ओटीपी के जाल में फंसा खाता, 3.74 लाख की साइबर ठगी: कोलकाता से आरोपी गिरफ्तार…
बलौदा बाजार। मोबाइल पर आए एक साधारण से मैसेज ने संजय कॉलोनी निवासी महेंद्र कुमार त्रिपाठी की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर दिया। खुद को जिओ फाइनेंस टीम बताकर भेजे गए वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी वाले संदेश के जरिए साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते से कुल 3,74,000 रुपये निकाल लिए। मामला सामने आते ही सिटी कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पश्चिम बंगाल के कोलकाता से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि साइबर अपराध अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे। छोटे शहरों और कस्बों के लोग भी तेजी से डिजिटल ठगी का शिकार बन रहे हैं।
कैसे रचा गया पूरा खेल
प्रार्थी महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि 12 दिसंबर 2025 को उनके मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया था। संदेश संदिग्ध लगने पर उन्होंने उसे डिलीट कर दिया। लेकिन दो दिन बाद, 14 दिसंबर 2025 को फिर एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था, “डियर कस्टमर, इस योर वन टाइम पासवर्ड, प्लीज एंटर एंड प्रोसीड, थैंक यू – टीम जिओ फाइनेंस।”
संदेश इस तरह तैयार किया गया था कि वह किसी अधिकृत वित्तीय संस्था का प्रतीत हो। कुछ ही देर बाद प्रार्थी के भारतीय स्टेट बैंक, गार्डन चौक शाखा, बलौदाबाजार स्थित खाते से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 3,74,000 रुपये निकलने का मैसेज प्राप्त हुआ। तब तक काफी देर हो चुकी थी। प्रार्थी ने तुरंत बैंक से संपर्क किया, लेकिन रकम खाते से निकल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने थाना सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
मामला दर्ज, शुरू हुई जांच
शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 101/2026 के तहत धारा 318(4) बीएनएस में प्रकरण दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। मामला साइबर अपराध से जुड़ा होने के कारण सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले उस मोबाइल नंबर और मैसेज की तकनीकी जानकारी जुटाई, जिससे ओटीपी वाला संदेश भेजा गया था। साथ ही बैंक ट्रांजैक्शन की पूरी डिटेल, लाभार्थी खाते और रकम के अंतिम गंतव्य की पड़ताल की गई।
तकनीकी विश्लेषण से मिला सुराग
पुलिस ने बैंक से प्राप्त जानकारी और डिजिटल ट्रेल का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम एक बंधन बैंक खाते में ट्रांसफर की गई है। खाते की केवाईसी डिटेल, आईपी एड्रेस, मोबाइल लिंकिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान शौविक राजवंशी के रूप में हुई। आरोपी पश्चिम बंगाल के नाथ 24 परगना जिले के सोदपुर इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक 112, थाना खोरदा का निवासी है। पुलिस टीम ने कोलकाता जाकर स्थानीय सहयोग से आरोपी को हिरासत में लिया।
पूछताछ में खुलासा
हिरासत में लिए जाने के बाद पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लोगों को ओटीपी आधारित फर्जी मैसेज भेजता था। उनका मकसद लोगों को भ्रमित कर उनके बैंक खाते से रकम निकालना था।
आरोपी ने यह भी बताया कि ठगी की रकम उसके बंधन बैंक खाते में जमा होती थी। इसके बदले उसे कमीशन के रूप में हिस्सा मिलता था। यानी वह पूरे गिरोह का मुख्य संचालक नहीं, बल्कि एक नेटवर्क का हिस्सा था, जो अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ हो सकता है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
साइबर अपराध का बदलता स्वरूप
इस घटना से एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले फोन कॉल के जरिए केवाईसी अपडेट या लॉटरी का झांसा दिया जाता था, अब फर्जी ओटीपी मैसेज के माध्यम से लोगों के खातों को निशाना बनाया जा रहा है। ओटीपी मूल रूप से सुरक्षा का माध्यम है, लेकिन जब व्यक्ति लापरवाही या भ्रमवश इसे साझा कर देता है या किसी फर्जी लिंक पर दर्ज कर देता है, तो वही सुरक्षा तंत्र उसके खिलाफ काम करने लगता है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ओटीपी, लिंक या बैंकिंग संबंधी संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। किसी भी वित्तीय संस्था द्वारा ओटीपी साझा करने के लिए मैसेज के माध्यम से नहीं कहा जाता। यदि ऐसा कोई संदेश प्राप्त होता है, तो उसे नजरअंदाज करें और संबंधित बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन पर संपर्क करें। साथ ही, अपने बैंक खाते में अनधिकृत ट्रांजैक्शन की सूचना तुरंत बैंक और नजदीकी थाने को दें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से रकम रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।
आरोपी की पृष्ठभूमि और नेटवर्क की जांच
गिरफ्तार आरोपी शौविक राजवंशी की उम्र 22 वर्ष बताई गई है। पुलिस उसके बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। संभावना है कि उसके पास से ऐसे और मामलों की जानकारी मिले। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या आरोपी पहले भी किसी साइबर ठगी में शामिल रहा है और उसके संपर्क किन-किन राज्यों तक फैले हैं।
डिजिटल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
आज के दौर में लगभग हर व्यक्ति का बैंक खाता मोबाइल से जुड़ा है। यूपीआई, नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग ने जहां सुविधा बढ़ाई है, वहीं जोखिम भी बढ़ाया है। ऐसे में डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है। जानकारों का कहना है कि कभी भी ओटीपी, कार्ड नंबर, सीवीवी या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्था कभी भी फोन या मैसेज के जरिए ऐसी जानकारी नहीं मांगती।
संजय कॉलोनी निवासी महेंद्र कुमार त्रिपाठी के साथ हुई 3.74 लाख रुपये की साइबर ठगी की घटना यह बताती है कि एक छोटी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकती है। हालांकि सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई से आरोपी को कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन असली चुनौती पूरे गिरोह का पर्दाफाश करना है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल युग की उस सच्चाई का उदाहरण है, जहां अपराधी सीमाओं से परे बैठकर लोगों की मेहनत की कमाई पर नजर गड़ाए बैठे हैं। जागरूकता, सतर्कता और समय पर शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे मजबूत उपाय है।
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
✉️ chhattisgarhtalk@gmail.com | ☎️ +91 9111755172
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े- Join Now
- विज्ञापन के लिए संपर्क करे: 9111755172
-टीम छत्तीसगढ़ टॉक न्यूज़ (Chhattisgarh Talk News























