बलौदाबाजार के लटुवा में दो मरीजों की पर्चियों पर लिखी मिली NRX ‘Librex’ दवा, ड्रग इंस्पेक्टर ने कहा- यह मेरे कार्यक्षेत्र का मामला नहीं, मेडिकल स्टोर संचालक ने पर्ची अपनी होने की बात स्वीकार की, लेकिन दवा लिखने से किया इनकार; CMHO राजेश अवस्थी ने BMO से जांच कराने का दिया आश्वासन
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़: बलौदाबाजार जिले के लटुवा गांव में मरीजों को लिखी जा रही NRX श्रेणी की ‘Librex’ दवा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में सामने आई दो अलग-अलग मरीजों की पर्चियों पर लटुवा के दो मेडिकल स्टोर के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। जब इस संबंध में मीडियाकर्मियों ने ड्रग इंस्पेक्टर प्रिया ठाकुर से जानकारी मांगी, तो उन्होंने इसे अपने कार्यक्षेत्र का मामला नहीं बताते हुए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करने की बात कही। वहीं, एक मेडिकल स्टोर संचालक ने पर्ची अपनी होने की बात स्वीकार की, लेकिन दवा लिखने और उसे अपने स्टोर में रखने से इनकार किया। मामला CMHO राजेश अवस्थी तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच कराने का आश्वासन दिया है। खास बात यह है कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का प्रभारी जिला है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सामने आई शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है, इस पर लोगों की नजर रहेगी।
दो अलग-अलग मरीजों की पर्चियों पर ‘Librex’ का उल्लेख
मामले में सामने आई पर्चियों के अनुसार, डॉ. अलख राम कन्नौजे के नाम से जारी पर्चियों पर ‘Librex’ दवा का उल्लेख दिखाई देता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि ऐसी दवा दो अलग-अलग मरीजों को लिखी गई है। पर्चियों पर लटुवा के विकास मेडिकल स्टोर और साहू मेडिकल स्टोर का विवरण भी दर्ज है।
पहली पर्ची पर विकास मेडिकल स्टोर, मेन रोड, लटुवा, मोबाइल नंबर 6263775888 लिखा है। उसी पर्ची के दूसरी ओर, दूसरी पर्ची पर साहू मेडिकल स्टोर, रामगुड़ी चौक, लटुवा, मोबाइल नंबर 9617056208 का विवरण दर्ज है।

इन पर्चियों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि दवा किसने लिखी, पर्चियों पर मेडिकल स्टोर का विवरण किस उद्देश्य से दर्ज किया गया और संबंधित दवा की आपूर्ति कहां से हुई। इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों, दवा के पैकेट, बिक्री रिकॉर्ड और सक्षम अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
ड्रग इंस्पेक्टर प्रिया ठाकुर ने क्या कहा?
मामले को लेकर मीडियाकर्मियों ने ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका ध्रुव से संपर्क कर जानकारी मांगी। मीडियाकर्मियों के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह मामला उनके कार्यक्षेत्र का नहीं है और इस संबंध में वह कुछ नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि उनका काम मेडिकल स्टोर से संबंधित है और मामले में स्वास्थ्य विभाग से बातचीत की जानी चाहिए।
ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका ध्रुव के इस कथन के बाद यह सवाल उठता है कि जब किसी पर्ची पर दवा का नाम और मेडिकल स्टोर का विवरण दर्ज हो, तो दवा की पहचान, उसके नियमानुसार भंडारण और बिक्री तथा उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के लिए किस विभाग की क्या जिम्मेदारी होगी।
हालांकि, किसी दवा को लिखने की वैधानिकता और मेडिकल स्टोर में उसके भंडारण या बिक्री से जुड़े पहलू अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए मामले की पूरी जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ जरूरत के अनुसार औषधि नियंत्रण विभाग की भूमिका भी स्पष्ट होना जरूरी है।
मेडिकल स्टोर संचालक ने कहा- पर्ची मेरी है, लेकिन मैंने नहीं लिखी
मीडियाकर्मियों ने लटुवा के साहू मेडिकल स्टोर, रामगुड़ी चौक के संचालक ढालेन्द्र कुमार साहू से भी बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कथित तौर पर संबंधित पर्ची को अपने मेडिकल स्टोर की पर्ची स्वीकार किया, लेकिन कहा कि इसे उन्होंने स्वयं नहीं लिखा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘Librex’ दवा अपने मेडिकल स्टोर में नहीं रखते।
जब उनसे पूछा गया कि यदि पर्ची उनकी दुकान की है, तो उस पर दवा किसने लिखी और पर्ची दूसरे व्यक्ति तक कैसे पहुंची? तब उनके हवाले से बताया गया कि वह स्वयं प्रैक्टिस नहीं करते, लेकिन गांव में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों को उन्होंने अपनी पर्चियां दी हैं।
मीडियाकर्मियों ने आगे पूछा कि उन्होंने पर्चियां किन-किन लोगों को दी हैं? इस पर संचालक ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने कई लोगों को पर्चियां दी हैं।
इस बातचीत के बाद मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। यदि किसी मेडिकल स्टोर की पर्ची का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मरीजों को दवा लिखने के लिए किया जा रहा है, तो यह जांच का विषय है कि पर्चियां किसे, किस उद्देश्य से और किन परिस्थितियों में दी गई थीं। हालांकि, केवल बातचीत के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण नहीं किया जा सकता।
संचालक का कहना है कि उन्होंने संबंधित दवा नहीं लिखी और न ही उसे अपने स्टोर में रखते हैं। उनके इस बयान की पुष्टि के लिए पर्ची, दवा के स्रोत और उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी है।
CMHO राजेश अवस्थी ने जांच कराने का दिया आश्वासन
मीडियाकर्मियों ने मामले की जानकारी जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) राजेश अवस्थी को भी दी। उनके अनुसार, उन्होंने बताया कि यह दवा सामान्यतः MBBS डॉक्टर लिख सकता है और मेडिकल स्टोर में भी रखी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी झोलाछाप डॉक्टर इस तरह की दवा नहीं लिख सकता। CMHO ने मामले की जांच कराने की बात कहते हुए बताया कि वह संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) को जांच के लिए निर्देशित करेंगे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन, पर्चियों की वास्तविकता, दवा के घटक और उसकी नियामकीय श्रेणी तथा मेडिकल स्टोर से जुड़े रिकॉर्ड की किस तरह पुष्टि की जाती है।
‘Librex’ नाम के आधार पर ही दवा की सटीक कानूनी श्रेणी निर्धारित करना उचित नहीं होगा। इसके लिए दवा के वास्तविक पैकेट, निर्माता, घटकों और लागू नियमों की जांच जरूरी है। इसी तरह, दवा लिखने के अधिकार का निर्धारण संबंधित व्यक्ति की योग्यता, पंजीयन और दवा पर लागू नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी नजरें
इस मामले में अब तक सामने आए तथ्यों में दो अलग-अलग मरीजों की पर्चियां, मेडिकल स्टोर का विवरण, संचालक का कथित बयान और CMHO द्वारा जांच का आश्वासन शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने पहले भी संबंधित चिकित्सकीय गतिविधियों की जांच की मांग की थी।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि वह केवल औपचारिक जांच तक सीमित न रहे, बल्कि पर्चियों की प्रमाणिकता, दवा की वास्तविक पहचान और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करे। जरूरत पड़ने पर औषधि नियंत्रण विभाग से भी समन्वय स्थापित किया जाए।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के जिले में यह मामला ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और आम मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, अभी किसी अधिकारी या संबंधित व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं हुई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दो मरीजों की पर्चियों पर एक ही दवा का उल्लेख और मेडिकल स्टोर का विवरण सामने आया है, तो दवा किसने लिखी, उसका स्रोत क्या था और क्या सभी नियमों का पालन हुआ? इन सवालों का स्पष्ट जवाब CMHO द्वारा कराई जाने वाली जांच और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही सामने आ सकेगा। अब देखना होगा कि BMO की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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