साल्हेपुर में 347 ट्रिप अवैध रेत जब्ती के बाद भी कार्रवाई नही, माफिया फिर सक्रिय, तीन बार शिकायत, विधायक और कलेक्टर को भी सूचना..! फिर भी कार्रवाई नहीं, क्या माफिया और अफसरों की मिलीभगत?

साल्हेपुर में 347 ट्रिप अवैध रेत जब्ती के बाद भी कार्रवाई ठप, माफिया फिर सक्रिय, तीन बार शिकायत, विधायक और कलेक्टर को भी सूचना..! फिर भी कार्रवाई नहीं, क्या माफिया और अफसरों की मिलीभगत?
साल्हेपुर में 347 ट्रिप अवैध रेत जब्ती के बाद भी कार्रवाई नही, माफिया फिर सक्रिय, तीन बार शिकायत, विधायक और कलेक्टर को भी सूचना..! फिर भी कार्रवाई नहीं, क्या माफिया और अफसरों की मिलीभगत? (Chhattisgarh Talk)

अरुण पुरेना बेमेतरा। जिले के साल्हेपुर गांव में प्रशासनिक लापरवाही और रेत माफियाओं की दबंगई खुलकर सामने आई है। 4 अप्रैल 2025 को माइनिंग विभाग द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई में 347 ट्रिप अवैध रेत जब्त की गई थी। उस समय कार्रवाई को लेकर शासन की पीठ थपथपाई गई, लेकिन आगे की प्रक्रिया विशेषकर नीलामी आज तक अधूरी है।

रेत को ग्राम निवासी उत्तम गुप्ता के सुपुर्द किया गया था, पर कुछ ही दिनों बाद माफिया उसी जब्त रेत को ट्रैक्टरों से चुपचाप उठाने लगे। ग्रामीणों द्वारा इसका वीडियो सबूत भी तैयार किया गया, शिकायत भी दी गई लेकिन न प्रशासन जागा, न कार्रवाई हुई।

तीन बार शिकायत, हर बार आश्वासन

12 मई को ग्राम सरपंच, जनपद सदस्य और ग्रामीणों ने माइनिंग अधिकारी से रेत नीलामी की मांग की। कहा गया “कल ही नीलामी की प्रक्रिया शुरू होगी”, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद 16 मई को बेमेतरा विधायक दीपेश साहू और जिला उपाध्यक्ष प्रतिनिधि बलराम पटेल ने भी लिखित में कार्रवाई की मांग की। फिर भी खामोशी।

19 मई को देवरी में आयोजित “सुशासन तिहार” में जनपद सदस्य नीरज राजपूत ने कलेक्टर और विधायक को सबूतों के साथ शिकायत दी, एक बार फिर कार्रवाई का वादा हुआ पर परिणाम वही “शून्य”।

ज़ब्त रेत उठने लगी 

आज की स्थिति ये है कि जब्त रेत फिर से ट्रैक्टरों में भरकर उठाई जा रही है। ग्रामीणों ने रात में रेत ले जाते माफियाओं को देखा और वीडियो बनाया। जब पटवारी ने पूछा तो माफियाओं ने दावा किया कि उन्हें जिला माइनिंग अधिकारी की मौखिक अनुमति है। लेकिन जब अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने किसी भी अनुमति से इनकार कर दिया।

तो सवाल यह उठता है…

  • जब बार-बार शिकायत दी जा रही है, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
  • जब सबूत मौजूद हैं, तब भी माफिया खुलेआम कैसे सक्रिय हैं?
  • क्या माइनिंग विभाग और माफियाओं की मिलीभगत है?
  • जब एक गांव के सचिव को झूठ बोलने और कार्रवाई न करने पर निलंबित किया जा सकता है, तो फिर माफियाओं को संरक्षण देने वाले अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

सुशासन तिहार सिर्फ़ दिखावा?

सरकार “तुंहर द्वार” अभियान के जरिए सुशासन का संदेश दे रही है, पर साल्हेपुर की यह हकीकत बताती है कि रेत माफिया अब भी शासन पर भारी हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है..सख्ती या चुप्पी?

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