बलौदाबाजार में ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ का संकल्प, 100 दिवसीय अभियान के साथ जागरूकता की नई शुरुआत विश्व क्षय दिवस पर जिले में जागरूकता कार्यक्रमों की श्रृंखला, मोबाइल टीमों के जरिए घर-घर पहुंचेगी जांच सुविधा
बलौदा बाजार। टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ के सशक्त नारे के साथ जिले में विश्व क्षय दिवस पर जनजागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा अभियान शुरू किया गया। इस मौके पर न सिर्फ लोगों को टीबी रोग के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 100 दिवसीय विशेष अभियान की भी शुरुआत की गई। जिलेभर में आयोजित कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा संस्थानों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई। वहीं स्कूलों में परिचर्चा आयोजित कर बच्चों और युवाओं को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया गया।
जागरूकता के जरिए बीमारी पर प्रहार!
कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य टीबी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना रहा। जागरूकता गतिविधियों के दौरान यह बताया गया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन सही समय पर उपचार शुरू कर देने से यह पूरी तरह ठीक हो सकती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश कुमार अवस्थी ने बताया कि लंबे समय तक खांसी, वजन कम होना, बुखार आना और रात में पसीना आना जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करानी चाहिए। जितनी जल्दी बीमारी की पहचान होगी, उतना ही जल्दी इलाज संभव होगा और संक्रमण फैलने का खतरा भी कम रहेगा।
मरीजों की काउंसिलिंग और शपथ कार्यक्रम…
कार्यक्रम के दौरान टीबी के इलाजरत मरीजों के लिए विशेष काउंसिलिंग सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने, पूरा कोर्स पूरा करने और नशे से दूर रहने की सलाह दी गई। मरीजों को यह भी समझाया गया कि बीच में इलाज छोड़ देना बीमारी को और गंभीर बना सकता है। इसके अलावा उपस्थित लोगों को टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक शपथ भी दिलाई गई।
योजनाओं की दी गई जानकारी!
जागरूकता कार्यक्रमों में सरकार की विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई। इनमें निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली सहायता और निक्षय मित्र अभियान की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि टीबी मरीजों को इलाज के दौरान पोषण सहायता दी जाती है, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। वहीं निक्षय मित्र के माध्यम से समाज के लोग मरीजों की मदद कर सकते हैं।
100 दिवसीय अभियान की शुरुआत
इस अवसर पर जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत उच्च जोखिम वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष फोकस किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न इलाकों में जाकर लोगों की जांच करेंगी। इन टीमों के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त हैंड हेल्ड एक्सरे मशीनें भी उपलब्ध हैं, जिससे मौके पर ही जांच संभव होगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश कुमार अवस्थी ने छत्तीसगढ़ टॉक से बातचीत में कहा— “हर वर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं—देशों के नेतृत्व में, जनता की शक्ति से’ रखी गई है। इसी के तहत जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के दौरान चिन्हित उच्च जोखिम वाले शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के संभावित मरीजों की सक्रिय खोज की जाएगी। इसके लिए मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, जो क्षेत्र में पहुंचकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगी। मौके पर ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त हैंड हेल्ड एक्सरे मशीन के माध्यम से जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। हमारा प्रयास है कि टीबी के हर संभावित मरीज की जल्द पहचान हो और उन्हें समय पर उपचार मिल सके। समय पर जांच और पूरा इलाज ही टीबी को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है।”
गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं!
अभियान के तहत विकासखण्ड कसडोल के पी.एम. जनमन ग्राम बल्दा कछार में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यहां लोगों की एक्सरे जांच और सीवाई-टीबी टेस्ट किए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के शिविरों के माध्यम से उन लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जो सामान्यतः अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इससे टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान संभव हो सकेगी।
आंकड़े बता रहे स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में पिछले वर्ष 31 हजार 663 संदिग्ध मरीजों की टीबी जांच की गई थी। इनमें से 1217 मरीजों का उपचार किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश कुमार अवस्थी का मानना है कि शुरुआती अवस्था में जांच और उपचार से न केवल मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है, बल्कि संक्रमण के फैलाव को भी रोका जा सकता है।
जागरूकता से हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं’?
इस वर्ष विश्व क्षय दिवस की थीम ‘हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं – देशों के नेतृत्व में, जनता की शक्ति से’ रखी गई है। इस थीम के अनुरूप जिले में सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। जागरूकता, समय पर जांच और नियमित उपचार से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। साथ ही, इलाज के दौरान डॉक्टर की सलाह का पालन करें और दवा का पूरा कोर्स करें। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कराने की सलाह दी गई है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
सामूहिक प्रयास से बनेगा टीबी मुक्त जिला….
जिले में शुरू किया गया यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य विभाग और आम नागरिकों की भागीदारी से यह पहल और मजबूत हो रही है। ‘टीबी हारेगा, देश जीतेगा’ का नारा अब केवल एक संदेश नहीं, बल्कि लोगों के संकल्प का प्रतीक बनता जा रहा है। अगर इसी तरह जागरूकता और प्रयास जारी रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब बलौदाबाजार जिला टीबी मुक्त बनने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण पेश करेगा।
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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