महासमुंद में नकली पनीर पर प्रशासन का शिकंजा: वैद्य फूड्स का पनीर असुरक्षित, फैक्ट्री और पूरा परिसर सील

महासमुंद में नकली पनीर पर प्रशासन का शिकंजा: वैद्य फूड्स का पनीर असुरक्षित, फैक्ट्री और पूरा परिसर सील
महासमुंद में नकली पनीर पर प्रशासन का शिकंजा: वैद्य फूड्स का पनीर असुरक्षित, फैक्ट्री और पूरा परिसर सील
महासमुंद में नकली पनीर पर प्रशासन का शिकंजा: वैद्य फूड्स का पनीर असुरक्षित, फैक्ट्री और पूरा परिसर सील
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की सघन कार्रवाई, सैंपल फेल होने के बाद नष्ट कराया गया खाद्य पदार्थ
महासमुंद: दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने महासमुंद जिले में कार्रवाई तेज कर दी है। एनालॉग पनीर पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जिलेभर में लगातार जांच और सैंपलिंग की जा रही है। इसी कार्रवाई के दौरान महासमुंद शहर स्थित वैद्य फूड्स से लिए गए पनीर का नमूना जांच में असुरक्षित पाया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित खाद्य पदार्थ को नियमानुसार नष्ट कराया और फैक्ट्री सहित पूरे परिसर को सील करने की कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के बाद दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर जिले में हड़कंप मच गया है। वहीं खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

एनालॉग पनीर पर विभाग की नजर

आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं कलेक्टर विनय कुमार लगेह के मार्गदर्शन पर जिले में एनालॉग पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभिहित अधिकारी उमेश वर्मा के मार्गदर्शन में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें अलग-अलग प्रतिष्ठानों में पहुंचकर पनीर, पेड़ा और अन्य दूध से बने खाद्य पदार्थों के नमूने ले रही हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। इसी अभियान के तहत वैद्य फूड्स, महासमुंद से पनीर का नमूना लिया गया था। प्रयोगशाला जांच में यह नमूना असुरक्षित पाए जाने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।

रिपोर्ट आई तो फैक्ट्री पर हुई कार्रवाई

वैद्य फूड्स के पनीर की जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने संबंधित खाद्य पदार्थ को नियमानुसार नष्ट कराया। इसके साथ ही संबंधित फैक्ट्री और पूरे परिसर को सील कर दिया गया। विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में गंभीर खामी मिलने पर केवल सैंपल जब्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमानुसार आगे की प्रवर्तन कार्रवाई भी की जाएगी।

कई प्रतिष्ठानों के सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार

इस महीने खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिले के अलग-अलग इलाकों से पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों के नमूने लिए हैं। इनमें से कई नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है। क्षीरसागरम स्वीट्स, सरायपाली से पनीर और पेड़ा के नमूने लिए गए हैं। वहीं यश फैमिली रेस्टोरेंट, बागबाहरा से पनीर और हर्षद मिष्ठान से पेड़ा का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट फिलहाल लंबित है। इसके अलावा कश्यप ऑर्गेनिक, बसना से लिए गए पनीर और दही के नमूने अवमानक पाए गए हैं।

असुरक्षित और अवमानक में फर्क

खाद्य उत्पादों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर कार्रवाई करता है। वैद्य फूड्स का पनीर जांच में असुरक्षित पाया गया है, जबकि कश्यप ऑर्गेनिक से लिए गए पनीर और दही के नमूने अवमानक मिले हैं। अब संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आगे भी जारी रहेगी जांच

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में दूध और उससे बने उत्पादों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लंबित नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी उत्पाद में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।

उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी चेतावनी

दूध और उससे बने उत्पाद रोजमर्रा के खान-पान का हिस्सा हैं। ऐसे में पनीर, दूध, दही, पेड़ा और अन्य दुग्ध उत्पाद खरीदते समय उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। विभाग की लगातार सैंपलिंग और कार्रवाई का उद्देश्य बाजार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। आने वाले दिनों में भी जिले के अलग-अलग हिस्सों में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच जारी रहने की संभावना है। फिलहाल वैद्य फूड्स के पनीर के असुरक्षित पाए जाने और फैक्ट्री सील किए जाने की कार्रवाई ने जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संदेश दिया है। अब लंबित सैंपलों की रिपोर्ट पर नजर रहेगी, क्योंकि रिपोर्ट सामने आने के बाद यह तय होगा कि जिले में और कितने प्रतिष्ठान विभाग की कार्रवाई के दायरे में आते हैं।
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