बलौदाबाजार वनमण्डल में ‘युवान’ पहल: प्रकृति से जुड़कर ग्रीन लीडर बनने की ओर बढ़ रहे युवाओं को वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित, कॉलेजों के विद्यार्थियों ने लिया उत्साहपूर्ण हिस्सा
बलौदा बाजार। पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में बलौदाबाजार वनमण्डल में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। “YUVAN – Connecting Youth with Nature” कार्यक्रम के तहत आयोजित युवान वॉलेंटियर्स ओरिएंटेशन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर प्रकृति और भविष्य के बीच एक नई कड़ी बनने का संकल्प लिया। वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य युवाओं को जंगल, वन्यजीव और जैव विविधता से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्रिय भूमिका निभाए। कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों और युवाओं ने न सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी जानकारी हासिल की, बल्कि संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी के लिए भी उत्साह दिखाया। वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने दी chhattisgarhtalk.com को विस्तृत जानकारी.
युवाओं को प्रकृति से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि “युवान” शब्द दो शब्दों के मेल से बना है – युवा और वन। इसका मूल उद्देश्य युवाओं को प्रकृति के करीब लाना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति, वन्यजीव और मानव समाज एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि इनका संतुलन बिगड़ता है तो इसका असर सीधे मानव जीवन पर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि नई पीढ़ी प्रकृति के महत्व को समझे और उसके संरक्षण के लिए आगे आए। उन्होंने बताया कि युवान वॉलेंटियर्स प्रोग्राम के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और विभिन्न संरक्षण गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इससे उन्हें जंगलों की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों के व्यवहार और जैव विविधता के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसमें डी.के. कॉलेज बलौदाबाजार, शासकीय महाविद्यालय लवन और लाइफकेयर कॉलेज ऑफ नर्सिंग बलौदाबाजार के स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल रहे। छात्रों ने कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी हासिल की और कई सवाल भी पूछे। वन अधिकारियों ने उनके सवालों का विस्तार से जवाब देते हुए जंगलों के महत्व और संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा की। विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि वे इस पहल के माध्यम से प्रकृति को करीब से समझना चाहते हैं और भविष्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।
विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. अजय मिश्रा ने वेटलैंड कंजर्वेशन यानी आर्द्रभूमि संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वेटलैंड्स जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और ये जल संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा कई प्रजातियों के आवास के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूक रहें और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।
युवान कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य
कार्यक्रम के दौरान सौरव राजवाड़े ने युवान वॉलेंटियर्स प्रोग्राम की अवधारणा और उद्देश्यों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से युवाओं को पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। युवाओं को जंगलों की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और समुदाय आधारित संरक्षण गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि युवान वॉलेंटियर्स को समय-समय पर फील्ड विजिट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा, ताकि वे व्यवहारिक रूप से भी पर्यावरण संरक्षण को समझ सकें।
मानव और हाथी के सहअस्तित्व पर प्रस्तुति
कार्यक्रम में सौरव मेहरा ने मानव-हाथी सहअस्तित्व विषय पर रोचक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में मानव और हाथी के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन सही जागरूकता और प्रबंधन के माध्यम से दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जंगलों के संरक्षण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने से मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक कृषानू चन्द्राकार सहित वन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक प्रखर नायक और प्रशिक्षु सहायक वन संरक्षक गुलशन साहू सहित विभिन्न परिक्षेत्रों के अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी अधिकारियों ने युवाओं को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया और बताया कि वन विभाग समाज की भागीदारी के बिना जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा नहीं कर सकता।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद
युवान वॉलेंटियर्स कार्यक्रम को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा और अवसर मिले तो वे प्रकृति संरक्षण के बड़े अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। इस तरह के कार्यक्रम युवाओं में न सिर्फ जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी का एहसास भी कराते हैं। जब युवा प्रकृति के महत्व को समझते हैं तो वे अपने परिवार और समाज को भी इसके प्रति जागरूक करते हैं।
भविष्य के ‘ग्रीन लीडर्स’ तैयार करने की पहल
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि युवान वॉलेंटियर्स को भविष्य में विभिन्न पर्यावरणीय अभियानों में शामिल किया जाएगा। इनमें वृक्षारोपण, वन्यजीव जागरूकता अभियान, जैव विविधता संरक्षण और समुदाय आधारित कार्यक्रम शामिल होंगे। इस पहल का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
प्रकृति और युवा: मजबूत होती नई साझेदारी
बलौदाबाजार वनमण्डल में आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं और प्रकृति के बीच एक नई साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है। जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही यह संभव है। युवान वॉलेंटियर्स कार्यक्रम ने यह संकेत दे दिया है कि यदि युवाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो वे पर्यावरण संरक्षण के सबसे मजबूत प्रहरी बन सकते हैं। DFO ने कहा कि, आने वाले समय में यह पहल न सिर्फ जंगलों की सुरक्षा में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण के प्रति समाज में नई सोच भी विकसित करेगी।गणवीर धम्मशील, वनमण्डलाधिकारी
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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