दीपावली पर मिठाइयों की जांच के नाम पर खाद्य विभाग की खानापूर्ति? 24 नमूने लेकर कार्रवाई का दावा, सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था

दीपावली पर मिठाइयों की जांच के नाम पर खाद्य विभाग की खानापूर्ति? 24 नमूने लेकर कार्रवाई का दावा, सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
दीपावली पर मिठाइयों की जांच के नाम पर खाद्य विभाग की खानापूर्ति? 24 नमूने लेकर कार्रवाई का दावा, सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
दीपावली पर मिठाइयों की जांच के नाम पर खाद्य विभाग की खानापूर्ति? 24 नमूने लेकर कार्रवाई का दावा, सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
चार प्रतिष्ठानों से नमूने, दो पर जुर्माना लगाकर विभाग ने गिनाईं उपलब्धियां; बाजार में बिक रही मिठाइयों की गुणवत्ता पर अब भी स्पष्ट जवाब नहीं
दीपावली का त्योहार नजदीक है। बाजारों में मिठाइयों, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री तेज हो गई है। इसी के साथ मिलावट और घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल नमूने लेने या कार्रवाई की प्रेस विज्ञप्ति जारी करने तक सीमित नहीं हो सकती। विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि आम लोगों की थाली और त्योहारों की मिठास में मिलावट न पहुंचे। लेकिन बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में विभाग की ओर से जारी ताजा विज्ञप्ति ने उसकी जांच व्यवस्था और निगरानी की प्रभावशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
5 नवंबर को जारी विभागीय जानकारी के अनुसार, दीपावली को देखते हुए विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक कुल 24 नमूने लिए जाने की बात कही गई है। भगवती मिष्ठान भंडार बलौदाबाजार, खेमजी होटल भाटापारा, हर्षद मिष्ठान भंडार भाटापारा और जोधपुरी स्वीट्स भाटापारा से मिठाई एवं अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। वहीं, दो प्रतिष्ठानों पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाए जाने को विभाग ने अपनी कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतने बड़े जिले में त्योहार के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यही पर्याप्त कार्रवाई है? विभाग ने 24 नमूने लेने की बात तो कही, लेकिन अपनी विज्ञप्ति में यह स्पष्ट नहीं किया कि जिले में कुल कितने खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई, कितनी दुकानों को नोटिस दिया गया और कितने प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं गुणवत्ता संबंधी कमियां मिलीं।

24 नमूनों का दावा, लेकिन पूरी जांच का ब्योरा कहां?

विभाग की विज्ञप्ति में चार प्रतिष्ठानों के नाम सामने आए हैं। इनमें से नमूने किन तारीखों को लिए गए, प्रत्येक प्रतिष्ठान से कितने नमूने लिए गए और कुल 24 नमूनों में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ शामिल हैं, इसका विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। जिले के बलौदाबाजार, भाटापारा, सिमगा, पलारी, कसडोल, लवन और अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में खाद्य कारोबार संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जांच अभियान का दायरा कितना व्यापक है? क्या छोटे-बड़े सभी बाजारों में निरीक्षण किया जा रहा है या कार्रवाई कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठानों तक ही सीमित है?
विभाग को यह भी बताना चाहिए कि अभियान में कितनी टीमें लगाई गई हैं और प्रतिदिन कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा रहा है। केवल नमूनों की संख्या बताने से यह साबित नहीं होता कि जिले में खाद्य सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में है।

एक मामले में 85 हजार का जुर्माना, लेकिन बाकी नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार

विभाग के अनुसार, लिमतरा स्थित आनंद फैमिली रेस्टोरेंट से दम राइस का नमूना जांच के लिए लिया गया था। प्रयोगशाला में नमूना अवमानक पाए जाने के बाद अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने 85 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। वहीं, भाटापारा की शीतल इंडस्ट्रीज पर बेसन के पैकेट में पोषण संबंधी जानकारी अंकित नहीं करने के मामले में 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस तरह दोनों प्रतिष्ठानों पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
हालांकि, यहां भी कुछ सवालों के जवाब जरूरी हैं। दम राइस का नमूना किस गुणवत्ता मानक पर खरा नहीं उतरा? जांच रिपोर्ट में कौन-सी कमी सामने आई? संबंधित प्रतिष्ठान को कब नोटिस दिया गया और कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया क्या रही? विभाग ने इन बिंदुओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसी तरह बेसन के पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी नहीं होने के मामले में भी विभाग को यह बताना चाहिए कि संबंधित उत्पाद बाजार में कितनी मात्रा में बेचा जा रहा था और क्या अन्य उत्पादों के पैकेटों की भी जांच की गई?

रिपोर्ट आने तक बाजार में बिकती रहेंगी संदिग्ध मिठाइयां?

विभाग ने भगवती मिष्ठान भंडार, खेमजी होटल, हर्षद मिष्ठान भंडार और जोधपुरी स्वीट्स से चमचम, कलाकंद, सेव, काजू कतली, खोवा पेड़ा, नारियल लड्डू और दूध पेड़ा सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे हैं। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट या अमानकता मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब तक प्रयोगशाला की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक संबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री और गुणवत्ता की निगरानी कैसे की जाएगी? यदि किसी नमूने में गंभीर गड़बड़ी सामने आती है तो क्या उस उत्पाद के पूरे स्टॉक की जांच होगी? क्या बाजार से संबंधित बैच को हटाने की कार्रवाई की जाएगी? उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी किस तरह दी जाएगी? खाद्य सुरक्षा का उद्देश्य केवल नमूना लेकर रिपोर्ट का इंतजार करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को असुरक्षित खाद्य पदार्थों से बचाना भी है। इसलिए विभाग को नमूना संग्रहण के साथ-साथ निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की समयसीमा भी स्पष्ट करनी चाहिए।

दुकानदारों को समझाइश, लेकिन लापरवाही पर लगातार निगरानी कहां?

विभाग ने जिले के सभी खाद्य कारोबारियों को उच्च गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थों का निर्माण एवं विक्रय करने की समझाइश दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल समझाइश से बाजार में मिलावट रुक जाएगी? क्या विभाग ने सभी प्रतिष्ठानों को स्वच्छता, खाद्य सामग्री के भंडारण, निर्माण की तारीख, एक्सपायरी और पैकेजिंग संबंधी नियमों का पालन करने के लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की है? त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के कारण खाद्य पदार्थों के निर्माण और भंडारण में लापरवाही की आशंका रहती है। ऐसे में विभाग को केवल त्योहार के आसपास अभियान चलाने के बजाय पूरे वर्ष नियमित जांच करनी चाहिए। जिन प्रतिष्ठानों में पहले अनियमितताएं पाई गई हैं, उनकी दोबारा जांच भी होनी चाहिए।

विभाग से इन सवालों के जवाब जरूरी

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब विभाग से कुछ बुनियादी सवालों के जवाब अपेक्षित हैं:
1. जिले में कुल कितने खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया?
2. अब तक लिए गए 24 नमूनों में से कितने नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है?
3. चार नामित प्रतिष्ठानों के अलावा किन क्षेत्रों में जांच की गई?
4. पिछले एक वर्ष में कितने नमूने अवमानक या मिलावटी पाए गए?
5. मिलावट या नियमों के उल्लंघन पर कितने कारोबारियों के खिलाफ जुर्माना और मुकदमे की कार्रवाई हुई?
6. प्रयोगशाला रिपोर्ट आने तक संदिग्ध खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने या निगरानी करने की क्या व्यवस्था है?
7. दीपावली के बाद भी क्या जांच अभियान जारी रहेगा?
इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने से उपभोक्ताओं को भी पता चलेगा कि जिले में खाद्य सुरक्षा की निगरानी कितनी प्रभावी है। फिलहाल विभाग ने 24 नमूने लेने और दो प्रतिष्ठानों पर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाने की जानकारी दी है। लेकिन असली परीक्षा प्रेस विज्ञप्ति में कार्रवाई गिनाने की नहीं, बल्कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की है। दीपावली पर लोगों को सुरक्षित मिठाइयां मिलें, इसके लिए विभाग को आंकड़ों के साथ अपनी जांच और कार्रवाई का पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक करना चाहिए।

……………………………………………………………………

आपके पास भी कोई जानकारी या शिकायत है? संपर्क करें:
chhattisgarhtalk@gmail.com 9111755172, व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े-Now Join

……………………………………………………………………
समाचार और विज्ञापन के लिए संपर्क करे: 9111755172,9691693646

– टीम छत्तीसगढ़ टॉक न्यूज़ (Chhattisgarh Talk News)

error: Content is protected !!