8 मौतें, एक गांव और एक ‘साइको किलर’! खर्वे हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा, शराब में जहर मिलाकर चुन-चुनकर मारता रहा अपने ही परिचितों को
चार महीने में 8 मौतों से दहला था गांव, कब्र से निकाले गए शवों ने खोला मौत का राज…पुलिस पूछताछ में टूटा आरोपी, बोला- छोटी-छोटी रंजिशों का ले रहा था बदला…पहले कुत्ते पर किया जहर का ट्रायल, फिर एक-एक कर गांव वालों को बनाया शिकार
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले का छोटा सा गांव खर्वे पिछले चार महीनों से मौत के साए में जी रहा था। गांव में एक के बाद एक आठ लोगों की मौत हो रही थी। हर मौत के बाद कुछ दिन चर्चा होती, फिर मामला शांत हो जाता। लेकिन जब मौतों का सिलसिला थमा नहीं और संख्या आठ तक पहुंच गई तो गांव वालों को शक होने लगा कि यह सामान्य मौत नहीं है। गांव में दहशत का माहौल था। लोग एक-दूसरे से पूछ रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि लगातार लोग मरते जा रहे हैं। इसी बीच ग्रामीणों ने पुलिस के सामने जो आशंका जताई, उसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव का ही एक व्यक्ति शराब में जहर मिलाकर लोगों को पिला रहा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और जो सच सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया।
कब्र से निकाले गए शव, शुरू हुई सबसे बड़ी जांच
ग्रामीणों के आवेदन के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। सात मृतकों के शवों को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए रायपुर भेजा गया। एक मृतक का पहले ही दाह संस्कार किया जा चुका था। शव उत्खनन की कार्रवाई ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस गांव की ओर खींच लिया। पुलिस, प्रशासन और फोरेंसिक टीम लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी रही। इसी दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर गांव के ही निवासी रामसहाय जायसवाल को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
पुलिस पूछताछ में टूटा आरोपी
बलौदाबाजार पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने ChhattisgarhTalk.com से विशेष बातचीत में बताया कि शुरुआत में आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। वह हर सवाल का जवाब बड़ी चालाकी से देता था और खुद को निर्दोष बताता था। लेकिन पुलिस ने जब घटनाओं की कड़ियां जोड़कर वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर पूछताछ की तो आखिरकार आरोपी टूट गया और उसने पूरा अपराध कबूल कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने शराब में सुहागा नामक जहरीला पदार्थ मिलाकर लोगों को पिलाया, जिससे उनकी मौत हो गई।
कौन है रामसहाय जायसवाल?
46 वर्षीय रामसहाय जायसवाल गांव का ही रहने वाला है। बाहरी तौर पर वह सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी रहा था। गांव में लोगों के बीच उठना-बैठना था। यही वजह रही कि किसी को उस पर शक नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार उसके भीतर वर्षों से छोटी-छोटी बातों को लेकर गुस्सा और प्रतिशोध की भावना भरी हुई थी। वह उन लोगों से बदला लेना चाहता था जिनसे उसका विवाद हुआ था।
पहले कुत्ते पर किया ट्रायल
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने सबसे पहले जहर का परीक्षण एक कुत्ते पर किया था। उसने शराब में सुहागा मिलाकर कुत्ते को पिलाया। जब कुत्ते की मौत हो गई तो उसे यकीन हो गया कि यह तरीका काम करेगा और किसी को आसानी से शक भी नहीं होगा। यहीं से शुरू हुआ मौत का वह खेल जिसने पूरे गांव को दहला दिया।
पहला शिकार बना बद्री
6 फरवरी 2026 को आरोपी ने बद्री पटेल को शराब में जहर मिलाकर पिलाया। आरोपी के अनुसार बद्री अक्सर उससे गाली-गलौज करता था और शराब पिलाने के लिए परेशान करता था। जहर मिली शराब पीने के बाद बद्री की मौत हो गई। गांव वालों ने इसे सामान्य घटना समझा और किसी को कोई शक नहीं हुआ।
बढ़ता गया आत्मविश्वास
पहली घटना के बाद आरोपी का आत्मविश्वास बढ़ गया। उसे लगा कि वह बिना पकड़े किसी को भी मार सकता है। 20 फरवरी को उसने बुठालू साहू को निशाना बनाया। आरोपी के मुताबिक विधानसभा चुनाव के दौरान हुए विवाद और गाली-गलौज का बदला लेने के लिए उसने बुठालू को जहर मिली शराब पिलाई। कुछ ही समय बाद उसकी भी मौत हो गई।
पत्नी पर बुरी नजर का शक बना हत्या की वजह
12 मार्च को आरोपी ने छत्तुराम साहू को शराब में जहर मिलाकर दिया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे लगता था कि छत्तुराम उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता है। इसी शक के चलते उसने उसकी हत्या की योजना बनाई और उसे मौत के घाट उतार दिया।
जमीन विवाद में गई एक और जान
20 मार्च को बुदराम जायसवाल को भी आरोपी ने उसी तरीके से मौत के मुंह में धकेल दिया। जमीन के लेन-देन और सामाजिक विवाद को लेकर दोनों के बीच रंजिश थी। आरोपी ने मौका देखकर उसे भी जहर मिली शराब पिला दी।
गाली का बदला मौत से
31 मार्च को विनोद कुमार की मौत हुई। आरोपी ने पुलिस को बताया कि विनोद अक्सर उसे अपमानित करता था और गाली-गलौज करता था। बदला लेने के लिए उसने विनोद को भी शराब में जहर मिलाकर पिला दिया।
टोना-टोटका का अंधविश्वास
आरोपी ने गजानंद मांझी को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उसे शक था कि गजानंद उसके ऊपर बैगा-गुनिया और टोना-टोटका करता है। उसे लगता था कि इसी वजह से उसके जीवन में परेशानियां हैं और वह कर्ज से बाहर नहीं निकल पा रहा। अंधविश्वास ने एक और जान ले ली।
कर्ज से बचने के लिए हत्या
चैतूराम साहू ने आरोपी को 50 हजार रुपए उधार दिए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी ब्याज और कर्ज लौटाने से बचना चाहता था। इसलिए उसने चैतूराम को भी शराब में जहर मिलाकर मार दिया।
चुनावी विवाद का अंत मौत से
14 मई को महेतरू राम उसकी सूची का आखिरी शिकार बना। आरोपी ने बताया कि चुनाव के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ था और बाद में भी महेतरू उसे ताने मारता था। इसी बात का बदला लेने के लिए उसने उसे भी जहर दे दिया।
नौवां व्यक्ति बच गया
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कार्तिक नामक व्यक्ति को भी जहर मिली शराब पिलाई थी। लेकिन शराब पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसने उल्टी कर दी। समय रहते इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। यही वह कड़ी थी जिसने बाद में पूरे मामले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
किसी को शक न हो इसलिए अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था
पुलिस जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी खुद मृतकों को अस्पताल ले जाने में मदद करता था। इतना ही नहीं, कई मामलों में वह अंतिम संस्कार और कफन-दफन की प्रक्रिया में भी शामिल हुआ। इस वजह से गांव वालों को उस पर शक करने का मौका ही नहीं मिला।
एसपी ओमप्रकाश शर्मा ने क्या कहा
पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने ChhattisgarhTalk.com को कहा कि यह प्रदेश के सबसे जटिल मामलों में से एक था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, मानव खुफिया जानकारी और वैज्ञानिक जांच को मिलाकर काम किया। आरोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की गई, जिसके बाद उसने पूरा अपराध स्वीकार कर लिया। एसपी ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट अभी आना बाकी है, लेकिन आरोपी के बयान और अब तक मिले साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हैं।
गांव में डर और हैरानी
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद गांव में लोग हैरान हैं। जिन लोगों के साथ वह रोज बैठता था, उन्हीं को वह मौत का जहर पिला रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि गांव का ही एक व्यक्ति इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है।
प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल
खर्वे हत्याकांड अब छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो चुका है। एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से महीनों तक सुनियोजित तरीके से लोगों को जहर देकर मारने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी रामसहाय जायसवाल के खिलाफ आठ हत्या और एक हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। अब फोरेंसिक रिपोर्ट और न्यायालयीन प्रक्रिया इस पूरे मामले की अगली दिशा तय करेगी। लेकिन इतना तय है कि खर्वे गांव लंबे समय तक उस खौफनाक दौर को नहीं भूल पाएगा, जब मौत गांव में किसी बीमारी की तरह नहीं, बल्कि एक इंसान के हाथों घूम रही थी।























