सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर जागरूकता की पहल: डिजिटल दुनिया में सुरक्षा, जिम्मेदारी और सतर्कता पर दिया गया जोर…

सुरक्षित इंटरनेट दिवस पर जागरूकता की पहल: डिजिटल दुनिया में सुरक्षा, जिम्मेदारी और सतर्कता पर दिया गया जोर…

बलौदा बाजार।तेजी से डिजिटल होती दुनिया में इंटरनेट जहां ज्ञान, सुविधा और कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है, वहीं इसके साथ साइबर अपराध, डेटा चोरी और डिजिटल धोखाधड़ी जैसे खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 10 फरवरी 2026 को सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर एनआईसी जिला इकाई, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा कलेक्टोरेट के प्रगति सभा कक्ष में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों को इंटरनेट के सुरक्षित, जिम्मेदार और सतर्क उपयोग के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में कलेक्टर दीपक सोनी, डीएफओ गणवीर धम्मशील, अन्य जिला स्तरीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान डिजिटल सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डिजिटल युग में सुरक्षा की जरूरत

कार्यक्रम की शुरुआत सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की आवश्यकता और इसके महत्व पर चर्चा के साथ हुई। बदलते समय में सरकारी कामकाज, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार का बड़ा हिस्सा इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसी सोच के साथ यह आयोजन किया गया, ताकि अधिकारी और कर्मचारी न सिर्फ खुद सुरक्षित रहें, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकें।

इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग पर विस्तार से जानकारी

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक (आईटी) सत्यनारायण प्रधान ने प्रजेंटेशन के माध्यम से इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, संभावित खतरों, सावधानियों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के समय में साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का उपयोग कर लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनजान ईमेल, मैसेज या लिंक पर क्लिक करना, बिना जांचे-परखे किसी एप्लिकेशन को डाउनलोड करना और अपनी निजी जानकारी साझा करना सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है। सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ फर्जी प्रोफाइल, फर्जी विज्ञापन और झूठी खबरों का खतरा भी बढ़ गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: अवसर और खतरे दोनों

कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि एआई शिक्षा, प्रशासन और कार्यक्षमता बढ़ाने में एक प्रभावी साधन बनकर उभरा है। सरकारी कार्यों में भी एआई आधारित टूल्स समय की बचत और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं।
लेकिन इसके साथ ही एआई के जरिए फैल रहे डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो और डेटा प्राइवेसी से जुड़े खतरे भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। किसी व्यक्ति की आवाज या वीडियो को एआई के माध्यम से नकली रूप में प्रस्तुत कर गलत जानकारी फैलाई जा सकती है, जिससे सामाजिक, आर्थिक और मानसिक नुकसान हो सकता है। इस संदर्भ में स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी एआई टूल का उपयोग करते समय व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी साझा न करें। सरकारी या निजी दस्तावेज, आधार, बैंक विवरण, पासवर्ड जैसी जानकारियों को एआई प्लेटफॉर्म पर डालना खतरनाक हो सकता है।

वित्तीय सुरक्षा पर विशेष फोकस

कार्यक्रम में वित्तीय सुरक्षा को लेकर भी विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान आज की जरूरत बन चुके हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है। अधिकारियों और कर्मचारियों को सलाह दी गई कि इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करते समय केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल एप का ही प्रयोग करें। सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क पर वित्तीय लेनदेन करने से बचने, अपने पासवर्ड और पिन को समय-समय पर बदलने और एक ही पासवर्ड को कई जगह उपयोग न करने की सलाह दी गई। इसके अलावा ओटीपी, सीवीवी नंबर और बैंक से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करने पर भी जोर दिया गया।

सेफर इंटरनेट डे 2026 की शपथ

कार्यशाला के दौरान सभी उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को एआई और इंटरनेट के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग की शपथ दिलाई गई। इस शपथ के माध्यम से यह संकल्प लिया गया कि इंटरनेट का उपयोग सकारात्मक, सुरक्षित और कानून के दायरे में किया जाएगा तथा किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही सेफर इंटरनेट डे 2026 की आधिकारिक वेबसाइट [www.staysafeonline.in](http://www.staysafeonline.in) पर उपलब्ध जागरूकता वीडियो का प्रस्तुतीकरण भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से साइबर सुरक्षा की समझ मिल सकी।

साइबर धोखाधड़ी से बचाव के उपाय

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और बिना सत्यापन किसी सूचना या वीडियो को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड न करें। आजकल साइबर अपराधी भावनात्मक संदेश, सरकारी योजना या इनाम का लालच देकर लोगों को फंसाते हैं।
साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या वेबसाइट [www.cybercrime.gov.in](http://www.cybercrime.gov.in) पर तुरंत शिकायत दर्ज करने की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि समय पर शिकायत करने से नुकसान की भरपाई और अपराधियों तक पहुंचना आसान हो जाता है।

प्रश्न-उत्तर सत्र में जिज्ञासाओं का समाधान

कार्यक्रम के दौरान प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित प्रतिभागियों ने अपनी शंकाएं और अनुभव साझा किए। पासवर्ड सुरक्षा, सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने, फर्जी कॉल और मैसेज से जुड़े सवालों का संतोषजनक उत्तर दिया गया। इस सत्र ने कार्यक्रम को और उपयोगी बना दिया, क्योंकि प्रतिभागियों को अपनी दैनिक समस्याओं का समाधान सीधे विशेषज्ञों से मिला।

ब्रोशर और पम्पलेट का वितरण

सुरक्षित इंटरनेट उपयोग से संबंधित टीप युक्त ब्रोशर और पम्पलेट भी कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच वितरित किए गए। इनमें सरल भाषा में इंटरनेट सुरक्षा के नियम, सावधानियां और हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दी गई थी, ताकि प्रतिभागी इन्हें भविष्य में भी उपयोग कर सकें और दूसरों को भी जागरूक कर सकें।

जागरूकता फैलाने की अपील

कार्यक्रम में कलेक्टर दीपक सोनी ने सभी अधिकारी और कर्मचारियों से अपील की कि वे इंटरनेट का सुरक्षित उपयोग स्वयं करें और इसके बारे में अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को इंटरनेट से जुड़े खतरों के बारे में समझाना बेहद जरूरी है, ताकि वे किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शिकार न हों।

धन्यवाद ज्ञापन और समापन

कार्यक्रम के अंत में ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर संदीप साहू ने इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग पर अपने विचार रखे और कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने एनआईसी जिला इकाई के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।

 

सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि डिजिटल युग में जागरूकता की एक मजबूत पहल साबित हुआ। इंटरनेट जहां सुविधा और विकास का माध्यम है, वहीं लापरवाही इसे खतरे का कारण भी बना सकती है। ऐसे में इस तरह के आयोजन लोगों को सतर्क, जागरूक और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं। बलौदाबाजार में आयोजित यह कार्यक्रम यह संदेश देता है कि सुरक्षित इंटरनेट केवल तकनीक का सवाल नहीं, बल्कि समझ, सावधानी और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है।

 

📍बलौदाबाजार से केशव साहू की ग्राउंड रिपोर्ट 9691693646

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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