भूरा माहु के अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर एवं पीले दिखाई दे सकते हैं।

भूरा माहु के अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर एवं पीले दिखाई दे सकते हैं
भूरा माहु के अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर एवं पीले दिखाई दे सकते हैं

भूरा माहु के अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर एवं पीले दिखाई दे सकते हैं

 

 

वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह :धान फसल में कीट व्याधि की नियमित निगरानी करें धान मे तना छेदक, गंगाई,भूरा माहु एवं पत्ती मोडक कीट प्रबंधन

बलौदाबाजार।  वर्तमान खरीफ सीजन मे खेतों मे पर्याप्त नमी एवं अनुकूल वातावरण के कारण धान की फसल मे कीट एवं रोगों के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गई है।इसी को ध्यान मे रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के वैज्ञानिको ने जिले के किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी तथा कीट एवं रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देते ही समय पर वैज्ञानिक एवं अनुशंसित प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी है।

धान मे तना छेदक, गंगाई,भूरा माहु एवं पत्ती मोडक कीट प्रबंधन

किसानों को विशेष रूप से धान के पत्तों तनो एवं बढ़वार का सूक्ष्मता से निरीक्षण करना चाहिए।खेत मे केवल एक स्थान पर खड़े होकर निरीक्षण करने के बजाय अलग -अलग स्थानों से जांच करें।

तना छेदक कीट के लक्षणों

धान में तना छेदक कीट की सुंडी पौधे की तने मे प्रवेश कर अंदर की भाग को नुकसान पहुँचाते हैं।इसके कारण फसल की अवस्था के अनुसार सेडेड हार्टर तथा बलिया निकलने के बाद व्हाइट ईयर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। किसानों को खेत का निरीक्षण करते समय सुखे केंद्रीय तनो एवं असामान्य रूप से सूख रहे पौधों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।

पत्ती मोड़क,पत्ती लपेटक की करें पहचान

थान में पत्ती मोड़क अथवा पत्ती लपेटक कीट प्रकोप होने पर इसकी सूडिया पत्तियों की लम्बाई मे मोड़कर अथवा लपेटकर उनके अंदर छिप जाती है। सुंडियां पत्ती के हरे भाग को खुरच कर खाती हैं जिससे प्रभावित पत्तियों पर सफ़ेद धारियों अथवा झिल्ली जैसे लंबे निशान दिखाई देते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रभावित हो सकती है जिससे पौधों की वृद्धि एवं विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।किसानों को नियमित रूप से खेत में लिपटी हुई व मुड़ी हुई धान के पत्तियों की जांच करनी चाहिए। तना छेदक व लपेटक के अधिक प्रकोप होने पर कर्टाप हाईड्रोक्लोराइड़ 50 डब्लू पी /1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरेंट्रानीलीप्रोल प्रति 150 मिलिलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी मे घोल बना कर छिड़काव करें।

गंगई के प्रकोप की करें नियमित निगरानी

धान में गंगाई के प्रकोप की भी नियमित निगरानी आवश्यक है। इस कीट के प्रकोप से धान के पौधों की नई बढ़वार प्रभावित होती है और संक्रमित पौधे में सामान्य पत्ती के स्थान पर लंबी, पतली नलीनुमा संरचना दिखाई दे सकती है जिससे समान्यत सिल्वर शूट अथवा
प्याज पत्ती के लक्षण के रूप मे पहचाना जाता है। प्रभावित पौधे सामान्य विक्रसित नहीं हो पाते तथा उनमें बालियों का विकास प्रभावित हो सकती है।गंगाई के लक्षण दिखाई देने पर पिफ्रोनील 5 प्रतिशत,ए सी 1000 मीलिलीटर,प्रति हेक्टेयर उपयोग करें।

भूरा माहू के प्रकोप पर विशेष ध्यान

भूरा माहु पौधों के निचले हिस्से मे रहकर रस चूसता है। किसानों को खेत का निरीक्षण करते समय पौधों के तने के निचले हिस्से एवं पानी की सतह के आसपास विशेष ध्यान देना चाहिए। भूरा माहु के अधिक प्रकोप में पौधे कमजोर एवं पीले दिखाई दे सकते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पौधों के समूह तेजी से पीले होकर सूखने लगते है। इस स्थिति को हॉपर बर्ग कहा जाता है। भूरा माहु के प्रकोप की स्थिति में किसानों को खेत में अनावश्यक अत्यधिक उर्वरक के प्रयोग से बचना चाहिए। खेत में नियमित निगरानी करते हुए कीट की स्थिति का आकलन करें। भूरा माहु के नियंत्रण के लिए ब्यूपरोफेजिन 25 प्रतिशत एस. सी. 800 मिलिलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा पाइमेट्रोजिन 50 डब्लू जी. प्रति हेक्टेयर उपयोग की सलाह दी गई है

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