
बलौदाबाजार में अवैध सागौन तस्करी पर बड़ा एक्शन, वाहन सहित लकड़ी जब्त,रात के अंधेरे में दबिश, महिंद्रा जीतो प्लस में भरकर ले जाई जा रही थी सागौन लकड़ी…5 आरोपी रंगे हाथों पकड़े गए, वन विभाग की सख्त निगरानी से तस्करों में हड़कंप
बलौदाबाजार । वन संपदा की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध सागौन परिवहन के नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत अर्जुनी वन परिक्षेत्र में की गई इस कार्रवाई में विभाग ने एक वाहन सहित भारी मात्रा में सागौन लकड़ी जब्त की है और पांच आरोपियों को मौके से पकड़ लिया है। यह कार्रवाई न केवल अवैध कटाई और तस्करी में लिप्त लोगों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वन विभाग अब पूरी तरह सक्रिय और सतर्क मोड में काम कर रहा है।
गुप्त सूचना ने खोला तस्करी का राज..
वन विभाग को पहले से ही इस बात की भनक मिल चुकी थी कि क्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई और परिवहन किया जा रहा है। लगातार मिल रही गुप्त सूचनाओं के आधार पर विभाग ने अपनी निगरानी तेज कर दी थी। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देश पर संबंधित स्टाफ को अलर्ट कर विशेष गश्त शुरू की गई। हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी और संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई थी।
रात 11:30 बजे दबिश, रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी
कार्रवाई के तहत 8 अप्रैल की रात लगभग 11:30 बजे बंगलापाली के पास वन विभाग की टीम ने दबिश दी। टीम को पहले से सूचना थी कि इसी मार्ग से लकड़ी की तस्करी की जा सकती है। जैसे ही संदिग्ध वाहन मौके पर पहुंचा, टीम ने उसे घेर लिया। जांच के दौरान वाहन में सागौन के लट्ठे भरे पाए गए। मौके पर मौजूद आरोपियों को पकड़ लिया गया, जो लकड़ी को अवैध रूप से ले जा रहे थे। जब्त किया गया वाहन महिंद्रा जीतो प्लस है, जिसका उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा था।
पांच आरोपी गिरफ्तार
इस कार्रवाई में कुल पांच आरोपियों को मौके से पकड़ा गया है। इनमें गंगाराम सागर (महकम), शिवप्रसाद केवट (सोनाखान), अंजोर साहू (मानाकोनी), कैलाश यादव (सोनाखान) और भुनेश्वर पटेल (महकम) शामिल हैं। वन विभाग ने सभी आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वन संपदा पर फोकस !
सागौन जैसी बहुमूल्य लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी लंबे समय से वन विभाग के लिए चुनौती रही है। सागौन की बाजार में ऊंची कीमत होने के कारण तस्कर इसे निशाना बनाते हैं। इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि विभाग अब ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं बरतने वाला है।
लगातार बढ़ रही निगरानी और गश्त
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए नियमित गश्त और निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष टीमों की तैनाती की जा रही है और स्थानीय स्तर पर भी सूचना तंत्र को सक्रिय किया गया है। सूत्रों के अनुसार, विभाग अब तकनीकी माध्यमों का भी उपयोग कर रहा है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जल्दी हो सके।
स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता जरूरी
वन विभाग का मानना है कि अवैध कटाई और तस्करी को रोकने में स्थानीय लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि ग्रामीण समय रहते सूचना दें तो इस तरह की गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ी है और लोग ऐसे मामलों की सूचना देने के लिए आगे आ रहे हैं।
तस्करों में मचा हड़कंप
लगातार हो रही कार्रवाइयों के कारण लकड़ी तस्करों में डर का माहौल बन गया है। वन विभाग की सक्रियता से यह साफ संदेश गया है कि अब अवैध कारोबार करना आसान नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह नियमित कार्रवाई होती रही तो आने वाले समय में अवैध कटाई और परिवहन पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
सागौन जैसे बहुमूल्य पेड़ों की कटाई न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी प्रभावित करती है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई से जैव विविधता पर असर पड़ता है और जलवायु परिवर्तन की समस्या भी बढ़ती है। इस तरह की कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आगे की जांच जारी?
वन विभाग ने जब्त लकड़ी और वाहन को अपनी अभिरक्षा में ले लिया है। मामले की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तस्करी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बलौदाबाजार में वन विभाग की यह कार्रवाई अवैध सागौन तस्करी के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम है। वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन संपदा की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। अब जरूरत है कि इसी तरह की सख्ती और निरंतर निगरानी जारी रहे, ताकि जंगल सुरक्षित रहें और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।






















