डूबने और सर्पदंश की घटनाओं में हुई मौत के बाद प्रशासन ने दी आर्थिक सहायता..राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत 4-4 लाख रुपये प्रति परिवार स्वीकृत

प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले 5 परिवारों को 20 लाख की राहत, डूबने और सर्पदंश की घटनाओं में हुई मौत के बाद प्रशासन ने दी आर्थिक सहायता..राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत 4-4 लाख रुपये प्रति परिवार स्वीकृत…

बलौदा बजार। जिले में प्राकृतिक आपदाओं के कारण जान गंवाने वाले पांच परिवारों को प्रशासन की ओर से बड़ी राहत मिली है। कलेक्टर दीपक सोनी ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत प्रत्येक परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। कुल मिलाकर 20 लाख रुपये की अनुदान राशि संबंधित वैध वारिसों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी। यह सहायता उन परिवारों के लिए है जिन्होंने हाल के दिनों में अपने घर के कमाने वाले सदस्य या परिजन को असामयिक हादसों में खो दिया। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित राहत देना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, ताकि पीड़ित परिवारों को शुरुआती आर्थिक संबल मिल सके।

डूबने से गई चार लोगों की जान

प्राप्त जानकारी के अनुसार चार मामलों में पानी में डूबने से मौत हुई।

* तहसील भाटापारा के ग्राम बोरसी निवासी दानेश्वर साहु की डूबने से मृत्यु हुई।
* तहसील भाटापारा के ही ग्राम मल्दी निवासी शिव कुमार यदु की भी इसी तरह जान गई।
* तहसील सुहेला के ग्राम आमाकोनी निवासी ताराचंद ध्रुव की पानी में डूबने से मौत हुई।
* तहसील पलारी के ग्राम ओड़ान निवासी मनोज कुमार ध्रुव भी डूबने की घटना में काल का शिकार हुए।

ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, नहर और नदी किनारे सुरक्षा उपायों की कमी अक्सर ऐसी घटनाओं को जन्म देती है। कई बार नहाने, मछली पकड़ने या खेतों से लौटते समय हादसे हो जाते हैं। इन चारों मामलों में भी अचानक हुई दुर्घटना ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।

सर्पदंश से एक और परिवार उजड़ा

पांचवां मामला तहसील लवन के ग्राम सुनसुननिया से जुड़ा है, जहां जमुना कैवर्तत्य की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। ग्रामीण इलाकों में बरसात और गर्मी के मौसम में सांपों की गतिविधि बढ़ जाती है। समय पर उपचार न मिलने या अस्पताल तक पहुंचने में देरी होने से कई बार जान चली जाती है। सर्पदंश की घटनाएं हर साल कई परिवारों को प्रभावित करती हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता अभियान चलाता है, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में अब भी त्वरित चिकित्सा सुविधा चुनौती बनी हुई है।

क्या है राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4?

राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत प्राकृतिक आपदाओं जैसे डूबने, सर्पदंश, आकाशीय बिजली, बाढ़ या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं में मृत्यु होने पर शासन द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देना है। इस प्रावधान के अनुसार मृतक के निकटतम वैध वारिस को 4 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जाती है। यह राशि सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज रहे।

प्रशासन ने दिए त्वरित निर्देश

कलेक्टर दीपक सोनी ने संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत राशि बिना देरी के मृतकों के वैध वारिसों के बैंक खातों में जमा कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करना आवश्यक है। पीड़ित परिवार पहले से ही मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में राहत राशि समय पर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण होता है।

आर्थिक सहायता से कितनी राहत?

हालांकि किसी प्रियजन की मौत की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन 4 लाख रुपये की सहायता राशि परिवार के लिए शुरुआती सहारा बन सकती है। ग्रामीण परिवारों में अक्सर मृतक ही मुख्य कमाने वाला सदस्य होता है। अचानक हुई मौत से घर की आय रुक जाती है और परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है। ऐसे में शासन की यह सहायता बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों या कर्ज चुकाने में मददगार साबित हो सकती है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।

बढ़ती घटनाएं, बढ़ती चिंता

डूबने और सर्पदंश की घटनाएं जिले में समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों के पास चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और जागरूकता अभियान बढ़ाने की जरूरत है।
इसी तरह सर्पदंश से बचाव के लिए ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार की जानकारी, एंटी-वेनम दवाओं की उपलब्धता और त्वरित परिवहन सुविधा सुनिश्चित करना जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर राहत राशि देना एक पहलू है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं कम हों, इसके लिए रोकथाम के उपाय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

परिवारों में गम का माहौल

इन पांचों गांवों में मातम पसरा है। परिजनों के लिए यह सदमा बेहद गहरा है। गांवों में शोक की लहर है और लोग परिवारों को सांत्वना दे रहे हैं। कई मामलों में मृतक युवा थे और परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। अचानक हुई इन घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

शासन की संवेदनशील पहल

प्राकृतिक आपदाओं में राहत राशि स्वीकृत करना शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी। राजस्व विभाग की टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी आपदा संबंधी घटना की सूचना मिलते ही आवश्यक प्रक्रिया शुरू करें, ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।

राहत राशि स्वीकृत होना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जिले में आपदा प्रबंधन को और मजबूत किया जाए। जल स्रोतों के पास सुरक्षा व्यवस्था, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है। जानकारों का कहना है कि सामुदायिक स्तर पर भी सतर्कता जरूरी है। ग्रामीणों को चाहिए कि वे बच्चों और युवाओं को अकेले गहरे पानी में जाने से रोकें और सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाएं।

राहत के साथ उम्मीद

कुल मिलाकर, पांच परिवारों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत होना प्रशासन की ओर से त्वरित राहत का संकेत है। यह कदम उन परिवारों के लिए थोड़ी राहत जरूर लेकर आएगा, जो अचानक आई आपदा से टूट चुके हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि राहत के साथ-साथ रोकथाम के उपायों को भी मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति न हो। जिले के लिए यह घटना एक चेतावनी भी है और प्रशासन के लिए जिम्मेदारी का स्मरण भी। राहत राशि से कुछ आर्थिक सहारा मिलेगा, लेकिन असली चुनौती है ऐसी घटनाओं को कम करना और हर गांव तक सुरक्षा व जागरूकता पहुंचाना।

 

रिपोर्ट: चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com

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