फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर केस में भाजपा नेताओं पर FIR, चार गिरफ्तार; पार्टी ने दो पदाधिकारियों को जिम्मेदारियों से किया मुक्त
सरकारी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से ट्रांसफर आदेश तैयार करने का आरोप, पलारी पुलिस ने शुरू की जांच
जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल समेत चार नाम FIR में, सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें भी चर्चा में
बलौदाबाजार जिले में कथित फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर का मामला अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक के कथित फर्जी स्थानांतरण आदेश से जुड़े मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों में भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन ने भी कार्रवाई करते हुए दो पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
पुलिस के अनुसार मामला एक कथित फर्जी सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसमें ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन का स्थानांतरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोपर, विकासखंड भाटापारा किए जाने का उल्लेख था।
ऐसे खुला फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर का मामला
पुलिस के मुताबिक खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी की ओर से 17 अगस्त 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन ने अपने स्थानांतरण और कार्यमुक्त किए जाने से संबंधित एक आदेश कार्यालय में प्रस्तुत किया। इस दस्तावेज में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलौदाबाजार-भाटापारा के कार्यालय का आदेश क्रमांक एनएचएम/एचआर/2026-27/1359, दिनांक 14 अगस्त 2026 अंकित था। कथित आदेश में करण कुमार देवांगन को रोहांसी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोपर स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख था। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग ने दस्तावेज की जांच की तो मामला संदिग्ध पाया गया।
विभाग ने कहा- ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ
जांच में सामने आया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से करण कुमार देवांगन के स्थानांतरण को लेकर ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, कथित आदेश पर किए गए हस्ताक्षर को लेकर भी संबंधित अधिकारी ने उसे अपना हस्ताक्षर मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू की।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 17 अगस्त को खंड चिकित्सा अधिकारी पलारी को पत्र जारी कर मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि करण कुमार देवांगन राज्य संवर्ग के कर्मचारी हैं और उनके स्थानांतरण का अधिकार राज्य शासन के पास है। साथ ही उस समय स्थानांतरण पर प्रतिबंध होने की जानकारी भी विभाग की ओर से दी गई।
पुलिस जांच में सामने आए कई नाम
शिकायत मिलने के बाद पलारी पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों की जांच की और खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज वर्मा के बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में सरकारी अधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उसे वास्तविक सरकारी आदेश बताकर कार्यालय में प्रस्तुत करने के तथ्य सामने आए। इसी आधार पर पुलिस ने करण कुमार देवांगन समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया।
पलारी पुलिस ने मामले में धारा 318(4), 336(3), 337, 338, 340(2) और 3(5) BNSनके तहत अपराध दर्ज किया है।
भाजपा के दो पदाधिकारियों के नाम भी FIR में
मामले में भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल के अलावा रवि कुमार सेन और करण कुमार देवांगन के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किसकी क्या भूमिका थी और कथित आदेश किस स्तर पर तैयार किया गया, इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है। पुलिस अब दस्तावेज तैयार करने, उसमें इस्तेमाल हस्ताक्षर, आदेश को कार्यालय में प्रस्तुत करने और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें चर्चा में
मामले में भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी का नाम सामने आने के बाद उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल भी चर्चा में है। उनके फेसबुक प्रोफाइल पर भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें दिखाई देती हैं। इन तस्वीरों में सांसदों, पूर्व मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कृष्णा अवस्थी नजर आते हैं। वे इन तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा भी करते रहे हैं। हालांकि किसी वरिष्ठ भाजपा नेता के साथ तस्वीर होना इस मामले में उनकी किसी संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। इन तस्वीरों का उल्लेख केवल इसलिए चर्चा में है क्योंकि आरोपी के भाजपा संगठन में जिला महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने की जानकारी सामने आई है।
BJP पार्टी ने भी लिया संगठनात्मक एक्शन
FIR और गिरफ्तारी की कार्रवाई के बाद भाजपा संगठन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। पार्टी ने जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल को उनके संगठनात्मक दायित्वों से मुक्त कर दिया है। पार्टी की यह कार्रवाई पुलिस जांच से अलग संगठनात्मक स्तर पर की गई कार्रवाई मानी जा रही है।
अब पुलिस जांच में क्या सामने आएगा?
फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर का मामला केवल एक कर्मचारी के स्थानांतरण तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, यह पुलिस की आगे की जांच में स्पष्ट होगा।बपुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी आदेश किसने तैयार किया, उसमें सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर किस तरह लगाए गए और इसे वास्तविक सरकारी आदेश के तौर पर प्रस्तुत करने की योजना किसकी थी। इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े से किसी अन्य कर्मचारी को लाभ पहुंचाने या किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई। फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। अब जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका थी और कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।































