जादू-मंतर से पैसा कई गुना करने का झांसा: पिता-पुत्र ने 5 लाख की ठगी की, पलारी पुलिस ने दबोचा..

जादू-मंतर से पैसा कई गुना करने का झांसा: पिता-पुत्र ने 5 लाख की ठगी की, पलारी पुलिस ने दबोचा..

बलौदाबाजार। आसान पैसे का लालच और अंधविश्वास एक बार फिर ठगी का जरिया बना। जादू-मंतर से पैसा कई गुना बढ़ाने का प्रलोभन देकर दो लोगों से कुल 5 लाख रुपये ठगने वाले पिता-पुत्र को थाना पलारी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों पर आरोप है कि वे घर-घर जाकर लोगों को झांसे में लेते थे, नकद रकम ऐंठते थे और जब पीड़ित पैसे वापस मांगते तो जान से मारने की धमकी देते थे।
दो अलग-अलग मामलों में दर्ज शिकायतों के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 452/2025 और 454/2025 में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान आरोपियों को ग्राम धौराभाठा, थाना खरोरा, जिला रायपुर से हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने अपराध स्वीकार किया। उनके कब्जे से एक मोबाइल फोन और 5,000 रुपये नकद जब्त किए गए हैं।

पहला मामला: 3 लाख रुपये “डबल” करने का दावा

पहले प्रकरण में ग्राम बलौदी निवासी नोहर यादव (57 वर्ष) ने आवेदन देकर बताया कि वर्ष 2022 में आरोपी पिता-पुत्र उसके घर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि विशेष जादू-मंतर और अनुष्ठान से रकम को कई गुना किया जा सकता है। भरोसा जीतने के बाद 18 अक्टूबर 2022 को 3 लाख रुपये नकद ले लिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो कोई “चमत्कार” हुआ और न ही पैसा लौटाया गया। जांच के बाद थाना पलारी में अपराध क्रमांक 452/2025, धारा 420, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया और विवेचना शुरू हुई।

दूसरा मामला: 2 लाख लेकर धमकियां

दूसरे प्रकरण में ग्राम रामपुर निवासी पराग कटियार ने शिकायत दर्ज कराई कि 2 नवंबर 2022 को आरोपियों ने जादू-मंतर से पैसा कई गुना करने का लालच देकर 2 लाख रुपये नकद ले लिए। जब पीड़ित ने रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। इस पर अपराध क्रमांक 454/2025, धारा 420, 506, 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया। दोनों मामलों में समान पैटर्न सामने आया—घर पर संपर्क, चमत्कार का दावा, नकद लेन-देन, और फिर टालमटोल या धमकी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने थाना प्रभारी पलारी को आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। टीम ने तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की। दबिश देकर दीनदयाल जांगड़े (66 वर्ष) और पुरुषोत्तम जांगड़े (35 वर्ष) को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे “पैसा डबल” करने के नाम पर लोगों को लालच देते थे और नकद वसूली करते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों से एक मोबाइल और 5,000 रुपये नकद जब्त किए गए हैं। दोनों को 18 फरवरी 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है।

आरोपी कौन हैं

1. दीनदयाल जांगड़े, 66 वर्ष, निवासी ग्राम धौराभाठा, थाना खरोरा, जिला रायपुर
2. पुरुषोत्तम जांगड़े, 35 वर्ष, निवासी ग्राम धौराभाठा, थाना खरोरा, जिला रायपुर

पुलिस इनके आपराधिक इतिहास और अन्य जिलों में संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है। आशंका है कि इसी तरह की ठगी अन्य जगहों पर भी की गई हो सकती है।

कैसे काम करता था गिरोह

जांच में सामने आया कि आरोपी पहले स्थानीय स्तर पर पहचान बनाते थे, फिर निजी बातचीत में “गुप्त विधि” का हवाला देकर चमत्कार का भरोसा दिलाते थे। वे अक्सर कहते थे कि सीमित समय में रकम कई गुना हो जाएगी। नकद लेने पर कोई लिखित दस्तावेज नहीं देते थे। बाद में फोन उठाना बंद कर देते या पैसे मांगने पर धमकाते थे। इस तरह पीड़ित शर्म और डर के कारण लंबे समय तक शिकायत नहीं कर पाते थे।

अंधविश्वास और लालच: ठगी का ईंधन

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी ठगी दो चीजों पर टिकी होती है—आसान मुनाफे की चाह और चमत्कार में विश्वास। अपराधी इन्हीं भावनाओं का फायदा उठाते हैं। ग्रामीण इलाकों में नकद लेन-देन और निजी भरोसे का दुरुपयोग कर वे जल्दी रकम ऐंठ लेते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि “पैसा डबल”, “चमत्कारी विधि”, “गुप्त अनुष्ठान” जैसे दावों से सावधान रहें। कोई भी वैध निवेश या बैंकिंग प्रक्रिया जादू-मंतर से नहीं चलती।

कानूनी पहलू

दोनों मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 506 (आपराधिक धमकी) और 34 (समान आशय) के तहत कार्रवाई की गई है। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा का प्रावधान है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्य मजबूत किए जा रहे हैं ताकि न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ ठोस प्रस्तुति दी जा सके।

पीड़ितों के लिए संदेश

पुलिस ने कहा है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति से भी इसी तरह की ठगी हुई हो, तो वे आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं। देर से शिकायत करने पर भी कानून मदद करता है। नकद लेन-देन से जुड़ी जानकारी, कॉल रिकॉर्ड, गवाह और संदेश जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखें।

पलारी पुलिस की कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अंधविश्वास के नाम पर ठगी करने वालों के लिए जगह नहीं है। आसान मुनाफे का लालच अक्सर भारी नुकसान में बदल जाता है। जागरूकता और समय पर शिकायत ही ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने का सबसे असरदार तरीका है। जिले में यह कार्रवाई एक मजबूत संदेश है—जादू-मंतर से नहीं, कानून से हिसाब होगा।

 

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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