छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं 18 महिला बाइकर्स छत्तीसगढ़ पर्यटन और रोड सेफ्टी का दिया संदेश

छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं
छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं
छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं
छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं
छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने थामी एडवेंचर की कमान, घर-परिवार छोड़ बारनवापारा पहुंचीं 18 महिला बाइकर्स छत्तीसगढ़ पर्यटन और रोड सेफ्टी का दिया संदेश..
घर-परिवार की जिम्मेदारियों से निकलकर जंगल की राह पर निकलीं “मोटो क्वींस”, सड़क सुरक्षा, इको टूरिज्म और महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश…इको टूरिज्म, महिला सशक्तिकरण और सड़क सुरक्षा का दे रहीं संदेश, पर्यटन स्थलों को दिलाना चाहती हैं राष्ट्रीय पहचान
 सुबह की हल्की धूप, सड़कों पर दौड़ती दमदार मोटरसाइकिलें, हेलमेट और राइडिंग गियर में आत्मविश्वास से भरी महिलाएं… यह दृश्य किसी बड़े महानगर का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के उस बदलते चेहरे की तस्वीर है जहां महिलाएं अब सीमाओं को तोड़ते हुए नए रास्ते गढ़ रही हैं।
छत्तीसगढ़ में पहली बार महिलाओं का एक संगठित बाइकर्स ग्रुप “मोटो क्वींस एडवेंचर” राज्य के पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा का संदेश लेकर रायपुर से बारनवापारा अभ्यारण्य पहुंचा। इस विशेष अभियान में 18 महिला बाइकर्स शामिल हुईं, जिन्होंने सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर यह साबित कर दिया कि महिलाएं अब सिर्फ घर और दफ्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एडवेंचर, पर्यटन और नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। Chhattisgarh Talk News की टीम इस पूरे अभियान को कवर करने बारनवापारा अभ्यारण्य पहुंची, जहां महिला बाइकर्स ने अपने अनुभव, सपनों और इस अनूठी पहल के उद्देश्य को साझा किया।
नेपाल की सोलो राइड से शुरू हुई कहानी
इस पूरे अभियान की शुरुआत की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। मोटो क्वींस एडवेंचर की संस्थापक और कांकेर निवासी वनिका (वानी) पिल्लई ने बताया कि नवंबर-दिसंबर 2025 में उन्होंने अकेले बाइक पर कांकेर से नेपाल तक की लंबी यात्रा की थी। यह यात्रा सिर्फ एक एडवेंचर नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास और साहस की परीक्षा भी थी।
नेपाल यात्रा के दौरान उन्होंने अपने अनुभव सोशल मीडिया पर साझा किए। उनकी पोस्ट और वीडियो देखकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने उनसे संपर्क किया। कई महिलाओं ने कहा कि वे भी ऐसी यात्राएं करना चाहती हैं लेकिन उन्हें सही मंच और सहयोग नहीं मिल पाता।
यहीं से एक नए विचार ने जन्म लिया और “मोटो क्वींस एडवेंचर” की नींव रखी गई। आज यह समूह तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें 17 से अधिक सक्रिय महिला सदस्य जुड़ चुकी हैं। इनमें छात्राएं, प्रोफेशनल महिलाएं, गृहिणियां और विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाएं शामिल हैं।
घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच एडवेंचर का सफर
इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल अधिकांश महिलाएं अपने घर, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां निभाने के बाद इस अभियान का हिस्सा बनीं। कई महिला बाइकर्स ने बताया कि शुरुआत में परिवार के लोग चिंतित थे, लेकिन अब वे गर्व महसूस करते हैं कि उनकी बेटियां, बहनें और पत्नियां समाज के लिए सकारात्मक संदेश लेकर आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं का कहना है कि यह यात्रा सिर्फ बाइक चलाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सामाजिक बदलाव का अभियान है।
छत्तीसगढ़ को नई पहचान दिलाने की मुहिम
वनिका पिल्लई का मानना है कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर राज्य है, लेकिन अभी भी देश के बड़े हिस्से में इसकी सही पहचान नहीं बन पाई है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कांकेर, चित्रकोट, तीरथगढ़, बारनवापारा, सिरपुर और राज्य के कई अन्य पर्यटन स्थल राष्ट्रीय स्तर पर पहचान पाने के हकदार हैं। उनका कहना है कि जब बाहरी राज्यों के लोग छत्तीसगढ़ आते हैं तो यहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और मेहमाननवाजी देखकर प्रभावित हो जाते हैं। जरूरत सिर्फ इन स्थलों को सही तरीके से प्रचारित करने की है।
इसी उद्देश्य से महिला बाइकर्स लगातार पर्यटन स्थलों तक पहुंच रही हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें देशभर तक पहुंचा रही हैं।
सड़क सुरक्षा का भी मजबूत संदेश
मोटो क्वींस एडवेंचर की यह यात्रा सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं है। महिला बाइकर्स जहां-जहां पहुंच रही हैं, वहां लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। राइड के दौरान सभी सदस्य हेलमेट, राइडिंग जैकेट और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर रही हैं। वे लोगों से अपील कर रही हैं कि बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें, यातायात नियमों का पालन करें और तेज रफ्तार से बचें।
महिलाओं का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में हर साल हजारों लोगों की जान चली जाती है। यदि लोग जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाएं तो इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बारनवापारा में प्रकृति से जुड़ाव
बारनवापारा अभ्यारण्य पहुंचने के बाद महिला बाइकर्स ने जंगल सफारी, जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से जाना। घने जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक वातावरण ने सभी प्रतिभागियों को रोमांचित कर दिया। महिला बाइकर्स का कहना है कि इको टूरिज्म केवल घूमने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास का भी सशक्त जरिया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखें और प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचें।
महिलाओं के साथ बाइक पर उतरीं पर्यटन विभाग की अधिकारी
इस अभियान की खास बात यह भी रही कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की डीजीएम पूनम शर्मा और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे भी इस यात्रा में शामिल हुईं। दोनों अधिकारियों ने हेलमेट पहनकर महिला बाइकर्स के साथ कई किलोमीटर तक बाइक राइड की और उनके उत्साह को बढ़ाया। उनकी मौजूदगी ने इस अभियान को और अधिक मजबूती प्रदान की।
पूनम शर्मा क्या कहती हैं…
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की डीजीएम पूनम शर्मा ने Chhattisgarh Talk News से बातचीत में कहा, “यह केवल एक बाइक राइड नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, सुरक्षित पर्यटन और जिम्मेदार यात्रा संस्कृति का एक सशक्त उदाहरण है। छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और ऐसी पहलें राज्य के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हमें गर्व है कि महिलाएं पर्यटन के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।”
जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने Chhattisgarh Talk News को कहा, “महिलाओं का यह अभियान समाज के लिए प्रेरणादायक है। एक ओर यह महिला सशक्तिकरण का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और इको टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक भी करता है। आज की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और यह यात्रा उसी परिवर्तन की तस्वीर है।”
बदलते छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर
बारनवापारा तक पहुंची यह बाइक राइड सिर्फ एक एडवेंचर गतिविधि नहीं, बल्कि बदलते छत्तीसगढ़ की नई पहचान है। जहां कभी महिलाओं को लंबी दूरी की बाइक राइडिंग एक असंभव सपना माना जाता था, वहीं आज वे सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर राज्य के पर्यटन स्थलों को नई पहचान दिलाने का काम कर रही हैं। मोटो क्वींस एडवेंचर का यह अभियान यह संदेश देता है कि यदि अवसर, समर्थन और आत्मविश्वास मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने वाला यह प्रयास छत्तीसगढ़ में एक नई शुरुआत माना जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी बड़ी मुहिम का रूप ले सकता है।
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