बलौदाबाजार में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिला चिकित्सालय, धान उपार्जन केंद्र और नालंदा परिसर का निरीक्षण कर इलाज, दवा और निर्माण कार्यों पर सख्त निर्देश दिए।
बलौदाबाजार: जिले में पदभार संभालते ही नए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने साफ संकेत दे दिया है कि व्यवस्था में ढिलाई अब नहीं चलेगी। प्रशासनिक सक्रियता का पहला बड़ा कदम उठाते हुए उन्होंने जिला चिकित्सालय पहुंचकर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। अस्पताल परिसर से लेकर विभिन्न वार्डों तक जाकर उन्होंने साफ-सफाई, इलाज की गुणवत्ता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति देखी और सुधार के स्पष्ट निर्देश दिए। निरीक्षण की शुरुआत पंजीयन काउंटर से हुई। यहां पंजीयन प्रक्रिया का अवलोकन करते हुए उन्होंने रोजाना ओपीडी और आईपीडी की संख्या की जानकारी ली। बताया गया कि प्रतिदिन औसतन 500 मरीज ओपीडी के लिए पंजीयन कराते हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए उन्होंने व्यवस्था को और व्यवस्थित करने तथा भीड़ प्रबंधन पर ध्यान देने को कहा।
जन औषधि केंद्र पर खास नजर
निरीक्षण के दौरान जन औषधि केंद्र में उपलब्ध दवाओं की सूची देखी गई। कालातीत दवाओं की स्थिति और स्टॉक की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि यदि स्टॉक में दवा उपलब्ध है तो किसी भी मरीज को बाहर से दवा खरीदने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को राहत देना है, अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना नहीं। दवा वितरण में पारदर्शिता और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।
ट्रामा सेंटर से लेकर ब्लड बैंक तक गहन जांच
निरीक्षण के दौरान ट्रामा सेंटर, सीटी स्कैन यूनिट, प्रसूति वार्ड, सर्जिकल वार्ड, डायलिसिस यूनिट, ब्लड बैंक, एसएनसीयू और इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब का जायजा लिया गया। विशेष रूप से आईपीएचएल को एनक्यूएएस सर्टिफिकेट प्राप्त होने पर संतोष जताया गया। यह उपलब्धि जिला अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली है। इसे बनाए रखने और गुणवत्ता मानकों से किसी भी तरह का समझौता न करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने वार्डों में भर्ती मरीजों से बातचीत कर इलाज की गुणवत्ता और सुविधाओं के बारे में सीधा फीडबैक भी लिया। कई मरीजों ने साफ-सफाई और स्टाफ के व्यवहार पर संतोष जताया, वहीं कुछ व्यवस्थागत सुधार की जरूरत भी सामने आई, जिस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
रेफरल सिस्टम पर सख्ती
जिले के पीएचसी और सीएचसी से जिला अस्पताल में रेफर किए जाने वाले मरीजों की संख्या और जिला अस्पताल से अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले मामलों की जानकारी भी ली गई। कलेक्टर ने निर्देश दिया कि रेफरल केवल अत्यावश्यक स्थिति में ही किया जाए। छोटे मामलों में मरीजों को इधर-उधर भटकने से बचाया जाए। उनका कहना था कि यदि जिला अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है तो मरीज को अन्यत्र भेजना उचित नहीं। इस निर्देश को स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।
धान उपार्जन केंद्र में भी पहुंचे
अस्पताल निरीक्षण के बाद प्रशासनिक सक्रियता यहीं नहीं रुकी। कलेक्टर ने आमेरा स्थित धान उपार्जन केंद्र का भी निरीक्षण किया। केंद्र में कुल खरीदी, अब तक हुए धान उठाव और शेष स्टॉक की जानकारी ली गई। गोदामों में रखे धान की स्थिति देखी गई और परिवहन व्यवस्था की समीक्षा की गई। धान उठाव में तेजी लाने के लिए ट्रकों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए। स्पष्ट कहा गया कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और समय पर उठाव सुनिश्चित किया जाए।
नालंदा परिसर निर्माण की रफ्तार पर सवाल
इसके बाद बलौदाबाजार में निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण किया गया। परिसर के निर्माण कार्य की प्रगति देखी गई और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई। निर्माण कार्य में अपेक्षित गति नहीं मिलने पर तेजी लाने के निर्देश दिए गए। गुणवत्तापूर्ण निर्माण और तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया गया। नालंदा परिसर को जिले में शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में इसके निर्माण में देरी को लेकर सख्ती दिखाई गई।
प्रशासनिक संदेश साफ
इस निरीक्षण ने स्पष्ट कर दिया कि नए कलेक्टर का फोकस केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। वे जमीनी स्तर पर जाकर स्थिति समझना और मौके पर निर्णय लेना पसंद करते हैं। अस्पताल में दवा उपलब्धता से लेकर धान उठाव और निर्माण कार्य की गति तक, हर क्षेत्र में जवाबदेही तय करने का संकेत मिला है। जिला चिकित्सालय में साफ-सफाई, समय पर इलाज, दवा उपलब्धता और रेफरल सिस्टम पर सख्ती आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करेगी। वहीं धान उपार्जन केंद्र में तेजी से उठाव के निर्देश किसानों के हित में माने जा रहे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्या अग्रवाल, अपर कलेक्टर ए.आर. टंडन, एसडीएम प्रकाश कोरी, सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी को अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय निगरानी रखने और निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
जनता की नजर अब अमल पर
निरीक्षण और निर्देशों के बाद अब नजर इस बात पर है कि जमीन पर कितना बदलाव दिखता है। अस्पताल की व्यवस्था में सुधार, दवा की उपलब्धता, किसानों के धान का समय पर उठाव और नालंदा परिसर का समय पर निर्माण – ये सभी मुद्दे सीधे आम जनता से जुड़े हैं। नए प्रशासनिक नेतृत्व की यह शुरुआत सख्त और सक्रिय मानी जा रही है। यदि निर्देशों का पालन प्रभावी ढंग से हुआ, तो जिले में स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा से जुड़े ढांचे में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब प्रशासनिक मशीनरी की परीक्षा इस बात की है कि दिए गए निर्देश कितनी तेजी और ईमानदारी से अमल में लाए जाते हैं।
📍बलौदाबाजार से चंदु वर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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