पंद्रहा साल की उम्र में त्यागा था घर, जन्मभूमि लौटेंगी जैन साध्वियां,राजेंद्र स्टील से निकलेगा भव्य मंगल प्रवेश
साध्वी विराज ज्योति ने परिवार धन-संपत्ति और सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम, तप, अहिंसा, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह का मार्ग अपनाया।
रामकुमार भारद्वाज कोण्डागांव :- नगर के बुरड़ परिवार की सुपुत्री एवं स्वर्गीय रानूलाल बुरड़ की पुत्री साध्वी विराग ज्योति श्रीजी म.सा., साध्वी विश्व ज्योति श्रीजी म.सा. एवं साध्वी जिनज्योति श्रीजी म.सा. का 19 जुलाई को कोण्डागांव में भव्य मंगल प्रवेश होगा। इनमें विराग ज्योति श्रीजी एवं विश्व ज्योति श्रीजी 42 वर्षों बाद अपनी जन्मभूमि लौट रही हैं। इसे लेकर जैन समाज में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है तथा स्वागत की जोरदार तैयारियां चल रही हैं।
जानकारी के अनुसार साध्वी विराग ज्योति श्रीजी एवं साध्वी विश्व ज्योति श्रीजी ने मात्र 15 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन का त्याग कर 19 मार्च 1984 को महाराष्ट्र के शाहदा में जैन दीक्षा ग्रहण की थी। दीक्षा के साथ ही उन्होंने परिवार, धन-संपत्ति और सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संयम, तप, अहिंसा, ब्रह्मचर्य एवं अपरिग्रह का मार्ग अपनाया। तब से वे पैदल विहार करते हुए धर्म प्रचार, स्वाध्याय, तप और साधना में निरंतर रत हैं तथा अत्यंत सादा एवं अनुशासित जीवन व्यतीत कर रही हैं।
रविवार 19 जुलाई को सुबह 8 बजे राजेंद्र स्टील से भव्य मंगल प्रवेश यात्रा प्रारंभ होगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्री जैन श्वेताम्बर दादाबाड़ी पहुंचेगी। यात्रा में बैंड-बाजे, धार्मिक जयघोष और पुष्पवर्षा के साथ साध्वी श्री का स्वागत किया जाएगा। समाज के महिला, पुरुष एवं युवा सदस्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
मंगल प्रवेश के बाद तीनों साध्वी श्री का चार माह का वर्षावास कोण्डागांव में रहेगा। इस दौरान प्रतिदिन धर्मसभा, प्रवचन, स्वाध्याय, तप-आराधना एवं अन्य धार्मिक आयोजन होंगे, जिनका लाभ श्रद्धालु प्राप्त करेंगे।
जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि कोण्डागांव की कुलदीपिकाओं का 42 वर्षों बाद नगर आगमन पूरे जिले के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंगल प्रवेश एवं वर्षावास कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।























