‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ की हुंकार: बलौदाबाजार में कांग्रेस ने चुनाव आयोग को घेरा, SIR और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय पर्यवेक्षक शरद अहेर की प्रेसवार्ता में चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा गरमाया, विजय जांगिड़ और मोहम्मद अकबर भी रहे मौजूद; कांग्रेस बोली, हर पात्र मतदाता का नाम सूची में होना चाहिए
वोट की सुरक्षा, लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कांग्रेस के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक शरद अहेर ने प्रेसवार्ता में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी आंकड़ों की पारदर्शिता को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। इस दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के सह-प्रभारी विजय जांगिड़ और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला कांग्रेस प्रभारी मोहम्मद अकबर भी मौजूद रहे। प्रेसवार्ता का मुख्य मुद्दा यह रहा कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की जानकारी कितनी पारदर्शी है और किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से छूटने पर उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने से लेकर नाम जोड़ने, हटाने और आपत्तियों के निपटारे तक हर चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कांग्रेस के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक शरद अहेर ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर प्रेसवार्ता की। इस दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के सह-प्रभारी विजय जांगिड़ और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला कांग्रेस प्रभारी मोहम्मद अकबर भी मौजूद रहे। प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), VVPAT तथा चुनाव आयोग की पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा केवल SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस विभिन्न चुनावों के संदर्भ में इस पर सवाल उठाती रही है।
SIR से आगे है वोट चोरी का मुद्दा: कांग्रेस
प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, दोहरे पंजीकरण और चुनावी आंकड़ों की पारदर्शिता जैसे सवालों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। पार्टी के अनुसार, लोकतंत्र में चुनाव की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में दर्ज हो और किसी भी नाम को हटाने की प्रक्रिया नियमानुसार तथा पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े आंकड़े राजनीतिक दलों और नागरिकों को ऐसे डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध होने चाहिए, जिनका स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जा सके। पार्टी का तर्क है कि केवल आश्वासन देने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड और आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तरह की विसंगति सामने आने पर उसका समाधान हो सके।
राहुल गांधी के उठाए सवालों का किया उल्लेख
कांग्रेस ने अपने अभियान के संदर्भ में राहुल गांधी द्वारा अलग-अलग समय पर उठाए गए चुनावी पारदर्शिता के सवालों का भी उल्लेख किया। पार्टी ने महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में वृद्धि, कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कथित संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों और हरियाणा की मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोपों का हवाला दिया।
कांग्रेस के अनुसार, राहुल गांधी ने इन मामलों में मतदाता सूची के आंकड़ों की जांच और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की थी। पार्टी ने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के अपने विश्लेषण में 1,00,250 मतों से जुड़ी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इसमें दोहरे पंजीकरण, संदिग्ध तस्वीरों और अन्य प्रविष्टियों जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों को कांग्रेस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मतदाताओं की संख्या में वृद्धि या सूची में किसी विसंगति का सामने आना अपने आप में फर्जी मतदान या सुनियोजित गड़बड़ी का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष आवश्यक हैं।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने आयोग के भीतर कथित मतभेदों और कुछ फैसलों पर दर्ज आपत्तियों से संबंधित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर और संबंधित डेटाबेस तक पहुंच के संबंध में स्पष्ट नियम तथा जवाबदेही होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की कि मतदाता सूची में बदलाव से प्रभावित नागरिकों को समय पर जानकारी मिले और उन्हें अपील करने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े किसी भी विवाद का आकलन करते समय आयोग का आधिकारिक पक्ष, लागू नियम और संबंधित दस्तावेजों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों का अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और कानूनी संरक्षण पर भी चर्चा
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने 2023 के कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर चर्चा आवश्यक है। कांग्रेस ने चुनाव आयुक्तों के आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कार्यों के संबंध में कानूनी संरक्षण के प्रावधान पर भी सवाल उठाए। पार्टी का तर्क है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुरक्षित रहनी चाहिए, लेकिन साथ ही उसकी कार्यप्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रभावी उपाय भी होने चाहिए।
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी
कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के माध्यम से मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की बात कही। पार्टी के अभियान में बूथ स्तर पर मतदाता सूची का सत्यापन, नागरिकों को उनके नाम की स्थिति की जानकारी देना, नाम में त्रुटि होने पर सुधार की प्रक्रिया समझाना और प्रभावित मतदाताओं की समस्याओं का दस्तावेजीकरण करना शामिल है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों में नागरिकों को जागरूक करना और उन्हें नियमानुसार आवेदन तथा अपील की प्रक्रिया में सहायता देना आवश्यक है। पार्टी ने इस अभियान को लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और निष्पक्ष चुनाव की मांग से जोड़कर प्रस्तुत किया।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
प्रेसवार्ता में उठाए गए मुद्दों के आधार पर कांग्रेस की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची से संबंधित आंकड़ों को पारदर्शी बनाना, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया का विवरण उपलब्ध कराना, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना तथा प्रभावित मतदाताओं को अपील का अवसर देना शामिल है। पार्टी ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग भी रखी। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता का अधिकार सर्वोपरि है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठने वाले गंभीर सवालों का जवाब तथ्यों तथा दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय पर्यवेक्षक शरद अहेर, प्रदेश सह-प्रभारी विजय जांगिड़ और जिला प्रभारी मोहम्मद अकबर की मौजूदगी में कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत मतदाता सूची की पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा के मुद्दे को आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी का कहना है कि अभियान के माध्यम से नागरिकों को जागरूक करने और मतदाता सूची से संबंधित शिकायतों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।




























