बलौदाबाजार: कसडोल में दोहरी चाकूबाजी, एसडीओपी बोले चाकू चला, थाना प्रभारी बोले कैची! आखिर कौन सच, कौन झूठ?

बलौदाबाजार: कसडोल में दोहरी चाकूबाजी, एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक बोले चाकू चला, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर बोले कैची! आखिर कौन सच, कौन झूठ? (Chhattisgarh Talk)
बलौदाबाजार: कसडोल में दोहरी चाकूबाजी, एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक बोले चाकू चला, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर बोले कैची! आखिर कौन सच, कौन झूठ? (Chhattisgarh Talk)

बलौदाबाजार के कसडोल थाना क्षेत्र में सेमरिया और देवरीकला गांव की दोहरी चाकूबाजी की घटनाओं में 11 घायल। एसडीओपी ने चाकू और धारदार हथियार की पुष्टि की, वहीं थाना प्रभारी ने कहा “चाकू नहीं, कैची चली है।” पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता और मीडिया रिपोर्टिंग पर उठे सवाल।

बलौदाबाजार: बलौदाबाजार जिले में अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। ताजा मामला कसडोल थाना क्षेत्र का है, जहां सेमरिया और देवरीकला गांव की दोहरी चाकूबाजी की घटनाओं ने सनसनी फैला दी। दोनों वारदातों में 11 लोग घायल हुए, जिनमें 2 की हालत नाजुक बताई जा रही है। एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक ने मीडिया बाइट में दोनों घटनाओं की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपियों ने चाकू और धारदार हथियार से हमला किया है। इसी आधार पर धारा 307 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

लेकिन घटना पर नया विवाद तब खड़ा हो गया जब कसडोल थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर ने पत्रकार को कॉल कर कहा—“चाकू नहीं, कैची चली है… खबर में मिर्च मसाला लगाओ।” थाना प्रभारी का यह बयान एसडीओपी और पीड़ितों के आधिकारिक बयान के विपरीत है, जिससे पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता और घटनाओं की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

खबर के बाद थाना प्रभारी का फोन कहा-खबर में और मिर्च मसाला लगाओ

ETV भारत पर 4:31 PM को प्रसारित रिपोर्ट में, दोनों घटनाओं में एसडीओपी, घायल लोग और पीड़ितों के बयान शामिल थे। इसके पहले ही, एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक ने मीडिया बाइट में पुष्टि की थी कि दोनों मामलों में धारा 307 के तहत अपराध दर्ज किया गया है और विवेचना जारी है।

लेकिन रिपोर्ट के प्रसारण के कुछ घंटे बाद, 8:41 PM पर कसडोल थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर ने वॉट्सऐप कॉल कर ETV भारत के रिपोर्टर के साथ टिप्पणी की कि, चाकू नहीं, कैची चली है …कैची चली हैं उसको चाकू लिखे हो आप… कहां हुई चाकूबाजी बताओ? “खबर में और थोड़ा मिर्च मसाला लगाओ

कम है” यह बयान एसडीओपी और पीड़ितों के मीडिया बाइट के विपरीत है, जिससे पुलिस प्रशासन की गंभीरता और घटनाओं की सही जानकारी पर सवाल उठ रहे हैं।

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एसडीओपी ने मीडिया को दी ये जानकारी

एक तरफ कसडोल एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक ने मीडिया बाइट में साफ कहा कि, पहली घटना सेमरिया जहां शिवकुमार चौहान द्वारा थाने में रिपोर्ट की गई है कि उनके साथ आरोपी अंशु दास मानिकपुरी ने गाली गलौज की है। शिव कुमार चौहान ने बताया कि मैंने बस इतना ही बोला कि गाली गलौज मत करो। इससे गुस्सा होकर अंशु दास ने अपने पास रखे चाकू से जानलेवा हमला कर दिया।

वहीं दूसरी घटना पर बताया था कि, देवरीकला में कल रात एक प्रोग्राम था जिसमे गांव देवरीखुर्द के लोग देखने आए थे जो आश्रित ग्राम हैं, इसमें दिलेश्वर वैष्णव करके आरोपी है, दिलेश्वर वैष्णव ने हाथ, मुक्का (पंच) व धार धार हथियार और हार्ड एंड ब्लड ऑब्जेक्ट से बहुत लोगो पर वार (हमला) किया हैं। -कौशल किशोर वासनिक, एसडीओपी कसडोल

सेमरिया और देवरीकला गांव की दोनों घटनाओं में चाकू और धारदार हथियार से हमला हुआ और धारा 307 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर ने घटना की गंभीरता कम करते हुए कहा कि “चाकू नहीं, कैची चली है।”

लेकिन रात 8:41 बजे कसडोल थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर ने पत्रकार को वॉट्सऐप कॉल कर कहा:
“खबर में और थोड़ा मिर्च मसाला लगाओ… चाकू नहीं, कैची चली है… बताओ कहाँ हुई चाकूबाजी? कोई चाकूबाजी नही हुई हैं।”

बलौदाबाजार: कसडोल में दोहरी चाकूबाजी, एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक बोले चाकू चला, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर बोले कैची! आखिर कौन सच, कौन झूठ? (Chhattisgarh Talk)
बलौदाबाजार: कसडोल में दोहरी चाकूबाजी, एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक बोले चाकू चला, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर बोले कैची! आखिर कौन सच, कौन झूठ? (Chhattisgarh Talk)

यह स्थिति स्पष्ट रूप से गंभीर और सवाल उठाने वाली है। मुख्य सवाल यह बनता है कि पुलिस प्रशासन में सूचना और जिम्मेदारी का स्तर क्यों इतना उलझा हुआ है। बलौदाबाजार की घटनाओं को लेकर आप सीधे ऐसे सवाल उठा सकते हैं:

  1. सच्चाई कौन कह रहा है?
    • एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक ने स्पष्ट रूप से बताया कि दोनों घटनाओं में चाकू और धारदार हथियार का इस्तेमाल हुआ और धारा 307 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
    • वहीं, थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर ने दावा किया कि “चाकू नहीं, कैची चली है” और घटना की गंभीरता कम करने का प्रयास किया।
  2. थाना प्रभारी अपने उच्च अधिकारी के बयान के विपरीत क्यों बोल रहे हैं?
    • क्या यह जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है?
    • क्या प्रशासनिक दबाव या स्थानीय राजनीति इसका कारण हो सकती है?
    • क्या यह जनता को भ्रमित करने की कोशिश है ताकि घटना की गंभीरता कम लगे?
  3. क्या इससे जनता और पीड़ितों का भरोसा पुलिस प्रशासन पर कमजोर होगा?
    • एसडीओपी और पीड़ितों ने घटनाओं की गंभीरता बताई, लेकिन थाना प्रभारी ने इसे घटा कर पेश किया।
    • इससे पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
  4. मीडिया और रिपोर्टिंग की भूमिका क्या होनी चाहिए?
    • क्या पत्रकारों को इस तरह की विरोधाभासी बाइट्स में से कौन सच्चा है, इसे उजागर करना चाहिए?
    • क्या मीडिया को प्रशासनिक दबाव के बावजूद सच्चाई को प्रमुखता से दिखाना चाहिए?

इस पूरे मामले में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन झूठ बोल रहा है, बल्कि यह भी कि क्यों पुलिस के अंदर ऐसा विरोधाभास और कथित दबाव उत्पन्न हो रहा है

पक्ष बयान/स्थिति तथ्य से मेल टिप्पणी
एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक सेमरिया में चाकू से हमला और देवरीकला घटना में धारदार हथियार से हमला हुआ, दोनों में धारा 307 के तहत मामला दर्ज ✅ हाँ, पीड़ित और अस्पताल रिकॉर्ड्स के अनुसार सही प्रसारण से पहले मीडिया बाइट में एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक पुष्टि
एसडीओपी/ पीड़ित/ग्रामीण सेमरिया: चाकू से हमला किया, 3 घायल एक कि हालात गम्भीर

देवरीकला: बच्चों सहित 8 लोगों पर धारधार हथियार, हाथ और मुक्का (पंच), गंभीर चोटें और कन्हैया रात्रे गंभीर रूप से घायल- बलौदाबाजार जिला अस्पताल में भर्ती

✅ हाँ एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक, सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा और पीड़ितों के बयान के साथ मेल खाता है
थाना प्रभारी शशांक सिंह ठाकुर “चाकू नहीं, कैची चली है”, “खबर में मिर्च मसाला लगाओ” ❌ नहीं एसडीओपी और पीड़ित के बयानों के विपरीत; घटना की गंभीरता कम दिखाने की कोशिश

ग्रामीणों का गुस्सा, थाना घेराव

देवरीकूर्द के ग्रामीण थाने में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना था कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी, वे थाने से नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

बड़ा सवाल

  • जब एसडीओपी ने मीडिया बाइट में चाकूबाजी की पुष्टि कर दी थी, तो थाना प्रभारी इसे “कैची” क्यों बता रहे हैं?

  • क्या यह घटना की गंभीरता को कम दिखाने की कोशिश है?

  • पुलिस महकमे के भीतर विरोधाभासी बयान जनता में और भ्रम पैदा नहीं कर रहे?

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