बलौदाबाजार में वन्यजीव अपराध का मामला: फरार आरोपी ने किया आत्मसमर्पण, जेल भेजा गया

सिमगा में अवैध गैस सिलेंडरों पर प्रशासन की कार्रवाई (Chhattisgarh Talk)
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बलौदाबाजार में वन्यजीव अपराध का मामला: फरार आरोपी ने किया आत्मसमर्पण, जेल भेजा गया

तेंदुए के दांत, जंगली मांस और शिकार के उपकरण बरामद होने के बाद बढ़ा दबाव, अदालत में सरेंडर, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई, मामले में एक अन्य आरोपी पहले से न्यायिक अभिरक्षा में

बलौदा बाजार। वन्यजीव अपराध के एक गंभीर मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी ने आखिरकार कानून के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वन विभाग की लगातार तलाश और बढ़ते दबाव के बीच आरोपी ने न्यायालय में सरेंडर किया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वन विभाग के अनुसार आरोपी के खिलाफ वन्यजीवों के शिकार और अवैध गतिविधियों से जुड़ा मामला दर्ज है। उसके घर की तलाशी के दौरान कई प्रतिबंधित सामग्री बरामद की गई थी, जिसके बाद वह मौके से फरार हो गया था।

तलाशी में बरामद हुई प्रतिबंधित सामग्री

जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार वनमण्डल के अधिकारियों को वन्यजीव अपराध से संबंधित गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर वन विभाग की टीम ने ग्राम अल्दा में संदिग्ध व्यक्ति के घर पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान टीम को कई चौंकाने वाले सबूत मिले। घर से तेंदुआ के दांत, जंगली जानवर के मांस के टुकड़े, जी.आई. तार और भाले जैसे शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। ये सभी सामग्री वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आती है। वन विभाग ने मौके पर ही इन सामग्रियों को जब्त कर लिया।

तलाशी के दौरान जंगल की ओर भागा आरोपी

वन अमले की टीम जब घर की तलाशी ले रही थी, उसी दौरान मुख्य आरोपी मौके से जंगल की ओर भाग गया। घने जंगल और शाम का समय होने के कारण तत्काल उसे पकड़ पाना संभव नहीं हो सका। इसके बाद वन विभाग ने आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की और आसपास के जंगलों में सघन खोज अभियान चलाया। आरोपी को पकड़ने के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली गई, लेकिन उस समय वह हाथ नहीं लग सका। हालांकि विभाग ने उसकी तलाश जारी रखी और लगातार दबाव बनाए रखा।

फरार अरोपी शिव सेवक को जेल दाखिल करते
फरार अरोपी शिव सेवक को जेल दाखिल करते हुए 

बढ़ते दबाव के बीच अदालत में किया आत्मसमर्पण

वन विभाग की लगातार खोजबीन और कानूनी कार्रवाई के दबाव के चलते आरोपी ने आखिरकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उसने कसडोल स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत से अनुमति मिलने के बाद वन विभाग ने उसे विधिवत गिरफ्तार किया। आवश्यक पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को अदालत में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जिला जेल भेजने का आदेश दिया गया।

मामले में एक और आरोपी पहले से गिरफ्तार

इस मामले में एक अन्य आरोपी पहले से ही न्यायिक अभिरक्षा में है। उसके घर की तलाशी के दौरान भी वन्यजीवों से संबंधित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। तलाशी में सॉफ्ट शेल कछुआ का प्लास्ट्रॉन बरामद हुआ, जो वन्यजीव संरक्षण कानून की अनुसूची-1 में संरक्षित प्रजाति से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा लंगूर की खोपड़ी भी बरामद की गई थी, जो अनुसूची-2 के तहत संरक्षित प्रजाति में आती है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की जांच आपस में जुड़ी हुई है और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई

पूरे मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह कानून देश में वन्यजीवों और जैव विविधता की रक्षा के लिए बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों के शिकार, अवैध व्यापार या उनसे संबंधित सामग्री रखने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव अपराधों को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी, नेटवर्क की पड़ताल

वन अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण की जांच अभी जारी है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है या नहीं। वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के मामलों में अक्सर कई लोग शामिल होते हैं, इसलिए विभाग हर पहलू की जांच कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में वन्यजीव अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और ऐसे अवैध कार्यों में शामिल लोगों को कड़ा संदेश जाएगा।

कार्रवाई में कई अधिकारियों की भूमिका

पूरे अभियान में वन विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्रवाई के दौरान उप वनमंडलाधिकारी निश्चल शुक्ला, वन परिक्षेत्र अधिकारी श्वेता कुमारी सिंह के नेतृत्व में टीम ने तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा परिक्षेत्र सहायक जय किशन यादव, नटवर लाल वर्मा और अन्य कर्मचारियों ने भी जांच और तलाशी की कार्रवाई में सक्रिय सहयोग दिया।

वन्यजीव संरक्षण के लिए जरूरी सख्ती

विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यह जैव विविधता के संतुलन को भी प्रभावित करता है। तेंदुआ, कछुआ और लंगूर जैसी प्रजातियां पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके अवैध शिकार से जंगलों का संतुलन बिगड़ सकता है। इसी कारण वन विभाग लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से ऐसे अपराधों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।

क्षेत्र में बढ़ाई जा रही निगरानी

इस घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जंगलों के आसपास के गांवों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि लोग वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व को समझ सकें। साथ ही, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत विभाग को देने के लिए ग्रामीणों से सहयोग भी मांगा गया है।

कुल मिलाकर, बलौदाबाजार में सामने आया यह मामला वन्यजीव अपराधों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। आरोपी के आत्मसमर्पण के बाद अब जांच आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का भी जल्द खुलासा होगा। वन विभाग का कहना है कि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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