एंटी करप्शन ब्यूरो का बड़ा ट्रैप: दिव्यांग शिक्षक से घूस मांगने वाला प्राचार्य रंगे हाथों गिरफ्तार

वेतन जारी करने के नाम पर हर महीने वसूली, रकम बढ़ाने पर 6 माह का वेतन रोका…भाटापारा रेलवे स्टेशन के पास 15 हजार लेते पकड़ा गया आरोपी, शिक्षा विभाग में हड़कंप

बलौदा बाजार। बलौदाबाजार जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने एक प्राचार्य को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। मामला वेतन आहरण से जुड़ा है, जहां दुर्घटना में दिव्यांग हुए एक व्याख्याता से हर महीने रिश्वत लेकर वेतन निकालने का आरोप है। रकम बढ़ाने की मांग पूरी नहीं होने पर छह महीने का वेतन रोक दिया गया था। बुधवार को एसीबी की टीम ने ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी को भाटापारा रेलवे स्टेशन के पास धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

शिकायत से ट्रैप तक: कैसे खुला मामला

प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब व्याख्याता के पुत्र खेमेश्वर डांडे ने एसीबी रायपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनके पिता विजय कुमार डांडे, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोपका, भाटापारा में व्याख्याता पद पर पदस्थ हैं। वर्ष 2017-18 में एक सड़क दुर्घटना के कारण वे दिव्यांग हो गए थे।
दिव्यांग होने के बावजूद वे नियमित रूप से विद्यालय जाते रहे, लेकिन आरोप है कि विद्यालय के प्राचार्य आर.एन. बया वेतन आहरण में जानबूझकर बाधा डालते थे। वेतन निकालने के लिए प्रतिमाह 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जाती थी। शिकायत के अनुसार, मजबूरी में कई महीनों तक रिश्वत दी गई। कुछ भुगतान बैंक खाते के माध्यम से भी किए गए। लेकिन करीब छह महीने पहले प्राचार्य ने रिश्वत की रकम बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी। जब व्याख्याता ने अतिरिक्त राशि देने से इनकार किया, तो उनका वेतन ही रोक दिया गया।

छह महीने तक रुका वेतन

वेतन रोकने की कार्रवाई से परिवार आर्थिक संकट में आ गया। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार, परेशान होकर परिजन ने एसीबी रायपुर का दरवाजा खटखटाया। एसीबी ने प्रारंभिक जांच की। शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। इसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।

रेलवे स्टेशन के पास बिछाया जाल

25 फरवरी को एसीबी की टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार प्रार्थी ने आरोपी से संपर्क किया। रिश्वत की राशि देने के दौरान एसीबी की टीम पहले से ही निगरानी में थी। जैसे ही 15 हजार रुपये आरोपी ने स्वीकार किए, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। यह कार्रवाई भाटापारा रेलवे स्टेशन के पास की गई। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शिक्षा विभाग में हड़कंप

कार्रवाई की खबर फैलते ही शिक्षा विभाग में खलबली मच गई। एक ओर जहां दिव्यांग शिक्षक से वसूली के आरोप ने लोगों को झकझोर दिया, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठने लगा कि शिकायत के बाद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते विभागीय स्तर पर कार्रवाई हो जाती, तो मामला एसीबी तक नहीं पहुंचता।

संवेदनशील मामला: दिव्यांग शिक्षक से वसूली

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप एक दिव्यांग शिक्षक से वसूली का है। वर्ष 2017-18 की दुर्घटना के बाद भी शिक्षक नियमित रूप से ड्यूटी पर जाते रहे। बावजूद इसके, वेतन जारी करने के लिए हर महीने रिश्वत मांगना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति और सहयोग की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यहां उल्टा दबाव बनाकर आर्थिक शोषण किया गया।

लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल के दिनों में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में टीम लगातार शिकायतों पर निगरानी रख रही है। कार्रवाई से यह संदेश गया है कि चाहे पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कानूनी कार्रवाई शुरू

आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। आगे की जांच जारी है। एसीबी यह भी जांच कर रही है कि क्या पहले भी इसी तरह की वसूली के मामले सामने आए हैं। यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो आरोपों की धाराएं और बढ़ सकती हैं।

सवाल जो खड़े हुए

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

* क्या विभागीय स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है?
* क्या अन्य कर्मचारियों से भी इसी तरह की वसूली होती रही?
* बैंक खाते में हुई कथित लेनदेन की जांच कितनी व्यापक होगी?

एसीबी की जांच इन सभी बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी।

जनता में चर्चा

घटना के बाद शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। साथ ही, यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के लिए भी राहत का संदेश है जो दबाव या भय के कारण खुलकर शिकायत नहीं कर पाते।

एसीबी की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। ट्रैप के जरिए रंगे हाथों गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है। दिव्यांग शिक्षक के वेतन के नाम पर वसूली का यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि नैतिक दृष्टि से भी गंभीर है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और आरोपी के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, एंटी करप्शन ब्यूरो की इस कार्रवाई ने जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश जरूर दिया है।

 

रिपोर्ट: चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com

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