भाटापारा में इको टूरिज्म पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण, 38 उद्यमियों ने सीखे रोजगार के नए मॉडल

भाटापारा में इको टूरिज्म पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण, 38 उद्यमियों ने सीखे रोजगार के नए मॉडल (Chhattisgarh Talk)
भाटापारा में इको टूरिज्म पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण, 38 उद्यमियों ने सीखे रोजगार के नए मॉडल (Chhattisgarh Talk)

भाटापारा; रैंप योजना के तहत सेक्टर स्पेसिफिक कार्यक्रम का आयोजन, युवा उद्यमियों और महिला समूहों की उत्साहपूर्ण भागीदारी…सतत पर्यटन, एडवेंचर गतिविधियों और उद्योग नीति 2024-30 पर गहन मार्गदर्शन

बलौदा बाजार। पर्यटन को स्थानीय विकास और रोजगार से जोड़ने की दिशा में जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी रैंप योजना के अंतर्गत सेक्टर स्पेसिफिक कार्यक्रम के तहत इको टूरिज्म विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भाटापारा में किया गया। यह प्रशिक्षण 24 से 26 फरवरी तक गायत्री शक्तिपीठ परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के बैनर तले किया गया, जबकि प्रशिक्षण का संचालन National Institute for Micro, Small and Medium Enterprises हैदराबाद द्वारा किया गया। तीन दिनों तक चले इस सत्र में जिले के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े 38 युवा उद्यमियों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

इको टूरिज्म को रोजगार से जोड़ने की पहल

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इको टूरिज्म को स्थानीय स्तर पर एक व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ यदि पर्यटन गतिविधियों को जोड़ा जाए तो यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार बन सकता है। प्रतिभागियों को इको टूरिज्म की मूल अवधारणा, उसके वैश्विक रुझान, पर्यावरण संरक्षण की जरूरत और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि किस तरह छोटे स्तर पर होम-स्टे, नेचर ट्रेल, ग्रामीण भ्रमण, जैव विविधता भ्रमण और पारंपरिक खानपान को जोड़कर आय के स्थायी स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।

उद्योग नीति 2024-30 की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान राज्य सरकार की उद्योग नीति 2024-30 के प्रावधानों पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों को बताया गया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश करने पर किस प्रकार की सब्सिडी, प्रोत्साहन और सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि यदि स्थानीय उद्यमी समूह बनाकर काम करें तो उन्हें वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के अतिरिक्त लाभ मिल सकते हैं। महिला स्व-सहायता समूहों को विशेष रूप से प्रेरित किया गया कि वे स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों को पर्यटन से जोड़कर आय बढ़ा सकती हैं।

नैतिकता और सेवा भाव पर जोर

कार्यक्रम के विशेष अतिथि बुद्धेश्वर वर्मा, ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ भाटापारा, ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यटन केवल व्यवसाय नहीं बल्कि सेवा का माध्यम भी है। उन्होंने जोर दिया कि इस क्षेत्र में सफलता के लिए अनुशासन, नैतिक मूल्यों और आगंतुकों के प्रति सकारात्मक व्यवहार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय उद्यमी पर्यावरण और संस्कृति का सम्मान करते हुए कार्य करेंगे, तो भाटापारा और आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है।

एडवेंचर टूरिज्म पर व्यवहारिक वर्कशॉप

प्रशिक्षण के दूसरे दिन गौरव यादव, संचालक नाइट कैंपर्स कोरबा, ने ट्रैकिंग और कैंपिंग विषय पर व्यवहारिक कार्यशाला ली। इस सत्र में प्रतिभागियों को एडवेंचर टूरिज्म के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि सुरक्षित ट्रैकिंग रूट कैसे तैयार किए जाते हैं, कैंपिंग साइट का चयन किन आधारों पर किया जाना चाहिए, और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किन मानकों का पालन जरूरी है। प्रतिभागियों को बेसिक उपकरणों, प्राथमिक उपचार और टीम प्रबंधन की भी जानकारी दी गई। इस सत्र ने युवाओं में खास उत्साह पैदा किया। कई प्रतिभागियों ने भविष्य में एडवेंचर गतिविधियों को अपने व्यवसाय का हिस्सा बनाने की इच्छा जताई।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिला मंच

प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रहकर स्थानीय उदाहरणों और संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्रतिभागियों से उनके क्षेत्रों की प्राकृतिक विशेषताओं और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी ली गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि स्थानीय स्तर पर सही मार्केटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाए तो छोटे कस्बों और गांवों में भी पर्यटकों की आमद बढ़ाई जा सकती है। सोशल मीडिया प्रमोशन, ऑनलाइन बुकिंग और पैकेज डिजाइन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

38 उद्यमियों को मिला प्रमाण-पत्र

तीसरे दिन समापन सत्र का आयोजन गिरधारी लाल वर्मा, व्यवस्थापक गायत्री शक्तिपीठ भाटापारा, की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कुल 38 उद्यमियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लेकर अपने कौशल को सुदृढ़ किया। प्रतिभागियों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें पर्यटन क्षेत्र में नए अवसरों की स्पष्ट दिशा मिली है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रशिक्षण में मिली जानकारी को जमीन पर उतारा जाए तो जिले में इको टूरिज्म की मजबूत नींव रखी जा सकती है। इससे स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा और पलायन की समस्या में कमी आ सकती है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए यह क्षेत्र विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। वे स्थानीय व्यंजन, जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से आय अर्जित कर सकती हैं।

पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास

कार्यक्रम के दौरान बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग करने के बजाय जिम्मेदार पर्यटन मॉडल अपनाने की सलाह दी गई। इको टूरिज्म का उद्देश्य केवल पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए विकास करना है। यदि समुदाय आधारित मॉडल अपनाया जाए तो इसका लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचता है।

नई दिशा की ओर कदम

रैंप योजना के अंतर्गत आयोजित यह सेक्टर स्पेसिफिक प्रशिक्षण जिले के लिए एक सकारात्मक शुरुआत मानी जा रही है। तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले तो छोटे शहर भी पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। अब जरूरत है कि प्रतिभागी सीखी गई बातों को व्यवहार में उतारें और प्रशासन भी आगे की प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करे। यदि योजनाबद्ध तरीके से काम हुआ, तो आने वाले वर्षों में भाटापारा और आसपास के क्षेत्र इको टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल कौशल विकास का माध्यम बना, बल्कि स्थानीय उद्यमिता को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ। पर्यटन को रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की यह पहल भविष्य में जिले की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।

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