भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन में दिखी एकता और आत्ममंथन

भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन में दिखी एकता और आत्ममंथन (Chhattisgarh Talk)
भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन में दिखी एकता और आत्ममंथन (Chhattisgarh Talk)

भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन में दिखी एकता और आत्ममंथन, कलश यात्रा से गूंजा चांपा गांव, बदलते दौर में समाज के भविष्य पर खुली बहस, अंतरजातीय विवाह, युवाओं की दिशा और सामाजिक संतुलन पर गंभीर चर्चा

बलौदाबाजार: सामाजिक चेतना, परंपरा और बदलते समय के सवालों के बीच छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का 80वां महाधिवेशन इस बार केवल एक आयोजन नहीं रहा, बल्कि आत्ममंथन का मंच बन गया। बलौदाबाजार राज के चांपा गांव में स्वर्गीय सोनचंद वर्मा स्मृति फाउंडेशन स्मृति स्थल पर आयोजित दो दिवसीय महाधिवेशन की शुरुआत शनिवार को भव्य कलश यात्रा से हुई। हजारों लोगों की मौजूदगी, पारंपरिक परिधान में सजी महिलाएं और सामाजिक ध्वजा के साथ गूंजते नारे पूरे क्षेत्र को एक अलग ऊर्जा से भरते नजर आए।

पहले दिन के मुख्य अतिथि रहे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। उनके साथ केंद्रीय अध्यक्ष खोडस राम कश्यप, प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा और समाज के विभिन्न राजप्रधान मंच पर उपस्थित रहे। आयोजन ने जहां सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया, वहीं बदलते सामाजिक समीकरणों और भविष्य की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा भी हुई।


तीन किलोमीटर की कलश यात्रा, गांव बना सामाजिक उत्सव का केंद्र

महाधिवेशन का पहला दृश्य ही अलग था। सुबह से ही चांपा गांव की गलियों में हलचल शुरू हो गई थी। पारंपरिक वेशभूषा में सजी हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर लगभग तीन किलोमीटर की पदयात्रा निकाली। ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के बीच यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होकर सभा स्थल तक पहुंची।

यात्रा के समापन पर केंद्रीय अध्यक्ष खोडस राम कश्यप, मंत्री टंक राम वर्मा और अन्य राजप्रधानों ने सामाजिक ध्वजा का ध्वजारोहण किया। इसके बाद महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण और पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को और जीवंत बना दिया। यह दृश्य केवल परंपरा का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि सामाजिक शक्ति और संगठन क्षमता का परिचायक भी था।


भूपेश बघेल का संदेश: “समय के साथ सोच भी बदलिए”

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने समाज को समय के साथ बदलने का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर समाज की असली ताकत उसकी एकता और शिक्षा होती है।

उन्होंने कहा कि कुर्मी समाज ने शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आज की युवा पीढ़ी की सोच अलग है, उनका जीवन-परिवेश अलग है और चुनौतियां भी अलग हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को नई परिस्थितियों के अनुरूप लचीला बनना होगा। उन्होंने विवाह संबंधों को लेकर भी खुलकर बात की। उनका कहना था कि यदि कोई युवती पढ़ी-लिखी है, नौकरीपेशा है और उसे अपने स्तर का योग्य वर नहीं मिल रहा, तो समाज को नए विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में योग्य बेरोजगार युवक से विवाह का विकल्प भी देखा जा सकता है, जहां दोनों मिलकर परिवार की जिम्मेदारी साझा करें। उन्होंने इसे सामाजिक संतुलन की दिशा में एक व्यावहारिक सोच बताया।

भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन चापा में दिखी एकता और आत्ममंथन (Chhattisgarh Talk)
भूपेश बघेल पहुंचे बलौदाबाजार, मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के 80वें महाधिवेशन चापा में दिखी एकता और आत्ममंथन (Chhattisgarh Talk)

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पुरखों के दिए नारे “पंथी तोड़ो, समाज जोड़ो” को याद करते हुए कहा कि आज समाज को टूटने से बचाने और जोड़ने की जरूरत पहले से ज्यादा है।


अंतरजातीय विवाह और बदलते समीकरणों पर खुली चर्चा

महाधिवेशन का सबसे गंभीर पक्ष रहा केंद्रीय अध्यक्ष खोडस राम कश्यप का संबोधन। उन्होंने अपने प्रतिवेदन में समाज के सामने खड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया।

उन्होंने बढ़ते अंतरजातीय विवाह को लेकर चिंता जताई और कहा कि बदलते समय में सामाजिक बंधन पहले जैसे मजबूत नहीं रहे। कई युवक-युवतियां विवाह योग्य उम्र पार कर रहे हैं, लेकिन उपयुक्त जोड़ी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के पास ऐसे परिवारों के अनुरोध आ रहे हैं, जहां बच्चों के लिए योग्य जीवनसाथी नहीं मिल रहा। कुछ मामलों में अनाथालयों की लड़कियों से विवाह जैसे प्रस्ताव भी सामने आ रहे हैं।

उन्होंने इसे समय की मांग बताते हुए कहा कि समाज को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना होगा। लड़कियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता एक सकारात्मक बदलाव है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि यदि समाज उनकी समस्याओं को समझेगा नहीं, तो दूरी बढ़ती जाएगी।


टंक राम वर्मा का भावुक संबोधन

विशिष्ट अतिथि और प्रदेश के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अपने संबोधन में भावनात्मक जुड़ाव दिखाया। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी उन्होंने हासिल किया है, उसमें समाज की बड़ी भूमिका रही है।

उन्होंने साफ कहा कि वे अपने पद को सेवा का माध्यम मानते हैं। उनका कहना था कि वे हर दिन को अंतिम दिन की तरह और हर जिम्मेदारी को अंतिम जिम्मेदारी की तरह निभाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में कुर्मी समाज के लिए सामाजिक भवनों के निर्माण के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। कई भवनों का निर्माण शुरू हो चुका है और कुछ जल्द पूरे होंगे। उन्होंने मंच से यह भी कहा कि सामाजिक कार्यक्रमों में ऐसी बातें न कही जाएं, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। समाज की ताकत संवाद और संयम में है।


सामूहिक विवाह: नौ जोड़ों ने थामा नया जीवन

महाधिवेशन के दौरान नौ जोड़ों का सामूहिक विवाह भी संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच विवाह संपन्न हुए। मुख्य अतिथियों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उपहार भेंट किए। सामूहिक विवाह आयोजन ने समाज में सहयोग और समानता का संदेश दिया। ऐसे आयोजनों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलती है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलता है।


आरएसएस प्रांत संघ संचालक की उपस्थिति

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघ संचालक टोप लाल वर्मा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने समाज की संगठन क्षमता और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने पर जोर दिया।


दूसरे दिन मुख्यमंत्री की उपस्थिति

महाधिवेशन के दूसरे दिन राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की घोषणा की गई। इससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।


सामाजिक ऊर्जा और आत्मचिंतन का संगम

यह 80वां महाधिवेशन केवल एक परंपरागत आयोजन नहीं रहा। यहां मंच से ऐसे विषयों पर चर्चा हुई, जिन पर अक्सर समाज खुलकर बात करने से बचता है। अंतरजातीय विवाह, युवाओं की बदलती सोच, शिक्षा और रोजगार, सामाजिक संतुलन, महिलाओं की भूमिका और संगठन की मजबूती जैसे मुद्दों पर खुली बातचीत हुई। चांपा गांव दो दिनों तक सामाजिक चेतना का केंद्र बना रहा। हजारों लोगों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहता है, लेकिन साथ ही बदलते समय के सवालों का जवाब भी खोज रहा है।


परंपरा के साथ परिवर्तन की जरूरत

मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का यह महाधिवेशन एक संदेश छोड़ गया है। परंपराओं को संजोते हुए भी समय के साथ बदलना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री का व्यवहारिक सुझाव, केंद्रीय अध्यक्ष की चिंता और मंत्री का समर्पण भाव—इन तीनों ने मिलकर आयोजन को केवल औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़ा दिया। अब देखना यह होगा कि मंच पर उठे सवालों पर समाज किस दिशा में आगे बढ़ता है। लेकिन इतना तय है कि चांपा गांव में हुआ यह महाधिवेशन आने वाले समय में सामाजिक विमर्श का आधार जरूर बनेगा।

रिपोर्ट: चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com

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