



बलौदाबाजार में नाबालिग के हाथों शराब बिक्री का चौंकाने वाला मामला सामने आया। जानिए कैसे सरकारी शराब दुकान का मैनेजर इस गोरखधंधे का मास्टरमाइंड निकला और पुलिस ने जेजे एक्ट के तहत पहली FIR दर्ज की।
शाम के धुंधलके में सौदा
शहर का कोना-कोना जैसे अंधेरे में डूब चुका था। सड़कों पर हलचल थी, लेकिन एक खास गली में हमेशा की तरह सन्नाटा पसरा था। उसी गली में एक नाबालिग लड़का एक थैली हाथ में लिए खड़ा था, उसकी नजरें इधर-उधर घूम रही थीं, मानो किसी का इंतजार कर रहा हो। कुछ ही देर में एक ग्राहक आया, उसने धीरे से कुछ रुपये उसकी ओर बढ़ाए, और लड़के ने बदले में उसे शराब की बोतल पकड़ा दी।
यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि बलौदाबाजार की एक कड़वी हकीकत थी—जहाँ मासूमियत को लालच और शराब के धंधे ने निगल लिया था।
बलौदाबाजार शराब मामला: राज़ का खुलासा
रात की खामोशी पुलिस की साइरन से टूटी। अचानक एक टीम उस गली में पहुँची और लड़के को पकड़ लिया गया। पूछताछ में जो सामने आया, उसने सबको चौंका दिया।
“मुझे रोज़ 20 रुपये मिलते हैं हर पौवा बेचने पर… रोहन सर ने कहा था कि ये काम कोई बड़ी बात नहीं, लोग तो खुद शराब खरीदने आते हैं!” – उस मासूम की आवाज़ कांप रही थी।
कौन था इस खेल का मास्टरमाइंड?
रोहन टंडन – नाम तो आम था, लेकिन पुलिस के अनुसार सरकारी शराब दुकान का मैनेजर, जिसने सिर्फ शराब की बोतलें ही नहीं बेचीं, बल्कि एक नाबालिग के सपनों को भी तस्करी के अंधेरे में धकेल दिया। सरकारी शराब दुकान से शराब ग्राहकों को देना होता हैं। लेकिन इस बार पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया था।
बलौदाबाजार शराब मामला: पहले भी था अपराधी, फिर भी बना सरकारी ठेका मैनेजर!
जब पुलिस ने रोहन टंडन की फाइल खंगाली, तो उसके नाम पर पहले से कई अपराध दर्ज मिले—
- अवैध शराब बिक्री
- मारपीट
- आबकारी एक्ट के उल्लंघन के मामले
सवाल ये उठा कि जिस आदमी का अपराधी रिकॉर्ड था, वह सरकारी शराब दुकान का मैनेजर कैसे बन गया? क्या आबकारी विभाग ने कभी उसकी जाँच की थी, या फिर उसके काले धंधे से कुछ हिस्सा ऊँचे अफसरों तक भी पहुँचता था? यह पहली बार हैं जब किसी अवैध शराब बेफहने वाले ने किसी मैंनेजर का नाम लिया।
जेजे एक्ट के तहत हुई पहली FIR
थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने न सिर्फ आरोपी रोहन टंडन को गिरफ्तार किया, बल्कि उसके खिलाफ जेजे एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) की धारा 78 के तहत मामला भी दर्ज किया। यह पहली बार था जब जिले में किसी शराब दुकान के मैंनेजर पर इस कड़े कानून के तहत कार्रवाई हुई थी।
कैसे चलता था यह अवैध धंधा?
बलौदाबाजार में शराब की अवैध बिक्री का खेल कोई नया नहीं है। यहां सरकारी दुकानों से ही शराब लेकर कोचिए गांव-गांव में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
लेकिन इस बार मामला और भी संगीन था—एक मासूम को अपराध में धकेला जा रहा था।
- शराब की दुकान से चोरी-छिपे शराब बाहर पहुंचाई जाती थी।
- नाबालिग बच्चों को लालच देकर इसे बेचवाने का आरोप लगा हैं।
- हर पौवा पर 20 रुपये दिए जाते थे, जिससे मासूम बच्चे इस धंधे में फंसते चले जाते थे।
अब कौन-कौन आएगा पुलिस के रडार पर?
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गोरखधंधे में अन्य शराब दुकानों के कर्मचारी और आबकारी अधिकारी भी शामिल हैं?
-
क्या और नाबालिगों को भी इस धंधे में धकेला गया था?
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आखिर कौन संरक्षण दे रहा था?
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क्या आबकारी विभाग के अधिकारी भी इसमें मिले हुए हैं?
लेकिन असली अपराधी कौन?
रोहन टंडन को पकड़कर पुलिस ने काम खत्म कर दिया, लेकिन असली अपराधी शायद अभी भी खुलेआम घूम रहे हो?—
- क्या आबकारी विभाग के अधिकारियों को इस गोरखधंधे की भनक नहीं थी?
- क्या शराब ठेकों से होने वाली अवैध बिक्री में बड़े अफसर भी शामिल थे?
- क्या सरकार की “शराब नीति” वाकई जनता के हित में थी, या फिर यह सिर्फ एक दिखावा था?
शराब का खेल और एक अनसुलझा सवाल…
क्या वाकई रोहन टंडन ने ऐसा किया या फिर किसी खास को बचाने लिए लिए रोहन टंडन को मोहरा बनाया गया हैं? रोहन टंडन अब सलाखों के पीछे चले गया, लेकिन उसके पीछे छिपे बड़े खेल की जड़ें अभी भी बाकी थीं।
वो नाबालिग लड़का अब सुरक्षित हैं, लेकिन क्या सच में उसका भविष्य भी सुरक्षित हो पायेगा? क्या ऐसे न जाने कितने और मासूम इस गंदे धंधे में झोंके जा चुके हो?
बलौदाबाजार की गलियों में अब भी वही अंधेरा था, वही खामोशी… पर सवाल ये था—
इस कहानी का अगला शिकार कौन होगा?
इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन वाकई इस गोरखधंधे को खत्म करने के लिए गंभीर है, या फिर यह केवल एक दिखावटी कार्रवाई है?
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