बलौदाबाजार के ढाबाडीह स्थित अनिमेश पावर प्लांट में ब्लास्टिंग के दौरान मज़दूर गंभीर रूप से घायल। श्रमिकों ने सुरक्षा लापरवाही का लगाया आरोप। प्रशासन चुप।
बलौदाबाजार: 13 किलोमीटर दूर, मगर व्यवस्था से कोसों दूर…छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे तेज़ी से औद्योगीकृत हो रहे जिलों में से एक बलौदाबाजार में रविवार को एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई। जिले के प्रमुख अनिमेश पावर प्लांट, ढाबाडीह (करही चौकी क्षेत्र) में ब्लास्टिंग के दौरान एक मज़दूर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा ऐसा कि शरीर छलनी हो गया — और सवाल ऐसा कि “क्या मज़दूर की जान सिर्फ एक मजदूरी की कीमत है?”
अनिमेश पावर प्लांट हादसा: क्या हुआ हादसे में?
पीड़ित मज़दूर संजय ध्रुव (स्थानीय निवासी) रोज की तरह अनिमेश पावर प्लांट में काम पर गया था। लेकिन रविवार को ब्लास्टिंग कार्य के दौरान वह विस्फोट की चपेट में आ गया।
➡️ परिणाम:
- हाथों में गहरी चोट
- शरीर के कई हिस्सों में गंभीर घाव
- तत्काल बलौदाबाजार लाया गया, फिर रायपुर रेफर किया गया
अनिमेश पावर प्लांट हादसा: ‘हर दिन डर के साए में काम करते हैं’ – मज़दूरों की पीड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि –“सेफ्टी का कोई इंतज़ाम नहीं है। हेलमेट, ग्लव्स, जैकेट – कुछ भी नहीं। बस रोज़ धमाके और खतरा।”
एक अन्य मज़दूर ने गुस्से में कहा –“हम जान पर खेलकर कंपनी को बिजली दे रहे हैं, लेकिन हमारी जान की कोई कीमत नहीं। ये हादसा आज नहीं तो कल होना ही था।”
अनिमेश पावर प्लांट हादसा: प्लांट प्रबंधन पर बड़े सवाल
- अनिमेश पावर प्लांट में सेफ्टी प्रोटोकॉल कहां हैं?
- क्या ब्लास्टिंग से पहले इलाके को खाली कराया गया?
- घायल को अस्पताल पहुँचाने में देरी क्यों हुई?
- अनिमेश पावर प्लांट एचआर अधिकारी फोन क्यों नहीं उठाते?
अनिमेश पावर प्लांट के एचआर प्रमुख मनोज अग्रवाल से संपर्क किया गया (मो. 70007 84515) – लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। जवाब तो छोड़िए, जवाबदेही से भी दूरी।
पुलिस क्या कहती है?
करही चौकी प्रभारी राजेन्द्र पाटिल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा –“हमें रविवार को जानकारी मिली, मामले की जांच की जा रही है।”
लेकिन सवाल ये है कि क्या जांच से संजय को नया हाथ मिलेगा? क्या प्लांट को सील किया जाएगा?
‘सेफ्टी वीक’ सिर्फ बोर्ड पर, ज़मीनी हकीकत मौत के मुँह में!
हर औद्योगिक प्रतिष्ठान में साल में एक बार “सेफ्टी वीक” मनाया जाता है – सेमिनार, भाषण, पोस्टर, ताली…लेकिन जब वास्तविक खतरा आता है, तो मज़दूर अकेला होता है, दर्द उसका होता है, इलाज उसका नसीब बन जाता है।
मज़दूर संगठनों का अल्टीमेटम – ‘या तो सुरक्षा दो, या आंदोलन झेलो’
स्थानीय मज़दूर यूनियनों और ग्रामीणों में उबाल है। संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“अगर प्लांट प्रबंधन ने सुरक्षा सुधारने के स्पष्ट उपाय नहीं किए, तो हम संयंत्र गेट के सामने धरना देंगे और काम बंद करेंगे।”
क्या कहता है कानून?
भारतीय श्रम कानून के अनुसार:
- Factory Act 1948 के तहत हर उद्योग को श्रमिकों को पूर्ण सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
- Blast Work में स्पेशल सेफ्टी जोन और चेतावनी बोर्ड ज़रूरी हैं।
- घायल श्रमिक को तत्काल मेडिकल सुविधा, बीमा लाभ और मुआवजा देना कंपनी की जिम्मेदारी है।
क्या होनी चाहिए तत्काल कार्रवाई?
- श्रम विभाग और जिला प्रशासन को तत्काल जाँच टीम भेजनी चाहिए
- अनिमेश प्लांट पर सुरक्षा उल्लंघन के लिए एफआईआर दर्ज हो
- घायल श्रमिक संजय ध्रुव को न्यूनतम ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाए
- सभी ब्लास्टिंग साइट्स की सेफ्टी ऑडिट करवाई जाए
- स्थायी चिकित्सा सुविधा और इमरजेंसी टास्क फोर्स नियुक्त हो
मज़दूरी का मतलब जान देना नहीं है
संजय ध्रुव की यह दुर्घटना कोई पहली या आखिरी नहीं है। बल्कि यह पूरे सिस्टम की लापरवाही का आईना है – जहाँ उत्पादन की मशीनें तेज़ हैं, लेकिन मानव सुरक्षा सुस्त। इससे पहले कि कोई मज़दूर स्थायी रूप से अपनी आवाज़ खो दे, समय है कि श्रमिकों को सिर्फ श्रमिक नहीं, इंसान समझा जाए।
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