तभी सार्थक है, जब पर्यटक जिम्मेदारी भी निभाएं। वन्यजीवों को भोजन देना, तेज आवाज करना या वाहन से उतरना सख्त मना है। गाइड लगातार पर्यटकों को समझाते हैं कि यह अनुभव प्रकृति की कृपा है, इसे अनुशासन के साथ ही संजोया जा सकता है।
“मदर स्लॉथ बियर” का यह दृश्य लोगों को आकर्षित जरूर कर रहा है, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दे रहा है कि वन्यजीवों की दुनिया में हम सिर्फ मेहमान हैं।
Baranwapara Mother Sloth Bear: बढ़ रही है पर्यटकों की संख्या
इस अनोखे दृश्य की चर्चा फैलने के बाद अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। वीकेंड पर सफारी के लिए अग्रिम बुकिंग की मांग बढ़ गई है। पर्यटक सिर्फ बाघ या तेंदुए की तलाश में नहीं, बल्कि इस अनोखी “मदर बियर” को देखने की उम्मीद में भी पहुंच रहे हैं। परिवारों के साथ आए बच्चे इस दृश्य को देखकर बेहद उत्साहित होते हैं। कई माता-पिता इसे बच्चों को प्रकृति और वन्यजीवों के बारे में समझाने का अवसर मानते हैं।
Baranwapara Mother Sloth Bear: प्रकृति की पाठशाला
जंगल में यह दृश्य किसी पाठशाला से कम नहीं। यहां मातृत्व, संरक्षण और सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण दिखता है। मादा भालू अपने शावकों को न सिर्फ खतरे से बचा रही है, बल्कि उन्हें जंगल के रास्ते, भोजन की तलाश और जीवन जीने के तरीके भी सिखा रही है। शावक धीरे-धीरे बड़े होंगे, अपनी दुनिया तलाशेंगे। लेकिन अभी वे मां की पीठ पर सुरक्षित हैं। यही दृश्य हर दर्शक के मन में एक कोमल भावना जगा देता है।
एक यादगार कहानी
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य की यह कहानी सिर्फ एक वन्यजीव दृश्य भर नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है, जो प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन से जन्म लेता है।जब सफारी वाहन जंगल के रास्ते से लौटते हैं, तो पर्यटकों के बीच चर्चा सिर्फ उसी “मदर स्लॉथ बियर” की होती है। कोई उसकी तस्वीरें देख रहा होता है, कोई वीडियो साझा कर रहा होता है।
जंगल के भीतर कुछ मिनटों का यह दृश्य, लोगों के दिलों में लंबे समय तक जिंदा रहता है। और शायद यही कारण है कि बारनवापारा आज सिर्फ एक अभयारण्य नहीं, बल्कि एक जीवंत कहानी बन चुका है — जहां हरियाली के बीच एक मां अपने बच्चों को पीठ पर बैठाकर दुनिया दिखा रही है, और इंसान दूर खड़े होकर उस दृश्य से जीवन का सबसे सरल और सुंदर पाठ सीख रहा है।
रिपोर्ट: चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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