मातागढ़ दान पेटियों की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मातागढ़ तुरतुरिया का संचालन अब तक रहस्यमय जिम्मेदारी के नाम पर सिर्फ गोलमाल भूमिपूजन के वर्षों बाद भी निर्माण कार्य ठप
बलौदा बाजार। क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल मातागढ़ तुरतुरिया की संचालन व्यवस्था आज भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। वर्षों से यह सवाल बना हुआ है कि इस पवित्र धाम के संचालन की वास्तविक जिम्मेदारी किस संस्था या विभाग के पास है। कभी ट्रस्ट, कभी जनपद पंचायत, कभी ग्राम पंचायत तो कभी स्थानीय समिति के बीच जिम्मेदारी का मामला उलझा नजर आता है। इस अस्पष्ट व्यवस्था का असर मंदिर परिसर के विकास और व्यवस्थाओं पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।
भूमिपूजन के बाद भी विकास कार्य शुरू नहीं
मातागढ़ तुरतुरिया के विकास एवं मंदिर निर्माण के लिए पूर्व में भूमिपूजन किया गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी प्रस्तावित कार्य धरातल पर दिखाई नहीं देते, जिससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।
दान पेटियों की सुरक्षा पर सवाल
चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि सहित विभिन्न पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नते लेकर पूजन के लिए पहुंचते हैं और दान पेटियों में श्रद्धानुसार राशि अर्पित करते हैं। लेकिन चौकाने वाली बात तो यह कि समय-समय पर दान पेटियों से चोरी अथवा दान पेटी गायब होने जैसी घटनाएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावी जांच और ठोस कार्रवाई नहीं होने से सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
संचालन विवाद न्यायालय तक पहुंचा
जानकारी के अनुसार संचालन व्यवस्था को लेकर विवाद विभिन्न प्रशासनिक स्तरों से होते हुए न्यायालय तक पहुंच चुका है। विवाद लंबित रहने के कारण विकास कार्य और प्रशासनिक निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।
श्रद्धालुओं को सुविधाओं का अभाव
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्पष्ट संचालन व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, विश्राम स्थल, छायादार स्थान, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो पाया है। साथ ही सुरक्षा के अभाव में प्रतिदिन शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है जिसको लेकर आम जनों में भारी रोष व्याप्त है।
स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मातागढ़ तुरतुरिया के संचालन के लिए एक वैधानिक एवं पारदर्शी समिति या प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाए। साथ ही दान पेटी की आय का नियमित ऑडिट, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि इस महत्वपूर्ण धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल का समुचित विकास हो सके।





















