तपती धूप में बेजुबानों का सहारा: पाण्डुका वन विभाग ने शुरू की प्याऊ घर मुहिम स्थनीय ग्रामीणों और राहगीरों में चर्चा, भीषण गर्मी और जलस्रोत के सूखने से वन्यप्राणी बस्तियों की ओर करते रुख,,,,
राजिम/पाण्डुका: जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, इंसानों के साथ-साथ जंगलों के परिंदे और वन्यप्राणी भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। उप वनमंडलाधिकारी राजिम के निर्देश एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी पाण्डुका संतोष चौहान के मार्गदर्शन में ग्रीष्म ऋतु के दौरान वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए विशेष प्रबंध शुरू किए गए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्याऊ घर का आगाज़
इस अभियान के अंतर्गत, राष्ट्रीय राजमार्ग 130C पर स्थित परिसर पोंड में अग्नि सुरक्षा हेतु बनाए गए ‘हर्ट’ (Hut) को एक सेवा केंद्र के रूप में तब्दील किया गया है। यहाँ विशेष रूप से ‘प्याऊ घर’ की स्थापना की गई है, जहाँ पक्षियों और छोटे वन्यप्राणियों के लिए पानी और दाने की समुचित व्यवस्था की गई है।
कल, 20 अप्रैल 2026 को उप वनमंडलाधिकारी राजिम एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी पाण्डुका संतोष चौहान ने स्वयं उपस्थित होकर इस मुहिम का विधिवत शुभारंभ किया। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मिट्टी के सकोरों व पात्रों में पानी भरकर इस पुनीत कार्य की शुरुआत की।
वनों की अग्नि सुरक्षा के साथ जीव रक्षा
आमतौर पर वनों में बने ‘अग्नि सुरक्षा हर्ट’ का उपयोग केवल आग की निगरानी के लिए होता है, लेकिन पाण्डुका वन विभाग ने नवाचार करते हुए इसे बेजुबानों के आश्रय स्थल के रूप में विकसित किया है।
- जल प्रबंधन: वन्यप्राणियों के लिए परिसर के भीतर जल पात्र रखे गए हैं।
- पक्षी सेवा: ऊँचाई पर सकोरे लटकाए गए हैं ताकि पक्षी सुरक्षित होकर प्यास बुझा सकें।
- भोजन व्यवस्था: पानी के साथ-साथ पक्षियों के लिए अनाज और दाने का भी प्रबंध किया गया है।
ग्रामीणों से मार्मिक अपील
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में जलस्रोतों के सूखने से वन्यप्राणी बस्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे मानव-द्वंद्व की स्थिति बनती है। यदि हम अपने आसपास, छतों पर या पेड़ों पर पानी की व्यवस्था करें, तो कई मासूम जानों को बचाया जा सकता है।
”प्रकृति का संतुलन तभी बना रहेगा जब हम इन बेजुबानों का ख्याल रखेंगे। हमारी एक छोटी सी कोशिश किसी प्यासे पक्षी का जीवन बचा सकती है।”
जन-भागीदारी की आवश्यकता
वन विभाग की इस मुहीम ने क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है। विभाग ने अपील की है कि हर नागरिक अपने सामर्थ्य अनुसार ग्रीष्म ऋतु में पक्षियों के लिए पानी और भोजन का प्रबंधन करे। इस पहल की प्रशंसा करते हुए ग्रामीणों ने भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया है।





















