



बलौदाबाजार मनोविकास केंद्र पहुंचे राज्यपाल रमेन डेका, विशेष बच्चों से की मुलाकात, शिक्षण व थेरेपी सेवाओं की सराहना कर बताया सेवा का अनूठा उदाहरण।
“जब मासूम मुस्कान ने छू लिया एक राज्यपाल का दिल”
(बलौदाबाजार के मनोविकास केंद्र की कहानी)
चंदु वर्मा, रायपुर: कभी-कभी कुछ दृश्य केवल आंखों से नहीं, दिल से देखे जाते हैं – कुछ मुलाकातें केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मा को छू जाने वाली होती हैं। बलौदाबाजार में ऐसा ही एक दृश्य मासूम मुस्कान और मजबूत हौसलों की कहानी बना। बलौदाबाजार की एक शांत सुबह थी। चारों ओर हल्की-हल्की गर्मी और फिजाओं में बच्चों की मासूम हँसी की मिठास घुली हुई थी। लेकिन यह कोई आम दिन नहीं था। आज, इन मासूम हँसी के बीच कोई खास मेहमान आने वाला था — राज्यपाल रमेन डेका।
जैसे ही राज्यपाल की गाड़ी मनोविकास केंद्र परिसर में पहुँची, वहाँ खड़े बच्चे, जो मानसिक या शारीरिक रूप से चुनौतियों का सामना कर रहे थे, अपने पूरे मन से मुस्कराते हुए उनका स्वागत करने लगे। किसी के हाथ में स्केच था, किसी के पास एक छोटा सा ग्रीटिंग कार्ड। बच्चों ने शायद यह नहीं सीखा था कि कोई “राज्यपाल” क्या होता है, लेकिन उन्होंने यह जरूर जान लिया था कि प्यार और सम्मान कैसे दिया जाता है।
बलौदाबाजार मनोविकास केंद्र: बच्चों से मुलाकात – दिल को छू जाने वाला पल
राज्यपाल जब बच्चों के बीच पहुँचे, तो प्रशासनिक औपचारिकताओं की जगह एक दादा-पोते जैसा रिश्ता बन गया। उन्होंने बच्चों से पज़ल्स हल करवाई, अक्षरों की पहचान कराई और जब बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए, तो उनके चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
एक बच्चे ने आगे बढ़कर अपने हाथों से बनाई एक स्केच तस्वीर राज्यपाल को दी – उनकी ही तस्वीर।
राज्यपाल ने उसे देखा, फिर बच्चे की आंखों में देखा – और बस, वही पल सब पर भारी पड़ गया।
जब योग और मंत्रों ने बना दिया माहौल भावनात्मक
एक ओर, शेष साहू ने मंच पर खड़े होकर संजीदगी से गायत्री मंत्र का उच्चारण किया। तो दूसरी ओर, नीलकमल, पुष्कर और सोमनाथ ने मिलकर ऐसा योग प्रदर्शन किया, जिसे देख कर राज्यपाल भी तालियाँ बजाने से खुद को रोक न सके।
यह कोई साधारण प्रस्तुति नहीं थी — यह आत्मविश्वास और संघर्ष की वो उड़ान थी, जिसे देख कर आंखें नम और दिल गर्व से भरा हो गया।
बलौदाबाजार मनोविकास केंद्र – जहाँ सेवा, संवेदना और समर्पण मिलते हैं
यह केंद्र, अंबुजा अडानी सीमेंट संयंत्र रवान के सीएसआर के तहत जनवरी 2025 से शुरू हुआ है। केवल तीन महीनों में यहाँ 40 से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को न केवल शिक्षा, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है।
- फिजियोथेरेपी, स्पीच और बिहेवियर थेरेपी
- कंप्यूटर साक्षरता, बागवानी, सिलाई जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण
- सांस्कृतिक और खेल गतिविधियाँ
- मनोवैज्ञानिक परामर्श
- आत्मनिर्भरता के लिए विशेष कौशल विकास

डॉ. हेमशैली मिश्रा, फिजियोथेरेपी डॉक्टर, मनोविकास केंद्र: “मनोविकास केंद्र में हर बच्चे की जरूरत को समझते हुए थेरेपी सेवाएं दी जाती हैं। हमारा प्रयास है कि इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जाए और समाज में उनका सम्मानजनक स्थान सुनिश्चित किया जाए। राज्यपाल महोदय की सराहना से हमें और भी प्रेरणा मिली है।”
यहाँ बच्चों को सिर्फ ‘इलाज’ नहीं मिलता – उन्हें पहचान मिलती है, मंच मिलता है, और सबसे ज़रूरी, उन्हें एक समान समाज का हिस्सा बनने का अधिकार मिलता है।
राज्यपाल की आंखों में नमी और शब्दों में सराहना
जब दौरा खत्म हुआ, तो राज्यपाल भावुक थे। उन्होंने कहा –
“यह सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि समाज की आत्मा है। ये बच्चे हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी और सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।”
संवेदनशील शासन, सजग समाज
इस दौरान कलेक्टर दीपक सोनी, एसपी विजय अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत दिव्या अग्रवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। सभी ने बच्चों के साथ बातचीत की, उनके प्रयासों को सराहा और यह वादा किया कि ये प्रयास और आगे बढ़ेंगे।
डॉ. मयूर गुप्ता, डायरेक्टर, मनोविज्ञान केंद्र: “यह केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि इन बच्चों के सपनों और आत्मनिर्भरता की राह का एक मजबूत पड़ाव है। मानसिक विकास और व्यवहारगत सुधार की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। राज्यपाल महोदय की उपस्थिति से यह संदेश और सशक्त हुआ है कि इन बच्चों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास जारी रहने चाहिए।”
“विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के विकास के लिए मनोविकास केंद्र जैसी पहल समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम हैं। प्रशासन हर संभव प्रयास करेगा कि यह केंद्र और अधिक संसाधनों के साथ आगे बढ़े और इन बच्चों को बेहतर अवसर मिलें।” -दीपक सोनी, कलेक्टर, बलौदाबाजार
ललित साहू, योगा टीचर, मनोविकास केंद्र: “योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक संतुलन का माध्यम भी है। विशेष बच्चों में आत्मविश्वास और एकाग्रता बढ़ाने के लिए योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्यपाल जी के साथ बच्चों का प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक रहा।”
कहानी का अंत नहीं – ये तो एक नई शुरुआत है।
बलौदाबाजार का यह छोटा सा केंद्र एक बड़ी सीख दे गया —
जहाँ संवेदना है, वहाँ परिवर्तन जरूर होता है। और जहाँ सेवा है, वहाँ समाज कभी पीछे नहीं रहता।
यह कोई आम दौरा नहीं था – यह उन बच्चों के जीवन में उम्मीद का उजाला लेकर आया, जिन्हें समाज अक्सर पीछे छोड़ देता है।
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