गांव चलाना है तो काम दो…” पलारी के 102 सरपंच पहुंचे कलेक्ट्रेट, DMF फंड में भेदभाव का आरोप, सलोनी सरपंच की भावुक अपील ने खींचा ध्यान
पलारी ब्लॉक की 102 पंचायतों के सरपंचों ने खोला मोर्चा…डॉक्टरी छोड़ गांव बचाने राजनीति में आया, लेकिन सालों से विकास ठप…80 फीसदी पंचायतों को विकास कार्य नहीं मिलने का आरोप….सलोनी सरपंच बोले- 20 साल से पिछड़ा है मेरा गांव, 4500 लोग 9 हैंडपंप के भरोसे….कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, 6 महीने में कार्य आवंटन का मिला आश्वासन
बलौदाबाजार जिला मुख्यालय में उस समय पंचायतों की पीड़ा खुलकर सामने आ गई, जब जनपद पंचायत पलारी के सरपंच संघ ने विकास कार्यों में कथित भेदभाव और उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पलारी विकासखंड की 102 ग्राम पंचायतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सरपंच बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की बदहाल स्थिति से अवगत कराया। सरपंच संघ का आरोप है कि वर्षों से पलारी ब्लॉक की अधिकांश पंचायतों को जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से पर्याप्त कार्य नहीं दिए गए हैं। इसका सीधा असर गांवों के विकास पर पड़ा है। कई पंचायतों में सड़क, पानी, स्कूल, पंचायत भवन और अन्य मूलभूत सुविधाएं आज भी बदहाल स्थिति में हैं।
DMF फंड को लेकर उठे सवाल
सरपंच संघ के अध्यक्ष कुलदीप खन्ना के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि पलारी ब्लॉक की लगभग 80 प्रतिशत पंचायतों को विगत वर्षों में डीएमएफ मद से कोई बड़ा विकास कार्य नहीं मिला। सरपंचों का कहना है कि जिन पंचायतों में पहले कार्य स्वीकृत हुए थे, उनमें से कई कार्य पूर्ण भी हो चुके हैं लेकिन भुगतान अब तक लंबित है। इससे ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है और नए विकास कार्य शुरू करने में दिक्कतें आ रही हैं। ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई कि सभी पंचायतों को समान रूप से विकास कार्य दिए जाएं और लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाए।
“गांव चलाना मुश्किल हो गया है”
कलेक्ट्रेट पहुंचे कई सरपंचों ने कहा कि गांव के लोग उनसे लगातार विकास कार्यों की मांग करते हैं लेकिन उनके पास कोई संसाधन नहीं है। सरपंचों का कहना है कि जब पंचायतों को काम ही नहीं मिलेगा तो ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कैसे होगा। सड़कें टूट रही हैं, भवन जर्जर हो रहे हैं और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
सलोनी सरपंच बंशी बंजारे की भावुक अपील
पूरे प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान ग्राम पंचायत सलोनी के सरपंच बंशी बंजारे ने खींचा। बंशी बंजारे पेशे से डॉक्टर रहे हैं। उन्होंने गांव के विकास का सपना लेकर राजनीति में कदम रखा और सरपंच बने। लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान उनकी पीड़ा साफ झलक रही थी।
- उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन आज भी गांव की बुनियादी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि “हम गांव का विकास करना चाहते हैं, लेकिन जब योजनाएं और बजट ही नहीं मिलेगा तो जनता को क्या जवाब दें?
4 साल से अधूरी नल-जल योजना
बंशी बंजारे ने बताया कि गांव में नल-जल योजना का काम पिछले चार वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। उनके अनुसार आधे गांव में आज तक पाइप लाइन तक नहीं बिछाई गई है। कई बार शिकायत करने के बाद ठेकेदार या जिम्मेदार एजेंसियां एक-दो दिन काम करती हैं और फिर महीनों तक काम बंद हो जाता है। परिणाम यह है कि गांव के हजारों लोग आज भी स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं।
4500 लोग, सिर्फ 9 हैंडपंप
सलोनी गांव की सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट है। सरपंच के मुताबिक लगभग 4500 की आबादी वाले गांव में केवल 9 हैंडपंप हैं, जिनके भरोसे पूरा गांव चल रहा है। गर्मी के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। लोगों को कई घंटों तक लाइन में खड़े रहकर पानी भरना पड़ता है। कई मोहल्लों में सुबह से ही पानी के लिए कतार लग जाती है। सरपंचों का कहना है कि यदि नल-जल योजना समय पर पूरी हो जाती तो आज यह स्थिति नहीं होती।
स्कूल भवन बना खतरा
गांव की शिक्षा व्यवस्था भी गंभीर संकट से गुजर रही है। सरपंच बंशी बंजारे ने बताया कि प्राथमिक शाला सड़कपारा का भवन पिछले 3 से 4 वर्षों से जर्जर अवस्था में है। भवन की हालत इतनी खराब है कि वहां बच्चों को बैठाना जोखिम भरा हो गया है। कई बार मरम्मत और नए भवन की मांग की गई लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि बच्चों की पढ़ाई दूसरे स्कूल भवन में संचालित करनी पड़ रही है। सरपंचों का कहना है कि यदि समय रहते नया भवन नहीं बना तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
किचन शेड नहीं, बच्चों के भविष्य पर असर
मिडिल स्कूल में आज तक किचन शेड नहीं बन पाया है। मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में लगातार परेशानी आती है। बरसात और गर्मी दोनों मौसम में भोजन बनाने वाले कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्राथमिक शाला बाजार चौक में बना किचन भी बेहद जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। सरपंच का कहना है कि शिक्षा और बच्चों के पोषण से जुड़ी सुविधाओं की ऐसी हालत चिंताजनक है।
राशन दुकान भी किराए के भवन में
गांव में उचित मूल्य की दुकान तक का अपना भवन नहीं है। वर्तमान में राशन दुकान किराए के मकान में संचालित हो रही है। इससे वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है और ग्रामीणों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
पंचायत भवन भी जर्जर
ग्राम पंचायत भवन की हालत भी अच्छी नहीं है। सरपंच के अनुसार पंचायत भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। कई हिस्सों में मरम्मत की आवश्यकता है लेकिन इसके लिए भी अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है।
हाई स्कूल उन्नयन की मांग 10 साल से लंबित
गांव की शिक्षा से जुड़ी एक और बड़ी समस्या हाई स्कूल का उन्नयन है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 10 वर्षों से हाई स्कूल उन्नयन की मांग की जा रही है लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके कारण गांव के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों या कस्बों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई बच्चे आगे की पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।
जनप्रतिनिधियों पर भी लगाए आरोप
सरपंच संघ के अध्यक्ष कुलदीप खन्ना ने मीडिया से चर्चा में कहा कि पंचायतों को जिला प्रशासन से कुछ सहयोग जरूर मिला है लेकिन जनप्रतिनिधियों के स्तर पर अपेक्षित मदद नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कई बार मांग रखने के बावजूद पंचायतों को पर्याप्त कार्य नहीं मिले। हालांकि यह सरपंच संघ का आरोप है और इस पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
कलेक्टर ने दिया आश्वासन
सरपंच संघ की मांगों को सुनने के बाद जिला प्रशासन ने सकारात्मक रुख दिखाया है। अध्यक्ष कुलदीप खन्ना के अनुसार कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि जिन पंचायतों में लंबे समय से डीएमएफ मद से कोई कार्य नहीं पहुंचा है, उनकी सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर आगामी छह महीनों के भीतर कार्य आवंटित करने का प्रयास किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद सरपंचों में कुछ उम्मीद जरूर जगी है।
आंदोलन की चेतावनी
सरपंच संघ ने साफ कर दिया है कि यदि आने वाले महीनों में जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखाई दिया और पंचायतों को विकास कार्य नहीं मिले तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। सरपंचों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि गांवों के विकास के लिए है।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
पलारी ब्लॉक की 102 पंचायतों का यह सामूहिक प्रदर्शन जिले की पंचायत राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे सरपंचों की मांगों पर कितना अमल करते हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ बजट का नहीं है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों का है जो आज भी पानी, सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो पलारी ब्लॉक में पंचायतों का यह असंतोष आने वाले समय में बड़े जनआंदोलन का रूप भी ले सकता है।























