



गाली देने से मना करने पर युवक की बेरहमी से हत्या! बलौदाबाजार के बोरसी गांव में दिल दहलाने वाली वारदात, 2 युवक और 1 नाबालिग गिरफ्तार। जानिए पूरी कहानी
एक टोकने की इतनी बड़ी सजा?!
चंदु वर्मा, बलौदाबाजार: अभी 19 साल की उम्र ही तो थी रामायण ध्रुव की। आंखों में भविष्य के सपने थे, और दिल में गांव के लिए कुछ कर गुजरने की उम्मीद। लेकिन किसे पता था कि एक साधारण-सी बात, एक सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन—”गाली देना बंद करो” कहना—उसकी जिंदगी की आखिरी आवाज बन जाएगी।
घटना की रात – जब चुप रह जाना मौत को टाल सकता था…
3 अप्रैल 2025, रात करीब 8 बजे का वक्त। बोरसी (ध) गांव की गलियां रोज की तरह शांत थीं। मगर उसी शाम गांव के भीतर कुछ अनजान चेहरे आए थे—करन उर्फ सेवक देवदास, लेखराम यादव उर्फ लालु और उनके साथ एक नाबालिग लड़का।
गांव में आते ही उन्होंने शराब के नशे में जमकर गाली-गलौच शुरू कर दी। उसी गली में खड़ा था रामायण ध्रुव, जिसे यह बर्दाश्त नहीं हुआ। वह सामने आया और बोला—
“गांव में गाली-गलौच मत करो। यहां बच्चे भी रहते हैं।”
बस इतनी-सी बात थी… लेकिन उन युवकों को यह सुनना गंवारा न हुआ। गुस्से में लाल आंखों के साथ वे रामायण पर टूट पड़े। पहले उसे पीटा, फिर जेब से निकाले धारदार हथियार से वार पर वार करते गए—इतने कि रामायण वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ा… और कुछ ही पलों में उसकी सांसें थम गईं।
एक मां का टूटता सपना, एक बाप का बुझता दीपक…
सुबह जब गांव में यह खबर फैली, हर आंख नम हो गई। रामायण के घर में कोहराम मच गया।
मां बेसुध पड़ी थी—“मोर लइका तो कहिथे नौकरी खोजथं, फेर ए नइ कहिस के मंय आज लउटहूं नहीं…”
पिता राजेन्द्र ध्रुव की आंखें शून्य में ताक रही थीं—जैसे उनका संसार वहीं ठहर गया हो।
भाटापारा ग्रामीण थाना पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: 24 घंटे में आरोपी सलाखों के पीछे
घटना की सूचना मिलते ही भाटापारा ग्रामीण थाना की पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी लखेश केवट ने विशेष टीम गठित की और गांव में जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आए नाम—
- करन उर्फ सेवक देवदास (उम्र 19 वर्ष)
- लेखराम यादव उर्फ लालु (उम्र 19 वर्ष)
- एक नाबालिग बालक
तीनों ग्राम गुडेलिया थाना भाटापारा ग्रामीण के निवासी हैं। आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि—
“हमने गाली दी थी। उसने टोका, गुस्से में मारा डाले।”
पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया है।
दोनों बालिगों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया, और नाबालिग को किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत किया गया।
एक गांव का सवाल: क्या इंसान की जान की कीमत इतनी कम हो गई है?
बोरसी (ध) आज शोक में डूबा है, लेकिन साथ ही एक बेचैनी भी है—क्या अब गांव में कोई किसी गलत चीज के खिलाफ आवाज भी नहीं उठा सकता?
गांव के बुजुर्ग कहते हैं—
“अगर समाज में गलत को रोकना जानलेवा हो जाए, तो फिर अच्छाई किस दिशा में जाएगी?”
पुलिस की मुस्तैदी बनी राहत की किरण
बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना प्रभारी लखेश केवट ने कहा— “ऐसे अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जिले में कानून का राज स्थापित है और रहेगा।” भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गांवों में अपराधियों की निगरानी, गश्त और जन-जागरूकता अभियान चलाने की भी तैयारी है।
न्याय की आस, समाज से सवाल
रामायण ध्रुव अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी हत्या ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या गलत को रोकना अब जानलेवा हो गया है?
क्या संवेदनशीलता की जगह अब हिंसा ने ले ली है?
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