25 हजार स्थानों पर एक साथ हुआ सामूहिक गायन, बलौदाबाजार में भी दिखा राष्ट्रभक्ति का उत्साह
600 विद्यार्थियों के सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गायन से गूंजा सरस्वती शिशु मंदिर, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ आयोजन
बलौदाबाजार स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रभक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला। विद्यालय परिसर सुबह 11 बजे सामूहिक रूप से गाए गए ‘वंदे मातरम’ के स्वरों से गूंज उठा। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के निर्देशानुसार देशभर के सरस्वती शिशु मंदिरों और विद्या भारती से संबद्ध विद्यालयों में आयोजित इस अभियान में बलौदाबाजार के विद्यालय ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के करीब 600 छात्र-छात्राओं ने एक साथ संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। एक ही समय और एक ही स्वर में विद्यार्थियों के गायन से पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
एक साथ गूंजे देशभक्ति के स्वर
सुबह 11 बजे जैसे ही सामूहिक गायन शुरू हुआ, विद्यालय परिसर में मौजूद विद्यार्थी, शिक्षक, अतिथि और नागरिक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन के साथ संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। आयोजकों के अनुसार, यह अभियान देशभर में एक साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और आम नागरिकों में राष्ट्रभक्ति, मातृभूमि के प्रति समर्पण तथा राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत करना था।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ आयोजन
आयोजकों के मुताबिक देशभर में 25 सितंबर को लगभग 25 हजार स्थानों पर सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गायन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस व्यापक अभियान को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मान्यता मिलने की जानकारी कार्यक्रम के दौरान दी गई। बलौदाबाजार के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भी इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखने को मिला। अतिथियों ने इसे विद्यार्थियों के लिए गौरव का अवसर बताते हुए उन्हें बधाई दी।
कार्यक्रम में मौजूद रहे ये अतिथि
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त डॉ. जय नारायण केसरवानी मौजूद रहे। अध्यक्षता विजय केसरवानी ने की। मुख्य वक्ता के रूप में नोडल अधिकारी जीवन लाल कोसले उपस्थित रहे। इसके अलावा विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के सचिव रामनारायण कोसले, नीलम सोनी, शिव शंकर अग्रवाल, समन्वयक कमलेश ध्रुव, अनामिका, पूर्व प्राचार्य रमेश शर्मा और मनीष बनशाल सहित कई गणमान्य नागरिक एवं विभिन्न विद्यालयों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
‘वंदे मातरम’ के इतिहास पर डाला प्रकाश
मुख्य वक्ता जीवन लाल कोसले ने विद्यार्थियों को ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि यह गीत ब्रिटिश शासन के खिलाफ चले स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। उन्होंने विद्यार्थियों से देश की एकता, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
‘नमामि भारतम’ पर सांस्कृतिक प्रस्तुति
सामूहिक गायन के साथ विद्यालय में ‘नमामि भारतम’ विषय पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की संस्कृति और राष्ट्रभावना को प्रदर्शित किया। आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से भी जुड़ा हुआ रहा, जिसके चलते कार्यक्रम में उनके विचारों और योगदान का भी स्मरण किया गया।
प्राचार्या ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्राचार्या राजेश्वरी सोनी ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, मुख्य वक्ता, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन अनुपा चंद्राकर ने किया। बलौदाबाजार में आयोजित इस सामूहिक गायन कार्यक्रम में करीब 600 विद्यार्थियों की सहभागिता ने विद्यालय परिसर को राष्ट्रभक्ति के स्वरों से भर दिया। देशभर में एक साथ आयोजित अभियान से जुड़कर विद्यार्थियों ने सामूहिकता और राष्ट्रीय चेतना का संदेश दिया।






























