बलौदाबाजार में जनगणना ड्यूटी पर बड़ी कार्रवाई: लापरवाही और शराबखोरी पर तीन प्रगणक निलंबित। कलेक्टर का सख्त संदेश – राष्ट्रीय कार्य में कोताही बर्दाश्त नहीं…दो शिक्षकों ने नहीं दिया स्पष्टीकरण, एक प्रगणक मेडिकल जांच में मिला शराब के नशे में
बलौदा बाजार। जनगणना 2027 को लेकर जहां पूरे देश में प्रशासनिक मशीनरी युद्धस्तर पर काम कर रही है, वहीं बलौदाबाजार जिले में जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर जनगणना कार्य में गंभीर लापरवाही बरतने वाले तीन प्रगणकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें दो शिक्षकों पर कार्य में उदासीनता और जवाब नहीं देने का आरोप है, जबकि एक शिक्षक ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई ने पूरे शिक्षा विभाग और जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
राष्ट्रीय कार्य में लापरवाही पड़ी भारी
जिला प्रशासन के अनुसार, भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” के तहत जिले में प्रगणकों की ड्यूटी लगाई गई थी। यह कार्य समयबद्ध और राष्ट्रीय महत्व का माना जाता है। लेकिन कुछ कर्मचारियों द्वारा इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सीधे निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई कर दी।
दो प्रगणकों पर गिरी पहली गाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड सिमगा अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला तुलसी के सहायक शिक्षक अशोक वर्मा तथा विकासखंड कसडोल अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला आमगांव के सहायक शिक्षक राधेश्याम दीवान को जनगणना कार्य में प्रगणक की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में दोनों पर जनगणना कार्य में लापरवाही बरतने की शिकायत सही पाई गई। इसके बाद जिला कार्यालय की ओर से दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दोनों कर्मचारियों ने तय समय में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। यही चूक उनके खिलाफ भारी पड़ गई और जिला प्रशासन ने इसे शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर उपेक्षा और कदाचार मानते हुए दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन के दौरान कहां रहेगा मुख्यालय?
निलंबन अवधि में अशोक वर्मा का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदाबाजार निर्धारित किया गया है। वहीं राधेश्याम दीवान का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भाटापारा रहेगा। दोनों कर्मचारियों को निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
शराब पीकर जनगणना ड्यूटी पर पहुंचा शिक्षक
जिले में प्रशासन की दूसरी बड़ी कार्रवाई उस समय सामने आई, जब एक और प्रगणक के खिलाफ शराब पीकर ड्यूटी करने की शिकायत मिली। तहसील सिमगा ग्रामीण क्षेत्र में प्रगणक के रूप में नियुक्त शासकीय प्राथमिक शाला औरेंठी के सहायक शिक्षक संजय कुमार नायक पर कार्य के दौरान मदिरापान कर ड्यूटी करने का आरोप लगा। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और मेडिकल जांच कराई गई।
मेडिकल रिपोर्ट में हुआ खुलासा
संजय कुमार नायक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिमगा भेजा गया, जहां मेडिकल परीक्षण में शराब सेवन की पुष्टि हो गई। मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से उन्हें भी निलंबित कर दिया। प्रशासन ने माना कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में शराब पीकर ड्यूटी करना न केवल गंभीर लापरवाही है, बल्कि यह शासकीय सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन भी है।
प्रशासन का साफ संदेश: कोई नहीं बचेगा
जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनुशासनहीनता या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, कलेक्टर स्तर पर लगातार जनगणना कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है और हर प्रगणक की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का मानना है कि जनगणना सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की भविष्य की योजनाओं की नींव है। ऐसे में इसमें लापरवाही सीधे राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकती है।
किन नियमों के तहत हुई कार्रवाई?
तीनों कर्मचारियों पर कार्रवाई सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 और जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 5 और 11 के तहत की गई है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत निलंबन आदेश जारी किया गया। प्रशासन ने इन मामलों को “गंभीर कदाचार” की श्रेणी में माना है।
कर्मचारियों में बढ़ी सतर्कता
लगातार हुई इन कार्रवाइयों के बाद जिले में जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। बताते हैं कि अब अधिकांश प्रगणक समय पर फील्ड में पहुंच रहे हैं और रिकॉर्ड अपडेट रखने में विशेष सावधानी बरत रहे हैं।
क्यों अहम है जनगणना?
जनगणना 2027 देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय प्रक्रिया मानी जाती है। इसके जरिए सरकार को यह जानकारी मिलती है कि—
* कितने लोग किस क्षेत्र में रह रहे हैं
* आवास और बुनियादी सुविधाओं की क्या स्थिति है
* किन क्षेत्रों में विकास की ज्यादा जरूरत है
* शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आवास योजनाओं की वास्तविक आवश्यकता क्या है
यही आंकड़े भविष्य की सरकारी योजनाओं और बजट निर्धारण का आधार बनते हैं।
लापरवाही से बिगड़ सकता है पूरा डेटा
जानकारों का मानना है कि अगर जनगणना कार्य में लापरवाही होती है तो उसका असर वर्षों तक सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। गलत या अधूरी जानकारी के कारण—
* संसाधनों का गलत आवंटन हो सकता है
* जरूरतमंद क्षेत्रों तक योजनाएं नहीं पहुंच पातीं
* विकास की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पाती
इसी वजह से प्रशासन इस बार बेहद सख्त नजर आ रहा है।
जनता से भी सहयोग की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्रगणकों को सही और पूरी जानकारी दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई कर्मचारी ड्यूटी में लापरवाही करता है या अनुचित व्यवहार करता है, तो उसकी शिकायत तुरंत प्रशासन तक पहुंचाई जाए।
जिले में पहली बार इतनी सख्ती
बलौदाबाजार जिले में जनगणना कार्य को लेकर इस स्तर की सख्त कार्रवाई पहली बार देखने को मिल रही है। तीन प्रगणकों का एक ही दिन में निलंबन यह दिखाता है कि प्रशासन अब सिर्फ निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सीधे अनुशासनात्मक कदम उठाने के मूड में है।
संदेश साफ है
बलौदाबाजार जिला प्रशासन की यह कार्रवाई केवल तीन कर्मचारियों पर की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक सख्त संदेश है। संदेश बिल्कुल साफ है —
राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में लापरवाही, उदासीनता और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि प्रशासन की इस सख्ती का असर आने वाले दिनों में जनगणना कार्य की गुणवत्ता और गति पर कितना पड़ता है।























