औद्योगिक सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त: जिले के सभी कारखानों में सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य, रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश, इन औद्योगिक इकाइयों को दिए गए निर्देश

औद्योगिक सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त: जिले के सभी कारखानों में सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य, रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश, इन औद्योगिक इकाइयों को दिए गए निर्देश

बलौदा बाजार।बलौदाबाजार जिले में औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। तहसील भाटापारा अंतर्गत ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी प्लांट में विगत माह हुई औद्योगिक दुर्घटना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दीपक सोनी ने जिले के सभी औद्योगिक कारखानों में सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में आदेश जारी कर कारखाना प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संपरीक्षा की अद्यतन रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्रस्तुत करें। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ श्रमिकों और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की लापरवाही, तकनीकी खामी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

औद्योगिक दुर्घटना के बाद लिया गया निर्णय

ग्राम बकुलाही स्थित रियल इस्पात एंड एनर्जी प्लांट में हाल ही में हुई औद्योगिक दुर्घटना ने प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्थाओं की दोबारा समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया। इस घटना के बाद यह स्पष्ट हुआ कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का नियमित परीक्षण और निगरानी अत्यंत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर दीपक सोनी ने जिले में संचालित सभी प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य संभावित जोखिमों की पहचान करना, कमियों को दूर करना और भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना को न्यूनतम करना है।

सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट करना होगा प्रस्तुत

जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी चिन्हित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के कारखाना प्रबंधकों को अपने-अपने प्लांट का सुरक्षा संपरीक्षा यानी सेफ्टी ऑडिट कराकर उसकी अद्यतन रिपोर्ट प्रशासन को सौंपनी होगी। यह ऑडिट तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से कराया जाना अपेक्षित है, ताकि सुरक्षा से जुड़े हर पहलू का गहन मूल्यांकन किया जा सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट केवल औपचारिकता न हो, बल्कि उसमें वास्तविक स्थिति, जोखिम वाले बिंदु, उपकरणों की स्थिति, आपातकालीन व्यवस्थाएं और सुधारात्मक सुझाव स्पष्ट रूप से दर्ज हों।

इन औद्योगिक इकाइयों को दिए गए निर्देश

जारी आदेशानुसार जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधकों को सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें शामिल हैं—

मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, ग्राम रावन
मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, ग्राम हिरमी
मेसर्स अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, ग्राम सेमराडीह
मेसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड, ग्राम रवान
मेसर्स नु विस्टा लिमिटेड, ग्राम रिसदा
मेसर्स श्री रायपुर सीमेंट प्लांट, ग्राम खपराडीह
मेसर्स न्यूवोको विस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड, ग्राम रसेड़ा
मेसर्स एपीएल अपोलो बिल्डिंग प्रोडक्ट्स प्रा.लि., ग्राम रिंगनी
मेसर्स रियल इस्पात एनर्जी प्रा.लि., ग्राम बकुलाही
मेसर्स अनिमेष इस्पात प्रा.लि., ग्राम खजुरी
इन सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अपने कारखानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्रशासन को उपलब्ध करानी होगी।

किन बिंदुओं पर होगा सेफ्टी ऑडिट

सेफ्टी ऑडिट के तहत कारखानों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की जाएगी। इसमें मशीनों और उपकरणों की सुरक्षा स्थिति, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्ग, श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उपयोग, प्रशिक्षण व्यवस्था, रासायनिक पदार्थों का सुरक्षित भंडारण और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे पहलू शामिल हैं। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि किसी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए कारखाने में क्या व्यवस्थाएं मौजूद हैं और कर्मचारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कितना प्रशिक्षित किया गया है।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि किसी कारखाने में सेफ्टी ऑडिट के दौरान गंभीर खामियां पाई जाती हैं और उन्हें समय पर दूर नहीं किया जाता, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें वैधानिक कार्रवाई, जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं। कलेक्टर ने यह भी कहा है कि औद्योगिक इकाइयों को केवल उत्पादन और मुनाफे पर ही नहीं, बल्कि श्रमिकों की सुरक्षा और जीवन की रक्षा पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।

श्रमिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

जिले में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जहां हजारों श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की दुर्घटना न केवल प्रभावित परिवारों के लिए त्रासदी बनती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी गहरा प्रभाव डालती है। प्रशासन का मानना है कि नियमित सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों का पालन करने से दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके साथ ही श्रमिकों में भी सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।

औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा जरूरी

बलौदाबाजार जिला औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीमेंट, इस्पात और अन्य निर्माण सामग्री से जुड़े कई बड़े उद्योग यहां स्थापित हैं। औद्योगिक विकास से रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ-साथ सुरक्षा चुनौतियां भी सामने आई हैं। प्रशासन का यह कदम इस बात का संकेत है कि जिले में विकास और सुरक्षा दोनों को समान महत्व दिया जा रहा है। औद्योगिक प्रगति तभी टिकाऊ मानी जाएगी, जब वह सुरक्षित और जिम्मेदार ढंग से हो।

प्रशासन की सतत निगरानी

कलेक्टर दीपक सोनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उनकी समीक्षा की जाए और आवश्यकतानुसार स्थल निरीक्षण भी किया जाए। जिन कारखानों में सुधार की आवश्यकता होगी, वहां समय-सीमा तय कर सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे। प्रशासन का यह भी कहना है कि भविष्य में भी समय-समय पर औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

जिले के सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य करने का प्रशासनिक निर्णय औद्योगिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालिया दुर्घटना से सबक लेते हुए यह कार्रवाई न केवल संभावित खतरों को रोकने में सहायक होगी, बल्कि श्रमिकों और स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ाएगी। अब यह जिम्मेदारी औद्योगिक प्रबंधन पर है कि वे प्रशासन के निर्देशों का गंभीरता से पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि उत्पादन के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

📍बलौदाबाजार से केशव साहू की  ग्राउंड रिपोर्ट

चंद्रकांत वर्मा, संपादक – ChhattisgarhTalk.com
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