बलौदाबाजार-भाटापारा जिला बना प्रदेश में मिसाल

सहकारी समितियों में शुरू हुए परिवहन सुविधा केंद्र, ग्रामीणों को अब गांव के पास ही मिलेंगी वाहन संबंधी सेवाएं

बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ में सहकारिता व्यवस्था को नई दिशा देने की पहल के तहत बलौदाबाजार-भाटापारा जिला ने एक अनूठी शुरुआत की है। जिले में पहली बार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से परिवहन सुविधा केंद्र प्रारंभ किए गए हैं। इस पहल के साथ बलौदाबाजार-भाटापारा प्रदेश का पहला जिला बन गया है जहां सहकारी समितियों में परिवहन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिले की चार प्रमुख समितियों — भाटापारा, सुहेला, लवन और कुम्हारी — में परिवहन सुविधा केंद्र शुरू किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों और किसानों को वाहन संबंधी कई महत्वपूर्ण सेवाएं अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेंगी।

सहकार से समृद्धि योजना को मिला नया आयाम

यह पहल सहकारिता को मजबूत बनाने वाली महत्वाकांक्षी योजना “सहकार से समृद्धि” के तहत की गई है। इसका उद्देश्य सहकारी समितियों को केवल कृषि सेवाओं तक सीमित न रखते हुए उन्हें बहु-सेवा केंद्र के रूप में विकसित करना है। अब इन समितियों के माध्यम से ग्रामीणों को परिवहन विभाग से जुड़ी कई सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। इससे लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

गांव में ही मिलेंगी वाहन से जुड़ी सेवाएं

सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के माध्यम से इन समितियों में कई डिजिटल सेवाएं पहले से ही संचालित हैं। अब परिवहन सुविधा केंद्र जुड़ने से सेवाओं का दायरा और बढ़ गया है।

इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को निम्नलिखित सेवाएं मिल रही हैं:

* ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन
* ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सेवाएं
* वाहन पंजीकरण से जुड़े कार्य
* डुप्लिकेट आरसी बनवाना
* वाहन स्वामित्व स्थानांतरण
* वाहन बीमा से संबंधित सेवाएं
* वाहन चालान की जानकारी और भुगतान
* पासपोर्ट में वाहन से जुड़े विवरण परिवर्तन

इन सेवाओं के शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें इन कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

जिले की 129 समितियों में संचालित हो रहे सीएससी

जिले में सहकारिता व्यवस्था को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने की दिशा में पहले से ही महत्वपूर्ण काम किया जा रहा है। कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में जिले की 129 प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों में सामान्य सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी और डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। परिवहन सुविधा केंद्र शुरू होने से इन सेवाओं में और विस्तार हुआ है। इससे सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में एक बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित हो रही हैं।

किसानों के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं समितियां

प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां लंबे समय से किसानों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। इन समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण, खाद, बीज और कृषि दवाइयों की आपूर्ति की जाती है। अब डिजिटल सेवाओं और परिवहन सुविधा केंद्र जैसे नए प्रयोगों के साथ इन समितियों की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया गया तो यह प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।

माइक्रो एटीएम से बैंकिंग सुविधा भी

सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से सदस्य समितियों में ही राशि जमा और आहरण कर सकते हैं। इस व्यवस्था से ग्रामीणों को बैंक जाने की आवश्यकता कम हो गई है। कई दूरदराज के गांवों में यह सुविधा लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

जनऔषधि केंद्र के रूप में भी काम

कुछ समितियों के माध्यम से जनऔषधि केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके जरिए लोगों को सस्ती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी मजबूत हो रही है।

ग्रामीणों और किसानों में खुशी

परिवहन सुविधा केंद्र शुरू होने के बाद किसानों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि अब छोटे-छोटे कामों के लिए शहर जाने की परेशानी कम हो जाएगी। कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले वाहन से जुड़े कामों के लिए दिनभर की छुट्टी लेकर जिला मुख्यालय जाना पड़ता था। अब वही काम गांव के पास ही हो जाएगा।

प्रदेश के लिए मॉडल बन सकता है यह प्रयोग

जानकारों का मानना है कि सहकारी समितियों को बहु-सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की यह पहल ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे सहकारी संस्थाओं की उपयोगिता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगी।

सहकारिता को आधुनिक स्वरूप देने की कोशिश

आज के समय में सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सेवाओं से जोड़ना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
परिवहन सुविधा केंद्र की शुरुआत इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल सहकारी समितियों की भूमिका मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच भी आसान हो जाएगी। कुल मिलाकर, बलौदाबाजाज-भाटापारा जिला में सहकारी समितियों के माध्यम से शुरू किया गया यह प्रयोग ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था देखने को मिल सकती है।

 

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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