मनरेगा में फर्जी हाजिरी, DMF सड़क में घोटाले का आरोप: उपसरपंच ने खोली पंचायत की पोल, कलेक्टर से जांच की मांग
भुसड़ीपाली पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप…”काम कोई नहीं करता, फोटो खिंचवाकर निकल जाती मजदूरी” : उपसरपंच…5 लाख की सीसी रोड में सिर्फ 3 इंच ढलाई का दावा, पंचों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा शिकायत पत्र
बलौदाबाजार-भाटापारा कसडोल जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भुसड़ीपाली में विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पंचायत की उपसरपंच और पंचों ने सरपंच, सचिव तथा रोजगार सहायक पर मनरेगा और डीएमएफ मद के कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ के नाम शिकायत पत्र सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के तहत स्वीकृत सोनझोला नाला सफाई कार्य में फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी राशि निकाली गई, जबकि कई ऐसे लोगों के नाम मस्टररोल में दर्ज किए गए जिन्होंने मौके पर कोई काम ही नहीं किया। वहीं डीएमएफ मद से निर्मित सीसी रोड में भी गुणवत्ता से समझौता कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
उपसरपंच बोलीं- फोटो खिंचवाकर बना दिए मजदूर
ग्राम पंचायत की उपसरपंच लता लोधवंशी ने चर्चा में कहा कि मनरेगा कार्यों में वास्तविक मजदूरों के बजाय कुछ लोगों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया जाता था। बाद में उन्हीं लोगों के नाम से ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर मजदूरी निकाली जाती थी। उपसरपंच का आरोप है कि जब पंचों ने इस पर सवाल उठाया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे लोगों की हाजिरी दर्ज हुई है जो कभी कार्यस्थल पर काम करने नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी कई मामलों में जानकारी नहीं दी जाती और विकास कार्यों से जुड़ी प्रक्रियाओं को सीमित लोगों तक ही रखा जाता है।
सोनझोला नाला सफाई कार्य पर उठे सवाल
शिकायत में कहा गया है कि सोनझोला नाला सफाई कार्य के दौरान ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर मजदूरी भुगतान किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जॉब कार्ड रिकॉर्ड और वास्तविक कार्य के बीच बड़ा अंतर है। ग्रामीणों ने जांच के दौरान संबंधित जॉब कार्डधारकों के बयान दर्ज करने और मस्टररोल की भौतिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
पांच लाख की सड़क पर भी विवाद
भ्रष्टाचार के आरोप केवल मनरेगा तक सीमित नहीं हैं। शिकायतकर्ताओं ने डीएमएफ मद से स्वीकृत पांच लाख रुपये की लागत वाली सीसी रोड निर्माण पर भी सवाल उठाए हैं। यह सड़क खाल्हेपारा से स्वामी आत्मानंद स्कूल तक बनाई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। सबसे बड़ा आरोप सड़क की मोटाई को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जहां मानक के अनुसार सड़क की मोटाई अधिक होनी चाहिए थी, वहां केवल लगभग तीन इंच ढलाई कर निर्माण कार्य पूरा दिखा दिया गया। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण के कुछ हिस्सों में अभी से दरारें और क्षति के संकेत दिखाई देने लगे हैं, जिससे आगामी बारिश में सड़क को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है।
पंचों ने खोला मोर्चा
इस मामले में पंचायत के कई पंच खुलकर सामने आए हैं। शिकायत पत्र पर उपसरपंच लता लोधवंशी सहित अन्य पंचों ने हस्ताक्षर कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। पंचों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति की शिकायत नहीं बल्कि गांव के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सामूहिक चिंता है। उनका आरोप है कि पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता का अभाव है और विकास कार्यों की जानकारी भी पूरी तरह साझा नहीं की जाती।
प्रशासन से तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने मनरेगा कार्यों के मस्टररोल, भुगतान रिकॉर्ड और जॉब कार्ड की जांच के साथ-साथ डीएमएफ मद से बनी सड़क की तकनीकी गुणवत्ता की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है। ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की मोटाई, निर्माण सामग्री और स्वीकृत प्राक्कलन का मिलान विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा किया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों और जनता के हितों से जुड़े मामलों में समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की ओर से मिला आश्वासन
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों को अधिकारियों ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों और तकनीकी टीम द्वारा शिकायतों का परीक्षण किया जाएगा। अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला मनरेगा और डीएमएफ मद में वित्तीय अनियमितता के बड़े मामलों में शामिल हो सकता है। वहीं जांच में आरोप गलत पाए जाने पर भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल भुसड़ीपाली पंचायत में विकास कार्यों से ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं और ग्रामीणों की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।























