



बलौदाबाजार के रिसदा मिडिल स्कूल में परीक्षा के दौरान छात्र ने सहपाठी पर चाकू से हमला कर दिया। स्कूल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, जिले में बढ़ती चाकूबाजी और नशाखोरी पर मचा हड़कंप। जानिए पूरी खबर!
चंदु वर्मा, बलौदाबाजार: शिक्षा का मंदिर, जहां भविष्य की नींव रखी जाती है, वहां एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। बलौदाबाजार से महज 5 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत रिसदा के मिडिल स्कूल में परीक्षा कक्ष के अंदर ही सातवीं कक्षा के एक छात्र ने अपने सहपाठी पर चाकू से हमला कर दिया। इस चौंकाने वाली घटना ने पूरे जिले में सनसनी मचा दी है और स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
घटना के बाद स्कूल प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि एक छात्र बिना किसी सुरक्षा जांच के चाकू लेकर स्कूल में कैसे पहुंच गया? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा कक्ष में कोई शिक्षक मौजूद क्यों नहीं था? इस घटना ने न केवल स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि जिले में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं और किशोरों के बीच हथियार रखने के बढ़ते चलन को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
कैसे हुई यह घटना?
गुरुवार सुबह मिडिल स्कूल रिसदा में सातवीं कक्षा की परीक्षा चल रही थी। तभी एक छात्र ने अपने सहपाठी पर चाकू से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमला परीक्षा कक्ष के अंदर ही हुआ, जहां कोई शिक्षक मौजूद नहीं था।
सूत्रों के मुताबिक—
🔹 परीक्षा कक्ष में कोई भी शिक्षक या पर्यवेक्षक मौजूद नहीं था।
🔹 हमले के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और अन्य छात्रों ने शोर मचाना शुरू कर दिया।
🔹 शिक्षकों को जब इस घटना की जानकारी मिली, तब वे स्टाफ रूम में गपशप कर रहे थे।
🔹 घायल छात्र को आनन-फानन में शिक्षकों ने अपने चारपहिया वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया।
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि—
“घायल छात्र के जांघ पर चाकू से हमला किया गया है। फिलहाल उसकी हालत सामान्य है और वह खतरे से बाहर है।”
बलौदाबाजार स्कूल प्रशासन की लापरवाही उजागर!
इस घटना ने स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर किया है।
📌 कैसे कोई छात्र चाकू लेकर परीक्षा कक्ष तक पहुंच गया?
📌 स्कूल में प्रवेश के समय कोई चेकिंग क्यों नहीं की गई?
📌 परीक्षा कक्ष में शिक्षक क्यों मौजूद नहीं थे?
यह घटना यह दिखाती है कि स्कूलों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आज यह एक छात्र था, लेकिन अगर किसी ने बड़ा अपराध कर दिया होता तो कौन जिम्मेदार होता?
बलौदाबाजार जिले में बढ़ रही चाकूबाजी की घटनाएं!
बलौदाबाजार जिले में किशोरों और युवाओं के बीच चाकू और अन्य धारदार हथियार रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बीते एक साल में पुलिस ने ऑनलाइन कंपनियों से 120 से अधिक बटनदार फैंसी चाकू बरामद किए हैं।
🔹 बटनदार फैंसी चाकू किशोरों और युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
🔹 ये चाकू ऑनलाइन और स्थानीय बाजारों में सस्ते दामों पर आसानी से उपलब्ध हैं।
🔹 कई किशोर इन चाकुओं को स्टाइल और आत्मरक्षा के नाम पर खरीद रहे हैं, लेकिन ये धीरे-धीरे अपराध में इस्तेमाल हो रहे हैं।
हाल ही में जिले के एडिशनल एसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि—
“पुलिस लगातार ऑनलाइन कंपनियों को नोटिस देकर ऐसे चाकू और अन्य धारदार हथियार बरामद कर रही है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज की जाएगी। साथ ही, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।”
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ पुलिस की कार्रवाई काफी होगी? या फिर अभिभावकों और शिक्षकों को भी सतर्क रहना पड़ेगा?
क्या बलौदाबाजार में नशाखोरी अपराधों को बढ़ा रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में बढ़ती नशाखोरी भी किशोर अपराधों की एक बड़ी वजह बन रही है। जिले में—
🚨 शराब के अलावा गांजा, नशीली गोलियां, सालूशन, व्हाइटनर और अन्य नशे तेजी से फैल रहे हैं।
🚨 किशोर और युवा इन नशों के आदी हो रहे हैं, जिससे उनमें आक्रामकता और हिंसा बढ़ रही है।
🚨 स्कूलों और कॉलेजों के आसपास भी कई बार नशे के सौदागरों की मौजूदगी देखी गई है।
👉 अगर समय रहते इस बढ़ती नशाखोरी पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में जिले में अपराधों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
समाज के लिए बड़ा सबक
स्कूल में बढ़ती हिंसा और चाकूबाजी जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अब समाज को भी सतर्क होने की जरूरत है। शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अनुशासन, नैतिकता और समाज में सही व्यवहार सिखाने पर भी ध्यान देना होगा।
समाधान क्या है?
✔ स्कूलों में सुरक्षा कड़ी हो: छात्रों की बैग चेकिंग अनिवार्य हो और परीक्षा के दौरान शिक्षक परीक्षा कक्ष में ही रहें।
✔ ऑनलाइन घातक हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध: बटनदार चाकू और अन्य खतरनाक हथियारों की बिक्री पर सरकार को सख्ती से रोक लगानी होगी।
✔ माता-पिता की जिम्मेदारी: अभिभावकों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और उन्हें सही दिशा देनी होगी।
✔ नशे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई: प्रशासन को नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
✔ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए: गुस्सा और आक्रामकता कम करने के लिए स्कूलों में काउंसलिंग अनिवार्य की जाए।
अगर समय रहते प्रशासन, स्कूल और माता-पिता ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और भी भयावह रूप ले सकती हैं।
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