बलौदाबाजार में अडानी अंबुजा सीमेंट संयंत्र पर वादाखिलाफी का आरोप: “ज़मीन ले ली, न नौकरी मिली न बच्चों को शिक्षा”, आदिवासी महिला पहुंची कलेक्टर जनदर्शन
बलौदाबाजार में आदिवासी महिला ने अडानी अंबुजा सीमेंट संयंत्र पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। जमीन लीज पर लेने के बाद भी नौकरी और बच्चों की शिक्षा नहीं मिलने की शिकायत।
बलौदाबाजार/भाटापारा: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में उद्योग और स्थानीय लोगों के बीच भरोसे से जुड़ा एक संवेदनशील मामला सामने आया है। इस बार एक गरीब आदिवासी महिला ने अडानी अंबुजा सीमेंट संयंत्र रवान पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। आदिवासी महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी जमीन लीज पर लेने के दौरान किए गए वादों को एक साल बाद भी पूरा नहीं किया गया। मामला कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंच गया है, जहां पीड़िता ने लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की है। शिकायत के अनुसार, जमीन देने के बदले परिवार को रोजगार और बच्चों को शिक्षा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ है।
अडानी अंबुजा सीमेंट संयंत्र पर वादाखिलाफी का आरोप: जनदर्शन में पहुंची आदिवासी महिला
भाटापारा क्षेत्र की रहने वाली राधिया ध्रुव ने जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि वह गोंड अनुसूचित जनजाति समुदाय से आती हैं। उनके नाम पर ग्राम रवान में कृषि भूमि दर्ज थी, जिसे सीमेंट संयंत्र परियोजना के लिए लीज पर लिया गया।
महिला का आरोप है कि जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी करते समय कंपनी प्रतिनिधियों ने परिवार को आश्वस्त किया था कि उनके बच्चों को स्कूल में निःशुल्क शिक्षा की सुविधा मिलेगी और परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार दिया जाएगा।
अडानी अंबुजा सीमेंट संयंत्र पर वादाखिलाफी का आरोप: “न नौकरी मिली, न बच्चों को प्रवेश”
राधिया ध्रुव का कहना है कि लीज प्रक्रिया पूरी हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन परिवार को अब तक कोई रोजगार नहीं मिला है। साथ ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने का आश्वासन भी पूरा नहीं किया गया।
महिला का आरोप है कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों और प्रबंधन से संपर्क किया गया, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। लगातार प्रयासों के बावजूद परिवार को केवल आश्वासन ही मिलता रहा।
“जरूरत पड़े तो पैसा वापस कर देंगे”
शिकायत में पीड़िता ने भावुक अपील करते हुए कहा है कि यदि कंपनी अपने वादों को पूरा नहीं कर सकती, तो वह जमीन के बदले प्राप्त राशि वापस करने के लिए भी तैयार है।
महिला का कहना है कि परिवार को केवल आर्थिक मुआवजा नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य और रोजगार का अधिकार चाहिए। उनका दावा है कि जमीन देने का निर्णय भी इन्हीं आश्वासनों के आधार पर लिया गया था।
मुख्यमंत्री और आयोग तक पहुंची शिकायत
मामले को गंभीर बताते हुए पीड़िता ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि राज्य के मुख्यमंत्री तथा अनुसूचित जनजाति आयोग को भी भेजी है। शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच और वादों को लागू कराने की मांग की गई है। अब यह मामला केवल जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।
कई सवाल खड़े कर रहा मामला
यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यदि किसी भूमि अधिग्रहण या लीज प्रक्रिया के दौरान स्थानीय परिवारों से रोजगार और शिक्षा संबंधी आश्वासन दिए गए थे, तो क्या उन वादों का कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद है? यदि मौजूद है तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ? और यदि नहीं है तो दोनों पक्षों के बीच वास्तविक सहमति क्या थी? इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल शिकायत जिला प्रशासन के पास पहुंच चुकी है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले की जांच किस तरह करता है और क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि वास्तव में कोई वादा किया गया था और उसका पालन नहीं हुआ, तो संबंधित पक्ष पर कार्रवाई या निर्देश दिए जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कंपनी प्रबंधन का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
Important Note; कंपनी का पक्ष आना बाकी: समाचार लिखे जाने तक अंबुजा सीमेंट संयंत्र प्रबंधन की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। जांच पूरी होने और दोनों पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
भूमि, रोजगार और शिक्षा से जुड़ा यह मामला स्थानीय लोगों और उद्योगों के बीच विश्वास के प्रश्न को फिर सामने लेकर आया है। एक आदिवासी परिवार का दावा है कि उसने भविष्य की उम्मीद में अपनी जमीन लीज पर दी, लेकिन बदले में मिले आश्वासन पूरे नहीं हुए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन की जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और शिकायतकर्ता परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।























