पूरक परीक्षा के दौरान केंद्राध्यक्ष मिलीं नदारद, कलेक्टर के निरीक्षण में खुली लापरवाही; कारण बताओ नोटिस जारी
परीक्षा केंद्र से गायब थीं केंद्राध्यक्ष, कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई
प्राचार्य का दावा- “इलाज कराने गई थी”, वायरल वीडियो और अनुपस्थिति पर उठे सवाल
बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड द्वितीय अवसर (पूरक) परीक्षा के दौरान बलौदाबाजार के एक परीक्षा केंद्र में सामने आई कथित लापरवाही ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। जिला मुख्यालय स्थित पंडित चक्रपाणि मल्टीपरपज स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय की केंद्राध्यक्ष एवं प्राचार्य वंदनी दीक्षित श्रीवास्तव परीक्षा के दौरान अपने केंद्र से अनुपस्थित पाई गईं। मामला उस समय सामने आया जब कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर की आपत्ति के बाद जिला शिक्षा अधिकारी संदीप शर्मा ने केंद्राध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्था की पोल
17 जुलाई 2026 को कलेक्टर कुलदीप शर्मा जिला शिक्षा अधिकारी संदीप शर्मा के साथ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय पहुंचे। यहां वे विद्यालय में संचालित गतिविधियों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान जानकारी मिली कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं बोर्ड की द्वितीय अवसर (पूरक) परीक्षा भी इसी केंद्र में संचालित हो रही है। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि परीक्षा केंद्र की केंद्राध्यक्ष वंदनी दीक्षित श्रीवास्तव अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं। परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान केंद्राध्यक्ष की अनुपस्थिति को कलेक्टर ने गंभीर माना और तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि परीक्षा अवधि के दौरान केंद्राध्यक्ष परीक्षा केंद्र की सर्वोच्च उत्तरदायी अधिकारी होती हैं। उनकी उपस्थिति परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता और प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य होती है। नोटिस के अनुसार, केंद्राध्यक्ष की अनुपस्थिति से परीक्षा संचालन प्रभावित होने की संभावना बनी, जो शासकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और कर्तव्यहीनता को दर्शाता है। इसी आधार पर इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत आचरण मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
3 दिन में मांगा गया जवाब
जिला शिक्षा अधिकारी ने केंद्राध्यक्ष को निर्देश दिया है कि नोटिस प्राप्त होने के तीन दिवस के भीतर वे स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत करें कि परीक्षा अवधि में वे केंद्र से अनुपस्थित क्यों थीं तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होता अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस नोटिस की प्रतिलिपि लोक शिक्षण संचालनालय, कलेक्टर कार्यालय, संयुक्त संचालक शिक्षा रायपुर संभाग तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई है।
प्राचार्य ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर मीडिया रिपोर्टर ने केंद्राध्यक्ष वंदनी दीक्षित श्रीवास्तव से बातचीत की। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के कारण कुछ शिक्षक उनसे नाराज हैं और उसी का परिणाम यह पूरा मामला है। उन्होंने कहा कि वे पिछले 45 वर्षों से सेवा में हैं और लगभग 15 वर्षों से इस विद्यालय में कार्यरत हैं। उनके अनुसार उनके कार्यकाल में विद्यालय का अनुशासन मजबूत हुआ है और शैक्षणिक परिणामों में भी सुधार आया है। उन्होंने यह भी कहा कि निरीक्षण के समय उनकी तबीयत खराब थी और वे उपचार कराने डॉक्टर के पास गई थीं।
वायरल वीडियो पर भी उठे सवाल
इसी बीच एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर परीक्षा अवधि के दौरान वंदनी श्रीवास्तव किसी कार्यक्रम या पार्टी में दिखाई दे रही हैं। जब इस संबंध में उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे इलाज के लिए गई थीं और अपने ऊपर लगाए जा रहे अन्य आरोपों को सही नहीं माना। फिलहाल इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच में इसकी भी पड़ताल की जा सकती है।
शिक्षा विभाग में बढ़ी सख्ती
परीक्षा के दौरान केंद्राध्यक्ष की अनुपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड परीक्षाओं में केंद्राध्यक्ष की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनकी जिम्मेदारी परीक्षा की गोपनीयता, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं के संधारण तथा संपूर्ण परीक्षा व्यवस्था की निगरानी करना होता है। ऐसे में परीक्षा के दौरान केंद्र से अनुपस्थित पाए जाने को विभाग ने गंभीर प्रशासनिक चूक माना है।
जांच के बाद होगा अंतिम फैसला
फिलहाल पूरा मामला विभागीय जांच के अधीन है। अब सभी की नजर केंद्राध्यक्ष द्वारा दिए जाने वाले जवाब और जिला शिक्षा अधिकारी की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक पाया जाता है तो विभाग नियमानुसार निर्णय लेगा। वहीं यदि जवाब असंतोषजनक रहा या आरोप सही पाए गए तो उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। बलौदाबाजार में सामने आया यह मामला एक बार फिर परीक्षा केंद्रों में जवाबदेही और प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़ा करता है। बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील आयोजन में छोटी सी लापरवाही भी पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में अब यह जांच तय करेगी कि यह केवल परिस्थितिजन्य अनुपस्थिति थी या वास्तव में शासकीय दायित्वों की अनदेखी।
चंदू वर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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