कौन सच्चा कौन झूठा नेता की ग्रामीण बिजली खंभा और लाइट सप्लाई के लिए लाखों की चंदा वसूली 

कौन सच्चा कौन झूठा नेता की ग्रामीण बिजली खंभा और लाइट सप्लाई के लिए लाखों की चंदा वसूली 
कौन सच्चा कौन झूठा नेता की ग्रामीण बिजली खंभा और लाइट सप्लाई के लिए लाखों की चंदा वसूली 
कौन सच्चा कौन झूठा नेता की ग्रामीण बिजली खंभा और लाइट सप्लाई के लिए लाखों की चंदा वसूली
बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी क्षेत्र बिजली विस्तार के नाम पर राजनीतिक दल नेता द्वारा चंदा वसूली, फिर अंधेरे में पाढ़ादाह के ग्रामीण
 बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के सघन वनों के बीच बसा ग्राम पाढ़ादाह आज भी आधुनिक विकास की रोशनी से महरूम है। बिजली के खंभों और तारों का सपना देखकर अंधेरे से मुक्ति पाने की उम्मीद संजोए ग्रामीणों के साथ एक ऐसा छल हुआ है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय राजनीति की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​बिजली विस्तार के नाम पर एक स्थानीय राजनीतिक दल के पदाधिकारी द्वारा ग्रामीणों से कथित तौर पर 6 से 7 लाख रुपये ऐंठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भारी-भरकम राशि की वसूली के एक साल बीत जाने के बाद भी गांव की स्थिति जस की तस है—पाढ़ादाह आज भी पूरी तरह से अंधेरे के साए में डूबा हुआ है।

सपने बेचे, जमीन दांव पर लगवाई

​सेंचुरी क्षेत्र के कड़े नियमों और पेचीदा प्रक्रियाओं के कारण पाढ़ादाह में बिजली पहुंचना एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी लाचारी का फायदा उठाकर एक चतुर नेता ने ग्रामीणों को गांव-गांव, घर-घर जाकर बिजली सप्लाई और खंभे लगवाने का सपना दिखाया।

​उजाले की आस में आर्थिक तंगी झेल रहे ग्रामीणों ने जैसे-तैसे पैसा जुटाना शुरू किया:

  • प्रति परिवार योगदान: हर घर से 7,000 से 8,000 रुपये तक जुटाए गए।
  • सार्वजनिक संपत्ति की बलि: रकम पूरी करने के लिए गांव के फंड का पैसा तो इस्तेमाल हुआ ही, साथ ही ‘बरदीहा डोली’ नामक एक बहुमूल्य सार्वजनिक जमीन को भी दांव पर लगा दिया गया।

​सालों से अंधेरे का दंश झेल रहे सीधे-सादे ग्रामीणों ने अपने भविष्य की खातिर अपनी मेहनत की कमाई और गांव की साझी विरासत उस नेता के हाथों में सौंप दी।

कौन सच्चा, कौन झूठा? दावों और आरोपों की जंग

​सालों के लंबे इंतजार और नेताजी की गोलमोल बातों के बाद जब धरातल पर बिजली का एक तार तक नहीं बिछा, तब ग्रामीणों का सब्र टूट गया। अब यह मामला दावों और प्रति-दावों के बीच उलझकर रह गया है:

कानूनी कार्रवाई की तैयारी में आक्रोशित ग्रामीण

​अंधेरे और ठगी के दोहरे दंश से पीड़ित पाढ़ादाह के ग्रामीण अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, अब तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन गांव में आक्रोश की लहर दौड़ रही है। एकजुट होकर ग्रामीण अब अपने पास मौजूद साक्ष्यों और बैंक लेन-देन/चंदे के विवरणों को एकत्रित कर रहे हैं। जल्द ही प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस स्टेशन में इस कथित वित्तीय अनियमितता के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराने की रणनीति बनाई जा  रही है।

सुलगते सवाल: क्या लौटेगी रोशनी या डूबेगी गाढ़ी कमाई?

​इस पूरे प्रकरण ने सेंचुरी क्षेत्र के विकास और राजनीतिक शुचिता की पोल खोलकर रख दी है:

  1. सेंचुरी नियमों का पेच: जब वाइल्ड लाइफ सेंचुरी क्षेत्र में विद्युत विस्तार के नियम बेहद कड़े हैं, तो किसी राजनीतिक व्यक्ति को इतनी बड़ी राशि एकत्र करने का अधिकार किसने दिया?
  2. प्रशासन की चुप्पी: लाखों रुपये का लेन-देन हो गया और गांव की सार्वजनिक जमीन दांव पर लग गई, क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी?
  3. गाढ़ी कमाई का क्या होगा: क्या ग्रामीणों को उनका पैसा वापस मिलेगा या फिर विभाग नियम शिथिल करके गांव में सचमुच बिजली पहुंचाएगा?

​दूध का दूध और पानी का पानी निष्पक्ष प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या पाढ़ादाह के ग्रामीणों की बदहाली दूर होगी या यह मामला भी राजनीति की भेंट चढ़कर फाइलों में दफन हो जाएगा?

विद्युत विभाग और प्रशासन का अगला कदम क्या होगा? क्या नेताजी की सफाई में दम है या यह सीधे-साधे ग्रामीणों से धोखाधड़ी का बड़ा षड्यंत्र? पढ़िए हमारी विशेष पड़ताल, अगले अंक में…

error: Content is protected !!