वन परिक्षेत्र अर्जुनी में सागौन की बदस्तूर तस्करी, क्या गहरी नींद में है वन विभाग?

कसडोल उपवनमंडल के जंगलों पर आरी का प्रहार से सागौन साफ़.
कसडोल उपवनमंडल के जंगलों पर आरी का प्रहार से सागौन साफ़.

कसडोल उपवनमंडल के जंगलों पर आरी का प्रहार से सागौन साफ़. वन परिक्षेत्र अर्जुनी में सागौन की बदस्तूर तस्करी, क्या गहरी नींद में है वन विभाग?

 बलौदा बाजार। जंगलों को प्रदेश का ‘हरा सोना’ कहा जाता है, लेकिन कसडोल उप वन मंडल के अर्जुनी वन परिक्षेत्र से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे इस सोने की लूट की गवाही दे रही हैं। यहाँ के बेशकीमती सागौन के पेड़ों पर लकड़ी तस्करों की आरी नहीं, वन विभाग की लापरवाही साफ़  दिखाई दे रही है।

दक्षिण महराजी का ‘जख्मी’ जंगल: दर्जनों पेड़ हुए जमींदोज

​अर्जुनी वन परिक्षेत्र का दक्षिण महराजी कक्ष क्रमांक 359 इन दिनों अवैध कटाई का मुख्य केंद्र बन गया है। यहाँ हजारों की संख्या में मौजूद सागौन के पेड़ों पर तस्करों की गिद्ध दृष्टि जमी हुई है। इस कक्ष में दर्जनों विशालकाय सागौन के पेड़ों को काटकर ठिकाने लगा दिया गया है। जंगल के बीचों-बीच अब पेड़ों की जगह उनके ‘ठूंठ’ नजर आ रहे हैं, जो विभाग की मुस्तैदी के दावों की पोल खोल रहे हैं।

 जंगल अंदर दूर ऑफिस तक सिमटी ड्यूटी

​हैरानी की बात यह है कि जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले फॉरेस्ट गार्ड से लेकर रेंजर कीकार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। नियमानुसार, जंगल की नियमित गश्त होनी चाहिए, लेकिन यहाँ के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी फील्ड के बजाय ऑफिस की कुर्सियों तक सिमट कर रह गए हैं।

​सबसे बड़ा सबूत यह है कि कटे हुए पेड़ों के ठूंठों पर अब तक वन विभाग द्वारा कोई ‘हेमरिंग’ (निशान लगाना) नहीं की गई है। यह स्पष्ट करता है कि विभाग को या तो इस बड़ी चोरी की खबर ही नहीं है, या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गई हैं। बिना विभागीय मिलीभगत या घोर लापरवाही के इतने बड़े पैमाने पर इमारती लकड़ी की तस्करी संभव नहीं लगती।

सरकार को करोड़ों का चूना, पर्यावरण को गहरा जख्म

​एक तरफ सरकार और जल-वायु परिवर्तन विभाग जंगलों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं। ‘वृक्षारोपण’ के नाम पर ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन जो पेड़ पहले से मौजूद हैं, उन्हें बचाने में तंत्र पूरी तरह विफल है।

  • राजस्व की हानि: सागौन एक बेशकीमती इमारती लकड़ी है। दर्जनों पेड़ों की चोरी से शासन को लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
  • वन्यजीवों का संकट: जंगल कटने से जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में मौन रहेंगे, तो बेजुबान जानवर कहाँ जाएंगे?

अधिकारी का बयान जानकारी मिली है जांच कराएंगे

​जब इस गंभीर मामले में उप वनमंडलाधिकारी (SDO) अनिल वर्मा का वही, रटा-रटाया ही जवाब नजर आया। उन्होंने कहा:

​”मीडिया के माध्यम से कक्ष क्रमांक 359 में अवैध सागौन कटाई की जानकारी मिली है। रेंजर को निर्देशित कर ठूंठ परीक्षण (Stump Verification) के लिए मौके पर भेजता हूं। रिपोर्ट आने के बाद जो भी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 क्या ठूंठ गिनने से बचेंगे जंगल?

​सवाल यह उठता है कि जब पेड़ कट रहे थे, तब विभाग कहाँ है ? क्या अब सिर्फ ठूंठ गिनकर खानापूर्ति की जाएगी? कसडोल क्षैत्र  की जनता और पर्यावरण प्रेमी अब यह मांग कर रहे हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और उन बीट गार्ड्स और संबंधित अधिकारियों के कार्यप्रणाली सवालिया निशान उठने लगे हैं, जिनकी नाक के नीचे से जंगल साफ हो गया। यदि समय रहते इन लापरवाहों पर लगाम नहीं कसी गई, तो अर्जुनी का यह घना जंगल सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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