Shree Cement Plant Balodabazar में ट्रक ड्राइवर संतोष मानिकपुरी की संदिग्ध मौत के बाद बवाल। परिजनों और ड्राइवर यूनियन ने जांच व मुआवजे की मांग की….
बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के Shree Cement Plant Balodabazar के बलौदाबाजार स्थित सीमेंट संयंत्र में एक ट्रक चालक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। घटना के बाद जहां एक ओर प्रबंधन मौत की वजह शराब सेवन को बता रहा है, वहीं दूसरी ओर यही दावा अब कई गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है। मृतक चालक की पहचान संतोष मानिकपुरी के रूप में हुई है, जो सीमेंट लोड करने के लिए प्लांट के भीतर गया था। बताया जा रहा है कि वह पिछले दो दिनों से संयंत्र परिसर में मौजूद था। इसी दौरान उसकी मौत हो गई। घटना सामने आने के बाद परिजनों और ड्राइवर यूनियन में भारी नाराजगी है। अब सवाल केवल एक चालक की मौत का नहीं रह गया है, बल्कि पूरे प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था, श्रमिक सुविधाओं और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
Shree Cement Plant Balodabazar: मौत से ज्यादा सवालों ने बढ़ाई हलचल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि मौत शराब पीने के कारण हुई है, तो एक हाई सिक्योरिटी औद्योगिक परिसर के भीतर शराब पहुंची कैसे? परिजनों का कहना है कि संयंत्र में प्रवेश के दौरान वाहनों और व्यक्तियों की जांच की जाती है। ऐसे में यदि कोई चालक परिसर के भीतर शराब पीता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? मृतक के परिवार का आरोप है कि प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मौत को केवल शराब सेवन से जोड़कर मामले को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। परिजनों का कहना है कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक मौत के वास्तविक कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
Shree Cement Plant Balodabazar: हमें समय पर सूचना तक नहीं दी गई
मृतक के परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें समय पर जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि जब तक उन्हें मौत की सूचना मिली, तब तक कई प्रक्रियाएं आगे बढ़ चुकी थीं। परिवार का आरोप है कि यदि घटना गंभीर थी तो सबसे पहले परिजनों को सूचित किया जाना चाहिए था। इसी बात को लेकर परिवार में नाराजगी और अविश्वास दोनों बढ़ गए हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे मामले को जल्द से जल्द खत्म करने का प्रयास किया जा रहा हो।
ड्राइवर यूनियन भी मैदान में
घटना के बाद ड्राइवर यूनियन ने भी मोर्चा खोल दिया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है बल्कि पूरे परिवहन समुदाय की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यूनियन का आरोप है कि कई औद्योगिक इकाइयों में ट्रक चालकों को घंटों और कई बार दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन उनके लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता है। ड्राइवर यूनियन के प्रदेश प्रभारी संतोष देवांगन का कहना है कि यदि चालक दो दिनों से परिसर के भीतर था तो उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यक सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी थी, इसका जवाब प्रबंधन को देना होगा।
पानी नहीं, सुरक्षा नहीं?
मृतक के परिजनों और यूनियन नेताओं ने संयंत्र प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्लांट परिसर में आने वाले ट्रक चालकों के लिए न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न ही स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हैं। आरोप यह भी है कि लंबे इंतजार के दौरान चालकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।बहालांकि इन आरोपों पर संयंत्र प्रबंधन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटना के बाद इन मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।
गांव से लेकर यूनियन तक आक्रोश
यह मामला अमोदी गांव और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया है। मृतक के परिवार के लोग न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वहीं परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोग भी घटना को गंभीरता से देख रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि किसी चालक की मौत कार्यस्थल परिसर के भीतर होती है तो हर पहलू की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Shree Cement Plant Balodabazar: आंदोलन की तैयारी
परिजनों और ड्राइवर यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो दो दिन बाद संयंत्र के मुख्य द्वार के सामने बड़ा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन भी इस आंदोलन को समर्थन देने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में मामला और गर्मा सकता है।
पुलिस क्या कह रही है?
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई है।
क्षेत्र के एसडीओपी कौशल किशोर वासनिक ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
कई अनुत्तरित सवाल
इस घटना ने कई ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं जिनके जवाब अभी मिलने बाकी हैं:
- चालक की मौत की वास्तविक वजह क्या थी?
- यदि शराब सेवन हुआ था तो शराब प्लांट के भीतर कैसे पहुंची?
- चालक दो दिन तक परिसर में क्यों रुका हुआ था?
- क्या उसे आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं?
- परिजनों को सूचना देने में देरी क्यों हुई?
- क्या सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण मौत थी या फिर किसी बड़ी लापरवाही का मामला।
अब जांच पर टिकी निगाहें
संतोष मानिकपुरी की मौत ने एक बार फिर औद्योगिक परिसरों में काम करने वाले ट्रक चालकों की स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। परिवार न्याय चाहता है, यूनियन जवाब मांग रही है और प्रशासन जांच की बात कर रहा है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी जांच एजेंसियों पर है। फिलहाल संयंत्र के बाहर माहौल तनावपूर्ण है और परिजनों का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा। यदि समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच क्या कहती है और मृतक चालक संतोष मानिकपुरी की मौत के पीछे की असली कहानी क्या निकलकर सामने आती है।
📍बलौदाबाजार से केशव साहू की ग्राउंड रिपोर्ट
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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