डीएमएफ की नई कार्ययोजना से बदलेगी जिले की तस्वीर? शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर बड़ा दांव

डीएमएफ की नई कार्ययोजना से बदलेगी जिले की तस्वीर? शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर बड़ा दांव
डीएमएफ की नई कार्ययोजना से बदलेगी जिले की तस्वीर? शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर बड़ा दांव
डीएमएफ की नई कार्ययोजना से बदलेगी जिले की तस्वीर? शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर बड़ा दांव,453 शिक्षकों और 99 स्वास्थ्यकर्मियों की होगी व्यवस्था, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास को मिलेगी नई गति
बलौदा बाजार। बलौदाबाजार जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) ने बड़ा कदम उठाया है। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित शासी परिषद की बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कौशल विकास और रोजगार सृजन को केंद्र में रखकर नई कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि खनिज संपदा से प्राप्त राशि का लाभ सीधे उन लोगों तक पहुंचे जो खनन गतिविधियों से प्रभावित हैं। बैठक में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा सहित जिले के जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्ययोजना के अनुमोदन के साथ आगामी पांच वर्षों की विकास रणनीति पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
जिले के कई स्कूल वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर है। इसी को देखते हुए डीएमएफ की नई कार्ययोजना में 453 शिक्षकों की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो जिले के हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। लंबे समय से रिक्त पदों के कारण प्रभावित पढ़ाई व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। इससे बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों से लेकर स्कूलों में नियमित शिक्षण गतिविधियों तक सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई ताकत
बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों और लैब टेक्नीशियनों की कमी को देखते हुए कुल 99 पदों की व्यवस्था कार्ययोजना में शामिल की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से मानव संसाधन की कमी का सामना कर रहे हैं। नए पदों की व्यवस्था से मरीजों को बेहतर उपचार सुविधा मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अधिक होती हैं। ऐसे में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार स्थानीय लोगों के लिए राहत लेकर आ सकता है।
पेयजल और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर
बैठक में यह स्वीकार किया गया कि विकास की आधारशिला पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं हैं। इसलिए डीएमएफ राशि का उपयोग सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जल संबंधी अधोसंरचना मजबूत करने पर भी किया जाएगा। गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई परियोजनाएं तैयार करने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि जल संकट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाएगा।
युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास
कार्ययोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना है। बैठक में निर्णय लिया गया कि केवल अधोसंरचना निर्माण तक सीमित रहने के बजाय युवाओं को रोजगार योग्य बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि कौशल विकास कार्यक्रम सही दिशा में संचालित हुए तो खनन प्रभावित क्षेत्रों से रोजगार के लिए होने वाले पलायन में कमी आ सकती है।
कुपोषण के खिलाफ भी बनेगी रणनीति
महिला एवं बाल विकास से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। कुपोषण को जिले की बड़ी चुनौती मानते हुए पोषण आहार योजनाओं को प्राथमिकता में शामिल किया गया है। कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार और पोषण उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नई योजनाएं तैयार की जाएंगी।
महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा लाभ
डीएमएफ की कार्ययोजना में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों को रोजगार से जोड़ने, छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देने और आय बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। जिले में पहले से सक्रिय महिला समूहों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए भी प्रावधान
नई कार्ययोजना में केवल युवाओं और महिलाओं पर ही नहीं, बल्कि वृद्ध एवं दिव्यांगजनों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इन वर्गों के जीवन स्तर में सुधार के लिए आजीविका सृजन के उपाय, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और सहायता कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक पर फोकस
बैठक में कृषि क्षेत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। उन्नत कृषि पद्धतियों, आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सड़क, पुल-पुलिया और रोशनी की व्यवस्था
भौतिक अधोसंरचना विकास के अंतर्गत सड़कों, पुल-पुलियों की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हाई-मास्ट लाइट लगाने, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से प्रकाश व्यवस्था विकसित करने और प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से जुड़े कार्यों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
डीएमएफ राशि से बदलेगी तस्वीर?
बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जिला बलौदाबाजार-भाटापारा को डीएमएफ के तहत बड़ी राशि प्राप्त होती है और यदि उसका योजनाबद्ध उपयोग किया जाए तो जिले की तस्वीर बदली जा सकती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किए जाने वाले निवेश का असर आने वाले वर्षों में दिखाई देगा। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से धरातल पर उतारने की होगी। यदि कार्ययोजना के अनुसार सभी योजनाएं लागू होती हैं, तो खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ जिले के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।

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