भाटापारा के जरहागांव से मानवता की मिसाल, अंतिम विदाई को बनाया जीवनदान का माध्यम
मौत के बाद भी रोशनी बन गईं रोहिणी वर्मा: नेत्रदान से दो लोगों की दुनिया होगी रोशन, परिवार ने भी लिया महादान का संकल्प
कहा जाता है कि इंसान अपने कर्मों से अमर होता है। बलौदाबाजार जिले के भाटापारा विकासखंड के ग्राम जरहागांव में एक परिवार ने इस बात को सच साबित कर दिया। परिवार ने अपनी प्रिय सदस्य स्वर्गीय रोहिणी वर्मा की अंतिम विदाई को मानव सेवा का ऐसा स्वरूप दिया, जिससे दो नेत्रहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद जगी है। रोहिणी वर्मा के निधन के बाद उनके परिजनों ने दुख की घड़ी में भी साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनका नेत्रदान कराया। इस फैसले ने न सिर्फ दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाले की उम्मीद जगाई, बल्कि समाज के सामने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल भी पेश की।
अंतिम इच्छा का किया सम्मान
परिजनों ने बताया कि उन्होंने मानव सेवा की भावना को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। परिवार का मानना है कि यदि किसी के जाने के बाद उसके अंग किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में खुशियां ला सकें, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं हो सकता। नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की टीम की मौजूदगी में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार संपन्न कराई गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निभाई अहम भूमिका
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी, खंड चिकित्सा अधिकारी भाटापारा डॉ. राजेंद्र माहेश्वरी तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा माहेश्वरी के मार्गदर्शन में नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई।
नेत्र सहायक अधिकारी पद्मिनी सिंगरौल ने सुरक्षित तरीके से नेत्र निकाले, जबकि नेत्र सहायक अधिकारी शारिक हैदरी और किस्मत गुलेरी ने उन्हें पूरी सावधानी के साथ नेत्र बैंक तक पहुंचाया, ताकि समय पर प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
परिवार ने दिया समाज को बड़ा संदेश
इस पुण्य कार्य में दिवंगत रोहिणी वर्मा के परिजन मोतीराम वर्मा, हरिकिशन वर्मा, पूना राम वर्मा सहित पूरे परिवार ने सक्रिय सहयोग दिया। इतना ही नहीं, परिवार के अन्य सदस्यों ने भी भविष्य में अपने नेत्र दान करने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि यदि उनके इस निर्णय से किसी की जिंदगी में उजाला आ सकता है, तो इससे बड़ी श्रद्धांजलि और कोई नहीं हो सकती।
नेत्रदान महादान है
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान माना जाता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके नेत्र दो दृष्टिबाधित लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें तो हजारों लोगों की अंधेरी दुनिया फिर से रोशन हो सकती है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ नेत्रदान को लेकर चर्चा करें और मृत्यु के बाद इस महादान के लिए अपनी सहमति दें।
जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समाज में अभी भी नेत्रदान को लेकर कई भ्रांतियां मौजूद हैं। ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण लोगों की सोच बदलने और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जरहागांव का यह परिवार अब पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन गया है। दुख की घड़ी में भी मानवता को सर्वोपरि रखने का उनका निर्णय कई लोगों को जीवनदान देने की सोच के लिए प्रेरित कर सकता है।
दो घरों में लौटेगी रोशनी
रोहिणी वर्मा भले ही इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनके नेत्र अब दो ऐसे लोगों की आंखों में रोशनी बनकर नई उम्मीद जगाएंगे, जिन्होंने शायद वर्षों से दुनिया को देखने का सपना संजो रखा है। यह घटना सिर्फ एक नेत्रदान की नहीं, बल्कि उस संवेदना की कहानी है जो बताती है कि इंसान का जीवन उसके जाने के बाद भी किसी और के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे नेत्रदान के लिए आगे आएं और इस महादान के माध्यम से किसी जरूरतमंद के जीवन में प्रकाश लाने का संकल्प लें।























