जिला अस्पताल में पहली बार जटिल PANFACIAL फ्रेक्चर का सफल इलाज डॉ कामिनी डडसेना के द्वारा.

 

दुर्ग जिला अस्पताल दुर्ग मे ग्राम मनियारी निवासी 18 वर्षीय युवक केशव जिसकी सड़क दुर्घटना मे चेहरे को सारी हड्डी टूट गई थी उसका सफल ऑपरेशन किया गया, दुर्घटना की वजह से जबड़ा बन्द नहीं हो रहा था और मरीज को खाने पीने और मुँह खोलने मे भी परेशानी थी। चेहरे को तीन भागों में बाँटा जाता है और जब तीनों भागों की हड्डी टूटी हो तो इसे पैनफेशियल फ्रेक्चर कहते हैं। दुर्घटना के बाद मरीज कुछ घण्टे बेहोश था जिसकी वजह से न्यूरो सर्जन से फिटनेस लेने के बाद सर्जरी की गई। चेहरे की हड्डी को जोड़ने के लिए टाइटेनियम धातू की मिनिप्लेट और स्क्रू लगाए गए। पैन फेशियल फ्रेक्चर एक जटिल ऑपरेशन है क्योंकि चेहरे की हड्डी को पहले की तरह संगठित करना पड़ता है। यह सर्जरी ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ कामिनी डडसेना ने की एवं डॉ शिवासिष अग्निहोत्री  ने ऑपरेशन में सहयोग किया। इस सर्जरी के एनेस्थेटिस्ट डॉ बसंत चौरालिया एवं डॉ श्रीकाजीत थे,

जिन्होने साँस की नली सामने के टूटे हुए दाँत के बीच से डालकर मरीज को बेहोश किया। ओ.टी. टेक्निशियन रमेश एवं स्क्रब नर्स गीता ने अहम भूमिका निभाई।

इस जटिल आपरेशन से जहाँ मरीजी को नई जिंदगी मिली है वही दुर्ग जिला अस्पताल में इस तरह से सफल आपरेशन करके डॉ कामिनी डडसेना ने सफलता के नए आयाम रच दिए है अब गरीबो को किसी भी तरह की परेशानी में प्राइवेट हॉस्पिटल जाने की जरूरत नही पड़ेगी,शासकीय हॉस्पिटल में बड़े हॉस्पिटलों की तर्ज पर मरीजो को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है

जिला अस्पताल में पहली बार जटिल PANFACIAL फ्रेक्चर का सफल इलाज डॉ कामिनी डडसेना के द्वारा.

दुर्ग जिला अस्पताल दुर्ग मे ग्राम मनियारी निवासी 18 वर्षीय युवक केशव जिसकी सड़क दुर्घटना मे चेहरे को सारी हड्डी टूट गई थी उसका सफल ऑपरेशन किया गया, दुर्घटना की वजह से जबड़ा बन्द नहीं हो रहा था और मरीज को खाने पीने और मुँह खोलने मे भी परेशानी थी। चेहरे को तीन भागों में बाँटा जाता है और जब तीनों भागों की हड्डी टूटी हो तो इसे पैनफेशियल फ्रेक्चर कहते हैं। दुर्घटना के बाद मरीज कुछ घण्टे बेहोश था जिसकी वजह से न्यूरो सर्जन से फिटनेस लेने के बाद सर्जरी की गई। चेहरे की हड्डी को जोड़ने के लिए टाइटेनियम धातू की मिनिप्लेट और स्क्रू लगाए गए। पैन फेशियल फ्रेक्चर एक जटिल ऑपरेशन है क्योंकि चेहरे की हड्डी को पहले की तरह संगठित करना पड़ता है। यह सर्जरी ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ कामिनी डडसेना ने की एवं डॉ शिवासिष अग्निहोत्री ने ऑपरेशन में सहयोग किया। इस सर्जरी के एनेस्थेटिस्ट डॉ बसंत चौरालिया एवं डॉ श्रीकाजीत थे,
जिन्होने साँस की नली सामने के टूटे हुए दाँत के बीच से डालकर मरीज को बेहोश किया। ओ.टी. टेक्निशियन रमेश एवं स्क्रब नर्स गीता ने अहम भूमिका निभाई।
इस जटिल आपरेशन से जहाँ मरीजी को नई जिंदगी मिली है वही दुर्ग जिला अस्पताल में इस तरह से सफल आपरेशन करके डॉ कामिनी डडसेना ने सफलता के नए आयाम रच दिए है अब गरीबो को किसी भी तरह की परेशानी में प्राइवेट हॉस्पिटल जाने की जरूरत नही पड़ेगी,शासकीय हॉस्पिटल में बड़े हॉस्पिटलों की तर्ज पर मरीजो को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है

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