बलौदाबाजार में बाहरी कामगारों के पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल, दुकान से कार की चाबी चोरी और फिर वाहन गायब होने का आरोप

बलौदाबाजार में बाहरी कामगारों के पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल, दुकान से कार की चाबी चोरी और फिर वाहन गायब होने का आरोप
बलौदाबाजार में बाहरी कामगारों के पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल, दुकान से कार की चाबी चोरी और फिर वाहन गायब होने का आरोप
बलौदाबाजार में बाहरी कामगारों के पुलिस वेरिफिकेशन पर सवाल, दुकान से कार की चाबी चोरी और फिर वाहन गायब होने का आरोप
पंजाब से कुछ दिन पहले काम करने आए युवक पर कार चोरी का आरोप, सिटी कोतवाली में FIR दर्ज; दो दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली
बलौदाबाजार: बलौदाबाजार शहर और आसपास के इलाकों में सीमेंट संयंत्रों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, शासकीय कार्यों में लगे ठेकेदारों और निजी संस्थानों में बड़ी संख्या में बाहरी श्रमिक और कर्मचारी काम कर रहे हैं। लेकिन इन कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जा रहा है या नहीं, इसको लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच शहर के लवन रोड इलाके से कार चोरी का एक मामला सामने आया है, जिसमें पंजाब से कुछ दिन पहले काम करने आए एक युवक पर दुकान से कार की चाबी चोरी करने और बाद में कार लेकर फरार होने का आरोप लगाया गया है। मामले में पीड़ित खेमराज वर्मा ने सिटी कोतवाली बलौदाबाजार में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत के मुताबिक घटना 22 अगस्त की है और घटना के दो दिन बाद भी संदिग्ध पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं।
दुकान से उठाई कार की चाबी, CCTV में दिखा संदिग्ध
खेमराज वर्मा राधा विहार कॉलोनी बलौदाबाजार निवासी हैं और गायत्री मंदिर के सामने नितिन बैस के मकान में “श्रुति वॉलपेपर” नाम से दुकान संचालित करते हैं। शिकायत के अनुसार 22 अगस्त को उनके बहनोई तुलसी वर्मा के नाम से पंजीकृत वरना कार क्रमांक CG 09 JL 2169 दुकान के बगल में खड़ी थी। दोपहर करीब 4 बजे खेमराज अपनी कार से लंच के लिए जाने वाले थे। उन्होंने कार की चाबी तलाश की, लेकिन चाबी दराज या टेबल में नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने दुकान में लगे CCTV कैमरों की फुटेज देखी। शिकायत के अनुसार फुटेज में एक युवक दुकान के अंदर आता दिखाई दिया, जिस पर उन्हें चाबी ले जाने का संदेह हुआ।

पंजाब से काम करने आया था युवक

शिकायतकर्ता के मुताबिक CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे युवक की पहचान पंजाब एग्रीकल्चर इंडस्ट्री नामक प्रतिष्ठान में काम करने वाले सुखप्रीत सिंह के रूप में हुई। यह प्रतिष्ठान लवन रोड पर संचालित बताया गया है। खेमराज ने प्रतिष्ठान के संचालक मनप्रीत सिंह से संपर्क कर CCTV फुटेज दिखाई और संदिग्ध युवक के बारे में जानकारी ली। शिकायत के अनुसार मनप्रीत सिंह ने युवक से कार की चाबी वापस दिलाने का आश्वासन दिया। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी चाबी वापस नहीं मिली।

लड़का मेरी कस्टडी में है, जिम्मेदारी मेरी है

शिकायत में खेमराज वर्मा ने आरोप लगाया है कि मनप्रीत सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया कि संबंधित युवक उनके नियंत्रण में है और यदि कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी। इसके बाद कार की सुरक्षा के लिए मनप्रीत सिंह अपने दो कर्मचारियों गोविंद सिंह और रमन सिंह के साथ मौके पर पहुंचे। शिकायत के मुताबिक उन्होंने कार में संकल और ताला लगा दिया और पीड़ित को भरोसा दिलाया कि अब वाहन सुरक्षित है। इसके बाद खेमराज अपनी दुकान बंद कर रात करीब 10:30 बजे घर चले गए।

सुबह दुकान पहुंचे तो कार ही गायब थी

अगली सुबह करीब 7 बजे खेमराज का भांजा यश वर्मा दुकान पहुंचा। वहां पहुंचकर उसने देखा कि जिस जगह वरना कार खड़ी थी, वहां कार मौजूद नहीं थी। कार की सुरक्षा के लिए लगाया गया संकल और ताला भी टूटा हुआ मिला। इसके बाद परिवार ने आसपास तलाश की, लेकिन कार का कोई पता नहीं चला। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सुखप्रीत सिंह और उसके साथियों ने संकल और ताला तोड़कर कार चोरी कर ली और वाहन लेकर फरार हो गए।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

घटना के बाद खेमराज वर्मा ने सिटी कोतवाली बलौदाबाजार में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस CCTV फुटेज, संदिग्धों की पहचान, उनके मोबाइल और वाहन की आवाजाही सहित अन्य पहलुओं की जांच कर सकती है। चोरी हुई कार की तलाश के लिए आसपास के क्षेत्रों में भी जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि घटना के दो दिन बाद तक पुलिस को वाहन और संदिग्धों के संबंध में सफलता नहीं मिली है।

बाहरी कामगारों के वेरिफिकेशन पर बड़ा सवाल

इस घटना ने बलौदाबाजार में बाहर से आकर काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों के पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से श्रमिक और कर्मचारी काम करने आते हैं। इसके अलावा निर्माण कार्यों, सीमेंट संयंत्रों, ठेकेदारों और निजी प्रतिष्ठानों में भी बाहरी लोगों को काम पर रखा जाता है।
सवाल यह है कि इन लोगों की पहचान, स्थायी पता और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच कितनी गंभीरता से की जा रही है? अगर किसी व्यक्ति को बिना पर्याप्त सत्यापन के संवेदनशील स्थानों या प्रतिष्ठानों में काम दिया जाता है और उसके बाद कोई अपराध होता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था क्या है? यह सवाल अब इस कार चोरी के मामले के बाद फिर उठ खड़ा हुआ है।

पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती

बलौदाबाजार तेजी से औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बन रहा है। ऐसे में दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले श्रमिकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस वेरिफिकेशन सिर्फ कागजी प्रक्रिया न रहकर सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। नियोक्ताओं और प्रतिष्ठान संचालकों को भी अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान और पते का सत्यापन सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल कार चोरी के इस मामले में पुलिस जांच जारी है। CCTV फुटेज और शिकायत में सामने आए नामों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है। अब देखना होगा कि चोरी गई वरना कार कब बरामद होती है और जांच में संदिग्धों की वास्तविक भूमिका क्या सामने आती है। फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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