बारनवापारा अभ्यारण्य: प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण, बारनवापारा अभ्यारण्य में नए सफारी मार्ग और गेट्स की शुरुआत, पर्यटकों के लिए बढ़ी सुविधाएँ और अनुभव

बारनवापारा अभ्यारण्य: प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण, बारनवापारा अभ्यारण्य में नए सफारी मार्ग और गेट्स की शुरुआत, पर्यटकों के लिए बढ़ी सुविधाएँ और अनुभव
बारनवापारा अभ्यारण्य: प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण, बारनवापारा अभ्यारण्य में नए सफारी मार्ग और गेट्स की शुरुआत, पर्यटकों के लिए बढ़ी सुविधाएँ और अनुभव

बारनवापारा अभ्यारण्य, छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख इकोटूरिज्म स्थल, अब नए सफारी मार्गों और प्रवेश गेट्स के साथ और भी आकर्षक बन गया है। यहां के वन्यजीव, जैसे कि तेंदुआ, हाथी और बाघ, पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। नए गेट्स और सफारी रूट्स से पर्यटकों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य देखने का मौका मिलेगा।

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा अभ्यारण्य, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है, अब एक और नये परिवर्तन के साथ पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थल बन गया है। 15 अक्टूबर 2024 से शुरू हुआ नया पर्यटक सीजन इस अभ्यारण्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां 3 नये सफारी मार्ग और 3 नये प्रवेश गेट्स का उद्घाटन किया गया है। इससे अभ्यारण्य में पर्यटन का अनुभव और भी बेहतर हो गया है।

बारनवापारा अभ्यारण्य की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की विविधता

बारनवापारा अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 244.66 वर्ग किलोमीटर है, और यह समतल और लहरदार क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी इसे विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों का घर बनाती है। इस अभ्यारण्य में पर्यटक हिरण, नीलगाय, मोर, गौर, काला हिरण, जंगली सुअर, सांभर, खरगोश, भालू और तेंदुआ जैसी प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। इसके अलावा, बारनवापारा में 150 से अधिक तितलियों और मोथ की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कई शेड्यूल वन और शेड्यूल दो में दर्ज हैं, जैसे कि क्रिमसन रोज और डनाइड इगली।

बारनवापारा अभ्यारण्य में वन्यजीवों का संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा एक प्रमुख उद्देश्य है। इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों से यहां 14-16 हाथियों का एक दल और एक बाघ भी लगातार विचरण कर रहा है, जो इस अभ्यारण्य की जैविक विविधता को और भी बढ़ाता है।

नये सफारी मार्ग और गेट्स की शुरुआत

बारनवापारा अभ्यारण्य में अब पर्यटकों के लिए नये सफारी मार्ग और गेट्स की व्यवस्था की गई है। पहले, सफारी की सुविधा केवल मुख्यालय से उपलब्ध थी, जिससे पर्यटकों को सफर करने में परेशानी होती थी और कई बार जिप्सी या गाइड की उपलब्धता में भी देरी होती थी। लेकिन अब, पर्यटकों के लिए 3 नये प्रवेश गेट्स खोले गए हैं, जिससे सफारी का अनुभव और भी सुविधाजनक हो गया है।

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नये सफारी मार्ग और गेट

हाल ही में बारनवापारा अभ्यारण्य में तीन नए सफारी मार्ग और तीन नए गेट बनाए गए हैं, जो इस क्षेत्र की सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को और भी बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इन नए मार्गों और गेटों का उद्घाटन पर्यटकों को सुरक्षित और संरक्षित तरीके से वन्यजीवों के करीब जाने का अवसर देगा।

  1. नए सफारी मार्ग: नए सफारी मार्गों के निर्माण से पर्यटकों को अभ्यारण्य के अलग-अलग हिस्सों में जाने का अवसर मिलेगा, जिससे उन्हें विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों को देखने का अनुभव होगा। ये मार्ग खासतौर पर अभ्यारण्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां पहले पर्यटकों का जाना मुश्किल था। अब पर्यटक इन मार्गों के माध्यम से प्राकृतिक सौंदर्य और जानवरों की गतिविधियों को बेहतर ढंग से देख सकते हैं।
  2. नए गेट: नए गेट्स के माध्यम से अभ्यारण्य के अंदर जाने में और भी सुविधाएँ मिलेंगी। इन गेटों का उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ाना और पर्यटकों के लिए प्रवेश को सुव्यवस्थित करना है। इससे पर्यटकों को भी भीड़-भाड़ से बचते हुए आराम से सफारी का आनंद लेने का मौका मिलेगा।
  3. अभ्यारण्य में दो प्रमुख नदी- प्रणाली हैं: शिवनाथ नदी और हसदो नदी, जो न केवल जल स्रोत हैं, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इन नदियों के आसपास सफारी के दौरान पर्यटक पक्षियों, मछलियों और अन्य जलजीवों को भी देख सकते हैं।

इन नए गेट्स के माध्यम से पर्यटक सीधे जंगल के भीतर प्रवेश कर सकते हैं और उन्हें जिप्सी तथा गाइड की सुविधा वहीं से मिल सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पर्यटकों को जल्दी और बेहतर सेवाएं भी प्राप्त होंगी।

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पर्यटकों के लिए सुविधाएँ और सुरक्षा

नए गेट और सफारी मार्ग पर्यटकों को बेहतर सुरक्षा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। अभ्यारण्य में सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा प्रशिक्षित गाइड और सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की जाती है, ताकि पर्यटकों को सफारी के दौरान कोई समस्या न हो और वे सुरक्षित रूप से प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर सकें।

इसके अलावा, अभ्यारण्य में पर्यटकों के लिए रुकने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जैसे कि पर्यावरण मित्रालय, कैम्पसाइट और वन-गेस्ट हाउस, जहाँ वे रात भर रुक सकते हैं और जंगल के नजदीक रहने का अनुभव ले सकते हैं।

नये पर्यटक रूट और सफारी मार्ग

इसके साथ ही, अभ्यारण्य में तीन नये सफारी रूट भी तैयार किए गए हैं। इन नए मार्गों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटकों को विभिन्न हिस्सों का भ्रमण करने का अवसर मिले, ताकि वे विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और वन्य पारिस्थितिकी का अनुभव कर सकें। पहले के सफारी मार्गों पर अत्यधिक दबाव और भीड़-भाड़ के कारण अव्यवस्थाएँ देखने को मिलती थीं, लेकिन नए मार्गों के खुलने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा और पर्यटक आराम से अपना भ्रमण कर सकेंगे।

पर्यटन और आर्थिक लाभ

बारनवापारा अभ्यारण्य के नए सफारी सेवा की शुरुआत से न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होगा। मुंबा मचान रिसॉर्ट के जनरल मैनेजर रविन्द्र राठौर ने इस पहल को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि इससे दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों को काफी लाभ मिलेगा। अब पर्यटकों को गांव तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जंगल प्रवेश करते ही सफारी शुरू हो जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पैसे की भी बचत होगी क्योंकि सफारी सीधे अभ्यारण्य के भीतर शुरू हो जाएगी।

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अभ्यारण्य का भविष्य और पर्यटन विकास

बारनवापारा अभ्यारण्य में आने वाले समय में और भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन सके। छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से भी पर्यटक यहां आकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं। इस अभ्यारण्य में इकोटूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल वन्यजीवों का संरक्षण होगा, बल्कि पर्यटकों में भी जागरूकता उत्पन्न होगी।

कैसे पहुंचे बारनवापारा अभ्यारण्य?

बारनवापारा अभ्यारण्य रायपुर से 106 किलोमीटर दूर है, और यहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से दो घंटे का सफर तय करना पड़ता है। रायपुर से NH53 पर यात्रा करते हुए इसे आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, पटेवा नामक एक छोटा शहर है, जहां से बारनवापारा अभ्यारण्य 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बारनवापारा अभ्यारण्य में किए गए ये नए बदलाव न केवल पर्यटकों को अधिक सुविधाएं देंगे, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में स्थित इस अभ्यारण्य को एक प्रमुख इकोटूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे। नए सफारी मार्गों और गेट्स के उद्घाटन से पर्यटकों को वन्यजीवों का नजदीक से अनुभव करने का शानदार मौका मिलेगा, और यह अभ्यारण्य भविष्य में पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय हो जाएगा।

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