बलौदाबाजार में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म: फॉरेस्ट गार्ड को 10 साल की सजा, बलौदाबाजार फास्ट ट्रैक कोर्ट का सख्त फैसला।फास्ट ट्रैक कोर्ट का सख्त फैसला, बार-बार शोषण के बाद शादी से मुकरा आरोपी…15 गवाहों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध, जुर्माना भी लगाया गया
बलौदा बाजार। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बलौदाबाजार ने एक अहम फैसले में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला कसडोल थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए आरोपी को दोषी ठहराया और सख्त सजा सुनाई।
सरकारी क्वार्टर में शुरू हुआ शोषण का सिलसिला?
विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा के अनुसार, आरोपी युधिष्ठिर डड़सेना, जो ग्राम कोसमसरा में वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर कार्यरत था, ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर अपने साथ सरकारी क्वार्टर में ले गया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी ने 28 जनवरी 2021 को पहली बार उसे अपने क्वार्टर में ले जाकर शादी का वादा किया और शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी ने कई बार अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर इसी तरह दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी हर बार शादी का भरोसा दिलाता रहा, लेकिन जब उसने बार-बार विवाह की बात कही तो आरोपी ने साफ इंकार कर दिया।
रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ मामला देखिए
आखिरकार पीड़िता ने साहस जुटाते हुए 24 जून 2024 को थाना कसडोल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(N) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। जांच के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई।
अदालत में 15 गवाह, मजबूत साक्ष्य?
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए। विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने अदालत में सशक्त पैरवी करते हुए सभी साक्ष्यों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया। अभियोजन ने यह साबित किया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता का लंबे समय तक शोषण किया और बाद में अपने वादे से मुकर गया।
न्यायालय का सख्त फैसला
सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 3000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि आरोपी जुर्माना राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त 6 माह का कारावास भुगतना होगा।
जिम्मेदार पद पर रहते हुए किया अपराध ?
मामले की सबसे गंभीर बात यह रही कि आरोपी वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड जैसे जिम्मेदार पद पर कार्यरत था। ऐसे पद पर रहते हुए इस प्रकार का अपराध करना समाज में गलत संदेश देता है। इस पहलू को भी अदालत ने गंभीरता से लिया और सख्त सजा सुनाकर यह स्पष्ट किया कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, अपराध करने पर बख्शा नहीं जाएगा।
पीड़िता के साहस को मिली न्यायिक मान्यता !
इस पूरे मामले में पीड़िता ने लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक दबाव झेलने के बावजूद न्याय के लिए आवाज उठाई। अदालत का यह फैसला न सिर्फ उसे न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज में एक मजबूत संदेश भी देता है कि अपराधियों को सजा जरूर मिलती है।
अभियोजन पक्ष की अहम भूमिका…
विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा ने बताया कि मामले में सभी साक्ष्यों को मजबूती से अदालत के सामने रखा गया, जिससे आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध हो सका। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में सटीक जांच और मजबूत पैरवी बेहद जरूरी होती है, तभी पीड़ित को न्याय मिल पाता है।
समाज के लिए संदेश विशेष लोक अभियोजक निशा शर्मा!
यह फैसला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो शादी का झांसा देकर महिलाओं का शोषण करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।बलौदाबाजार में आया यह फैसला न्याय व्यवस्था की दृढ़ता को दर्शाता है। पीड़िता के साहस, पुलिस की जांच और अभियोजन की मजबूत पैरवी ने मिलकर एक अपराधी को सजा दिलाई। यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करता है और यह संदेश देता है कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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