भाटापारा में माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण, युवाओं और महिला समूहों के लिए बड़ा अवसर

बलौदाबाजार वनमण्डल में ‘युवान’ पहल: प्रकृति से जुड़कर ग्रीन लीडर बनने की ओर बढ़ रहे युवा (Chhattisgarh Talk)
बलौदाबाजार वनमण्डल में ‘युवान’ पहल: प्रकृति से जुड़कर ग्रीन लीडर बनने की ओर बढ़ रहे युवा (Chhattisgarh Talk)

भाटापारा में माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस फूड प्रोसेसिंग प्रशिक्षण, युवाओं और महिला समूहों के लिए बड़ा अवसर तीन-तीन दिन के दो बैचों में होगा प्रशिक्षण, नई तकनीक, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की मिलेगी जानकारी, निशुल्क प्रशिक्षण के बाद मिलेगा प्रमाण पत्र और उद्यम पंजीयन की सुविधा

बलौदा बाजार। वन उपज आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भाटापारा में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस फूड प्रोसेसिंग विषय पर यह सेक्टर स्पेसिफिक ट्रेनिंग प्रोग्राम स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत सरकार की रैंप योजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें उद्योग क्षेत्र से जुड़े संस्थान मिलकर प्रतिभागियों को व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण देंगे। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन रायपुर और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज हैदराबाद के सहयोग से किया जा रहा है। प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा में किया जाएगा, जहां प्रतिभागियों को वन उपज से जुड़े विभिन्न उत्पादों के प्रसंस्करण और व्यवसाय विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

दो बैचों में होगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो बैचों में आयोजित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। पहला बैच तीन दिनों तक चलेगा, जबकि दूसरा बैच भी तीन दिन का होगा। दोनों बैचों में प्रशिक्षण का समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वन उपज आधारित उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।

वन उपज से बने उत्पादों की मिलेगी जानकारी

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस यानी लघु वनोपज को बेहतर तरीके से उपयोग में लाकर उससे आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को यह बताया जाएगा कि जंगलों से मिलने वाली विभिन्न प्राकृतिक उपज जैसे बीज, फल, जड़ी-बूटियां और अन्य उत्पादों को कैसे प्रोसेस करके बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त की जा सकती है। विशेषज्ञ प्रतिभागियों को नई तकनीकों के बारे में जानकारी देंगे, जिससे वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके टिकाऊ और लाभकारी व्यवसाय शुरू कर सकें।

मशीनरी और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण

कार्यक्रम में फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी मशीनरी और आधुनिक उपकरणों के उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को बताया जाएगा कि किस तरह छोटी मशीनों और सीमित संसाधनों के माध्यम से भी गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिला समूहों को कम लागत में उद्यम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर भी फोकस

सिर्फ उत्पाद बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम में ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञ बताएंगे कि किस तरह आकर्षक पैकेजिंग और सही ब्रांडिंग से उत्पाद की बाजार में पहचान बनाई जा सकती है। साथ ही प्रतिभागियों को आवश्यक सर्टिफिकेशन और बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी। यह जानकारी खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगी जो अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे बढ़ाकर बड़े बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं।

महिला समूह और युवाओं के लिए अवसर

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में फूड प्रोसेसिंग और माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस से जुड़े उद्यमी, महिला उद्यमी, स्व सहायता समूह और युवा साथी भाग ले सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिला समूह पहले से ही वन उपज से जुड़े कार्य करते हैं, लेकिन तकनीकी जानकारी और मार्केटिंग की कमी के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और विपणन के बारे में जानकारी मिलेगी, जिससे वे अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार में प्रस्तुत कर सकेंगी।

पूरी तरह निशुल्क है प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह निशुल्क रखा गया है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी इसमें आसानी से भाग ले सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा इच्छुक प्रतिभागियों का उद्यम पंजीयन भी निशुल्क कराया जाएगा, जिससे वे औपचारिक रूप से अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।

पंजीयन के लिए जरूरी दस्तावेज

प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए इच्छुक प्रतिभागियों को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचकर पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी जैसे आवश्यक दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य होगा। इनमें आधार कार्ड को विशेष रूप से जरूरी बताया गया है। अधिक जानकारी के लिए 75661 95551 इच्छुक व्यक्ति दिए गए संपर्क नंबर पर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके उत्पाद तैयार किए जाते हैं, तो इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

स्वरोजगार की दिशा में मजबूत कदम

कुल मिलाकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं, महिला समूहों और छोटे उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। वन उपज से जुड़े उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जानकारी मिलने से प्रतिभागी अपने स्तर पर छोटे उद्योग शुरू कर सकते हैं। यदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ अधिक से अधिक लोग उठाते हैं, तो आने वाले समय में क्षेत्र में वन आधारित उद्यमिता को नई पहचान मिल सकती है और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

 

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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